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'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ

नई दिल्ली। जर्मनी के पूर्व कप्तान और दिग्गज गोलकीपर ओलिवर कान का मानना है कि फुटबॉल इतिहास में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता दोबारा देखने को मिलना बेहद मुश्किल है। उनके अनुसार दोनों खिलाड़ियों ने लगभग दो दशकों तक लगातार एक-दूसरे को बेहतर बनने की प्रेरणा दी और अपने शानदार प्रदर्शन से विश्व फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कान ने कहा कि उनकी प्रतिस्पर्धा केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही बल्कि मैदान पर प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के दम पर इतिहास रचा गया। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान विशेषज्ञ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे ओलिवर कान ने कहा कि मेसी और रोनाल्डो ने हर सीजन में एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा किया। यही वजह है कि दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों की सूची में अपना दबदबा बनाए रखा। कान के मुताबिक उनकी प्रतिद्वंदिता व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं आगे थी क्योंकि इसने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रशंसकों को लंबे समय तक रोमांचित किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता लेकिन मेसी और रोनाल्डो ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से यह कर दिखाया। दोनों ने क्लब फुटबॉल में कई रिकॉर्ड बनाए और एक-दूसरे को लगातार चुनौती देते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए। कान का मानना है कि इसी कारण यह प्रतिद्वंदिता खेल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिस्पर्धाओं में गिनी जाएगी। ओलिवर कान ने अपने करियर के सबसे यादगार पल के रूप में 2002 फीफा विश्व कप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस टूर्नामेंट में जर्मनी को फाइनल तक पहुंचाना उनके जीवन का सबसे बड़ा अनुभव था। हालांकि फाइनल में हार का दर्द आज भी उनके मन में है क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप जीतना होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि गोलकीपर के रूप में गोल्डन बॉल जीतना उनके लिए गर्व की बात थी लेकिन यदि मौका मिले तो वह इस व्यक्तिगत सम्मान के बदले विश्व कप ट्रॉफी लेना पसंद करेंगे। दिग्गज गोलकीपर ने मौजूदा विश्व कप में खेल रहे युवा खिलाड़ियों और खासकर गोलकीपरों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। खिलाड़ियों को लगातार अपने खेल में सुधार करते रहना चाहिए और बड़े मंच पर दबाव से घबराने के बजाय उसका आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार विश्व कप ऐसा मंच है जहां पूरी दुनिया की नजर खिलाड़ियों पर होती है और कई बार एक पल या एक फैसला पूरे टूर्नामेंट का भविष्य तय कर देता है। इसलिए हर खिलाड़ी को हर क्षण पूरी एकाग्रता के साथ खेलना चाहिए। मेसी और रोनाल्डो को आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने क्लब फुटबॉल में वर्षों तक शानदार मुकाबले खेले और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए। हालांकि विश्व कप में दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ सके। माना जा रहा है कि फीफा विश्व कप 2026 दोनों दिग्गजों का आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजर एक बार फिर इन दोनों खिलाड़ियों पर रहेगी, जो अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर यादगार प्रदर्शन कर इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

CM MOHAN YADAV NEWS: CM ने ग्रामीणों के साथ खाया खाना, रात्रि चौपाल में सुनी लोगों की समस्याएं

CM MOHAN YADAV

CM MOHAN YADAV NEWS: बैतूल। CM मोहन यादव ने बैतूल दौरे के दौरान कुकरू में ग्रामीण शानु मंगल के निवास पर पहुंचकर भोजन किया, जहां ग्रामीण के परिवार सहभागिता निभाई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने परिजनों के साथ श्रीअन्न से बना भोजन भी ग्रहण किया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि बैतूल प्रवास के दौरान एक ग्रामीण परिवार के घर में भोजन करने का यह पल मुझे हमेशा याद रहेगा। BIND NAGAR PARISHAD: नगर परिषद में CMO और इंजीनियर के पद खली, 66 कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन भोजन के दौरान परिवार वालों से की बातचीत मुख्यमंत्री ने भोजन करने के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों से बातचीत की। जहां उन्होंने गांव की संस्कृति, परंपराओं और स्थानीय खान-पान के बारे में जाना। इस मौके पर शानु मंगल भुसुमकर ने बताया कि उन्हें वर्ष 2019-20 में प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला था, जिससे उनका पक्का घर बनने का सपना पूरा हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैतूल प्रवास के दौरान किसी ग्रामीण परिवार के घर बैठकर भोजन करना उनके लिए बेहद यादगार अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि गांव का अपनापन और स्नेह हमेशा उनकी स्मृतियों में रहेगा। IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू रात्रि चौपाल में लोगों से की बातचीत भोजन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्राम पंचायत कुकरू में आयोजित रात्रि चौपाल में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं व सुझाव सुने। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव की सादगी, आत्मीयता और लोगों का विश्वास ही जनसेवा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों का आशीर्वाद उन्हें प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम करने की प्रेरणा देता है। मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी रहे मौजूद इस दौरान केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्यमंत्री एवं सांसद दुर्गादास उइके, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल, भैंसदेही विधायक महेंद्र सिंह चौहान, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर, कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे, पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।

राम मंदिर दान विवाद पर कांग्रेस का केंद्र और यूपी सरकार पर तीखा प्रहार, SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने समेत कई सवालों पर मांगा जवाब

नई दिल्ली । राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरते हुए मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है। पार्टी का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रकरण में अब तक कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं। कांग्रेस ने विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सार्वजनिक करने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने की मांग दोहराई है। कांग्रेस का कहना है कि यदि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया था, तो उसकी रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, जब मामला देशभर के श्रद्धालुओं के विश्वास और दान से जुड़ा है, तब जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की गोपनीयता नहीं बरती जानी चाहिए। कांग्रेस का दावा है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के निष्कर्ष देश के सामने लाए जाने आवश्यक हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ समय के दौरान राम मंदिर परिसर में चोरी की कई घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में चोरी के मामले सामने आए हैं, तो यह जानना भी जरूरी है कि पिछले वर्षों में कुल कितनी घटनाएं हुईं, कितना सामान गायब हुआ और दान में प्राप्त संपत्तियों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी। पार्टी ने मांग की कि पूरे रिकॉर्ड का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए ताकि किसी भी तरह की आशंका समाप्त हो सके। जांच प्रक्रिया को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कार्रवाई केवल सीमित स्तर तक की गई है, जबकि यदि किसी बड़े स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का कहना है कि जांच का दायरा व्यापक होना चाहिए और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को केवल पद या प्रभाव के आधार पर जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार को घेरा है। पार्टी का कहना है कि जब मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए विभिन्न एजेंसियां और सुरक्षा कर्मी तैनात हैं, तब लगातार चोरी की घटनाओं के आरोप गंभीर चिंता का विषय हैं। कांग्रेस ने निजी सुरक्षा व्यवस्था की भूमिका और उसकी जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं चूक हुई है तो उसकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि दान में प्राप्त आभूषणों, नकदी और अन्य मूल्यवान वस्तुओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। पार्टी का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित प्रत्येक वस्तु का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध होना चाहिए ताकि किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो। इसके साथ ही पूरे चढ़ावे का स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी दोहराई गई है। पार्टी ने राज्य सरकार से SIT रिपोर्ट सार्वजनिक करने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आवश्यक होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था या प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार अब तक इस पूरे विवाद पर स्पष्ट स्थिति रखने से बच रही है। राम मंदिर को करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के किसी भी विवाद का समाधान केवल पारदर्शी जांच, जवाबदेही और तथ्यों को सार्वजनिक करने से ही संभव है। पार्टी का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने और सभी संबंधित तथ्यों के सामने आने से ही श्रद्धालुओं का विश्वास और संस्थागत पारदर्शिता मजबूत हो सकेगी।

SIR विवाद पर विपक्ष की न्यायपालिका से दखल की मांग, 23 राजनीतिक दल और एक निर्दलीय सांसद एकजुट, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जताई गहरी चिंता

नई दिल्ली । देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन- SIR) अभियान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन ‘INDIA जनबंधन’ से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संयुक्त पत्र भेजकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं। विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची के सत्यापन की वर्तमान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और संवैधानिक मानकों के अनुरूप बनाए जाने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी पात्र मतदाता के अधिकार प्रभावित न हों। विपक्षी दलों का कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकता है। इसी कारण सभी दलों ने एकजुट होकर सर्वोच्च न्यायपालिका का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि इस विषय पर न्यायिक स्तर पर आवश्यक मार्गदर्शन और निगरानी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने पहले भी आपसी स्तर पर कई दौर की चर्चा की थी। हाल ही में आयोजित बैठक में विभिन्न दलों ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित SIR प्रक्रिया और उससे जुड़े अन्य चुनावी विषयों पर साझा रणनीति तैयार की। बैठक में यह सहमति बनी कि इन चिंताओं को औपचारिक रूप से देश के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए। बाद में इस पहल को व्यापक समर्थन मिला और संयुक्त पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले दलों की संख्या बढ़कर 23 हो गई। संयुक्त पत्र को कई प्रमुख विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है। इसमें विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दलों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के दल भी शामिल हैं। एक निर्दलीय सांसद ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का कहना है कि यह कदम किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। विवाद का केंद्र चुनाव आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान है। इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही परिवार आधारित विवरण का मिलान, रिकॉर्ड का अद्यतन तथा फर्जी या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाने की कार्रवाई भी की जा रही है। चुनाव आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना बताया जा रहा है, ताकि भविष्य में चुनाव प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय हो सके। हालांकि विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर वैध मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। उनका कहना है कि यदि सत्यापन अभियान पूरी पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ नहीं चलाया गया तो बड़ी संख्या में पात्र नागरिक अपने मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं। विपक्ष ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र समीक्षा और प्रभावी निगरानी आवश्यक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण बहस का विषय बन सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजे गए इस संयुक्त पत्र पर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है और चुनाव आयोग इस संबंध में उठाई गई चिंताओं पर किस प्रकार अपनी प्रतिक्रिया देता है। आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी सुधार और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चर्चा का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।

देश की सेवा जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य' कहकर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सौंपी जिम्मेदारी, संयुक्त सैन्य शक्ति पर दिया भविष्य का विजन

नई दिल्ली । भारतीय सेना में नेतृत्व परिवर्तन के महत्वपूर्ण चरण के तहत मंगलवार को जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना प्रमुख का पदभार जनरल धीरज सेठ को सौंप दिया। चार दशक से अधिक समय तक भारतीय सेना की सेवा करने वाले जनरल द्विवेदी ने अपने विदाई संबोधन में सैन्य जीवन को अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया और कहा कि देश की रक्षा के लिए समर्पित प्रत्येक सैनिक का योगदान भारतीय सेना की सबसे बड़ी शक्ति है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। अपने विदाई संबोधन में जनरल द्विवेदी ने कहा कि सैनिक विद्यालय से लेकर भारतीय सेना के सर्वोच्च पद तक का उनका सफर अविस्मरणीय रहा। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल समाप्त करते हुए उनके मन में विनम्रता, कृतज्ञता, गर्व और संतोष की भावना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना की असली ताकत किसी एक व्यक्ति में नहीं, बल्कि उन लाखों सैनिकों, अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और देशवासियों के विश्वास में निहित है, जिन्होंने हमेशा सेना का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने उन सभी सैनिकों को विशेष श्रद्धांजलि दी जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना की परंपराएं, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा ही उसकी सबसे बड़ी पहचान हैं और यही मूल्य भविष्य में भी सेना का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि नया नेतृत्व भी इन्हीं आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए सेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले दो वर्षों में भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर उच्च स्तर की तैयारी, सतर्कता और संतुलन बनाए रखा। उन्होंने उत्तरी सीमाओं पर संचालित ऑपरेशन स्नो लेपर्ड का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सेना ने पूरी मजबूती और सजगता के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इसी प्रकार पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी सेना ने अनुशासन, संयम और रणनीतिक दक्षता का प्रभावी प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रत्येक निर्णय और कार्रवाई में भारतीय सेना ने स्पष्ट उद्देश्य, जिम्मेदारी और पेशेवर दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी। इसी सोच ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में देश के लिए एक नए सुरक्षा मानक को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य में संयुक्त सैन्य अभियानों का महत्व लगातार बढ़ेगा। जनरल द्विवेदी ने तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते समन्वय को भी अपने कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना ने साझा रणनीति, आपसी विश्वास और बेहतर समन्वय के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत किया है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध अधिक एकीकृत, तकनीक आधारित और संयुक्त अभियान पर केंद्रित होंगे। इसलिए तीनों सेनाओं को एक साथ स्थिति का आकलन करने, संयुक्त रूप से निर्णय लेने और समन्वित कार्रवाई करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। नई जिम्मेदारी संभालने वाले जनरल धीरज सेठ के नेतृत्व में भारतीय सेना अब बदलती सुरक्षा चुनौतियों और आधुनिक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप अपनी रणनीतियों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। नेतृत्व परिवर्तन के इस अवसर पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण के साथ भविष्य में भी देश की सुरक्षा सुनिश्चित करती रहेगी।

शामली धर्मांतरण विवाद में नया मोड़, आयुष मलिक ने दोबारा अपनाया हिंदू धर्म; परिवार से मांगी माफी, बोले- अपनी इच्छा से लौटा हूं

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के शामली जिले में धर्मांतरण से जुड़ा चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। कुछ समय पहले इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले आयुष मलिक ने अब दोबारा हिंदू धर्म अपनाने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में वह धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में वापसी करने का निर्णय लिया है और अब वह अपने परिवार के साथ रहकर उनकी देखभाल तथा सुरक्षा को प्राथमिकता देना चाहते हैं। इस घटनाक्रम के बाद यह मामला फिर चर्चा का विषय बन गया है। आयुष मलिक ने वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने पहले इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया था, लेकिन परिवार की भावनाओं और परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौटने का फैसला किया है। उन्होंने अपने माता-पिता से क्षमा भी मांगी और भविष्य में परिवार के साथ रहने की बात दोहराई। वीडियो में धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनकी घर वापसी की प्रक्रिया भी दिखाई गई है। आयुष के पिता देवराज मलिक ने भी पुष्टि की कि उनके बेटे ने औपचारिक रूप से दोबारा हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है। उनका कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह स्वेच्छा से लिया गया है और परिवार ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने पहले भी आरोप लगाया था कि उनके बेटे का योजनाबद्ध तरीके से ब्रेनवॉश किया गया और उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया गया। परिवार का यह भी दावा रहा है कि पूरे मामले के पीछे आर्थिक हित और पारिवारिक संपत्ति से जुड़े उद्देश्य थे। धर्मांतरण विवाद को लेकर पहले दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसी मामले में फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी कुरैशी और उनके पिता इस्लाम कुरैशी के खिलाफ कार्रवाई भी की गई थी। पुलिस ने आरोपों की जांच के बाद दोनों को गिरफ्तार किया था और मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की थी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि धर्म परिवर्तन किन परिस्थितियों में हुआ और उसमें किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या अन्य अवैध तत्व शामिल थे या नहीं। जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार आयुष मलिक की मुलाकात वर्ष 2018 में पैर की चोट के इलाज के दौरान एक स्थानीय अस्पताल में चांदनी से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच संपर्क बढ़ा और संबंध विकसित हुए। परिवार का आरोप है कि इसी दौरान आयुष पर धीरे-धीरे धर्म परिवर्तन का प्रभाव डाला गया। दूसरी ओर, मामले की कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी आरोपों की जांच जारी है और संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। धर्मांतरण और पुनर्धर्म ग्रहण से जुड़ा यह मामला सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर आयुष ने सार्वजनिक रूप से अपनी इच्छा से हिंदू धर्म में लौटने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर पहले दर्ज किए गए धर्मांतरण प्रकरण की जांच और उससे संबंधित न्यायिक प्रक्रिया भी जारी है। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा। फिलहाल आयुष की घर वापसी के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।

BIND NAGAR PARISHAD: नगर परिषद में CMO और इंजीनियर के पद खली, 66 कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन

BHIND NEWS

BIND NAGAR PARISHAD: भिंड। आलमपुर नगर परिषद में विकास कार्यों पर जंग लगती नजर आ रही है। चूंकि यहां करीब एक महीने से नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और इंजीनियर के पद खली है और विकास कार्यों पर ब्रेक लगा हुआ है। इन अव्यवस्थाओं के चलते परिषद की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाएं पूरी तरह ठप हो गयी है। विकास कार्यों की रफ्तार थम गई है, कर्मचारियों का वेतन अटक गया है और शहर की कई जरूरी सुविधाएं भी प्रभावित होने लगी हैं। गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार तबादले के बाद की ही नहीं पदस्थापना तत्कालीन सीएमओ अतुल कुमार रावत का प्रभार 26 मई को हटा दिया गया था। वहीं इंजीनियर धर्मेंद्र पटेल का तबादला होने के बाद वे 14 मई को कार्यमुक्त हो गए थे। तब से दोनों पद खाली हैं और अब तक नए अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। हालांकि, 8 जून को गोरमी नगर परिषद के सीएमओ प्रदीप ताम्रकार को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था, लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार नहीं संभाला है। ऐसे में नगर परिषद का काम लम्बे समय से अटका हुआ है। व्हाट्सएप का ऐतिहासिक प्राइवेसी अपडेट: बिना मोबाइल नंबर साझा किए चैट करने के लिए कंपनी जल्द लाएगी ‘यूजरनेम’ फीचर करोड़ों के विकास कार्य अधर में अधिकारियों की कमी का सबसे बड़ा असर विकास कार्यों पर पड़ा है। करीब 3 करोड़ रुपये के विकास कार्यों के टेंडर तो जारी हो चुके हैं, लेकिन वर्क ऑर्डर नहीं होने से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा नगर के 15 वार्डों में 75 लाख रुपये के प्रस्तावित विकास कार्यों के टेंडर भी अब तक जारी नहीं हो सके हैं। नए प्रस्ताव तैयार करने का काम भी रुका हुआ है। 66 कर्मचारियों को अब तक नहीं मिला वेतन सीएमओ के न होने से वित्तीय फाइलों को भी मंजूरी नहीं मिली, जिसके चलते परिषद के करीब 66 करमसहरियों को मई महीने का वेतन अब तक नहीं मिला है। समस्या इतनी बढ़ गयी है कि उन लोगों पर आर्थिक संकट आ गया है। नगर की रोजमर्रा की व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो रही हैं। जल प्रदाय, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सेवाओं पर असर दिखाई देने लगा है। IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू विभाग बोला- जल्द होगी नियुक्ति नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक अमरसत्य गुप्ता ने बताया कि आलमपुर नगर परिषद में नए सीएमओ और इंजीनियर की नियुक्ति के लिए भोपाल प्रस्ताव भेज दिया गया है। विभाग का कहना है कि जल्द ही दोनों पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति कर दी जाएगी।

गिरफ्तारी दस्तावेजों में गंभीर त्रुटि का मामला, हाईकोर्ट ने सोनम रघुवंशी को मिली जमानत रद्द करने से किया इनकार

शिलांग: मेघालय हाईकोर्ट ने हनीमून के दौरान अपने पति की कथित हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर प्रक्रियागत कमियां थीं, जिनके आधार पर जमानत रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि गिरफ्तारी के आधार तैयार करने की प्रक्रिया में आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई। अदालत के अनुसार, दस्तावेजों में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि आरोपी के खिलाफ वास्तविक आरोप क्या हैं और किन तथ्यों के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कमी माना। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि गिरफ्तारी मेमो, औचित्य चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो और केस डायरी के कुछ हिस्सों सहित कई दस्तावेजों में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था। अदालत ने कहा कि एक ही प्रकार की त्रुटि सभी दस्तावेजों में दोहराई गई है, इसलिए इसे केवल टाइपिंग या लिपिकीय गलती नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी दस्तावेज में स्पष्ट रूप से यह दर्ज नहीं था कि आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया जा रहा है। साथ ही गिरफ्तारी के समय कथित अपराध से जुड़े विशिष्ट तथ्यों की जानकारी भी आरोपी को उचित तरीके से नहीं दी गई। न्यायालय ने माना कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया कानून के निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दलील दी कि दस्तावेजों में हुई गलती केवल टाइपिंग संबंधी त्रुटि थी, जिससे आरोपी को किसी प्रकार का वास्तविक नुकसान नहीं हुआ। सरकार का कहना था कि रिमांड आदेश, चार्जशीट और बाद की न्यायिक कार्यवाही में हत्या के आरोप का स्पष्ट उल्लेख मौजूद है, इसलिए केवल इस तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना उचित नहीं माना जाना चाहिए। सरकार ने अपने पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रियागत कमियां, जिनसे आरोपी के अधिकारों पर वास्तविक असर न पड़े, बाद में सुधारी जा सकती हैं। हालांकि हाईकोर्ट ने इन दलीलों से सहमति नहीं जताई और कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी मानकों का पालन किया जाना अनिवार्य है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की जमानत रद्द करने संबंधी याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही सोनम रघुवंशी को निचली अदालत से मिली जमानत फिलहाल बरकरार रहेगी और वह आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक जमानत पर बाहर रहेगी।

कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है। धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े। गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया। गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। 

व्हाट्सएप का ऐतिहासिक प्राइवेसी अपडेट: बिना मोबाइल नंबर साझा किए चैट करने के लिए कंपनी जल्द लाएगी 'यूजरनेम' फीचर

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने की घोषणा की है। मेटा के मालिकाना हक वाली कंपनी जल्द ही अपने प्लेटफॉर्म पर ‘यूजरनेम’ फीचर पेश करने जा रही है। इस नए और आधुनिक सुरक्षा फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसके लागू होने के बाद यूजर्स अपना पर्सनल मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी दूसरे लोगों से आसानी से जुड़ सकेंगे और चैट कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर यह फीचर साल के अंत तक सभी के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा, लेकिन इसकी रिजर्वेशन प्रक्रिया इसी सप्ताह से शुरू की जा रही है। कंपनी ने इस कदम को डिजिटल गोपनीयता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। अक्सर स्कूल-कॉलेज के नए सहपाठियों, पड़ोसियों या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मिले अपरिचित लोगों के साथ अपना निजी मोबाइल नंबर साझा करना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं माना जाता, क्योंकि फोन नंबर सीधा बैंक खातों और अन्य व्यक्तिगत पहचानों से जुड़ा होता है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही इस फीचर को तैयार किया गया है ताकि लोग बिना झिझक के केवल बातचीत करने के उद्देश्य से एक-दूसरे से जुड़ सकें। यह नया प्राइवेसी फीचर बड़े ग्रुप चैट्स और सार्वजनिक कम्युनिटी ग्रुप्स में भी सुरक्षा का एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार करेगा। उदाहरण के लिए, किसी खेल टीम, आवासीय समिति या किसी अन्य सार्वजनिक ग्रुप में शामिल होते समय अब यूजर्स को अपनी पहचान उजागर होने का डर नहीं रहेगा। वे ग्रुप के अन्य अनजान सदस्यों को अपना नंबर दिखाए बिना केवल यूजरनेम के जरिए उस ग्रुप का हिस्सा बने रह सकते हैं। व्हाट्सएप के वैश्विक प्रमुख ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया के तहत अपना यूजरनेम पहले ही रिजर्व कर लिया है और अब इसे आम जनता के लिए पेश किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर व्हाट्सएप के तीन अरब से भी अधिक उपयोगकर्ता हैं, जिसे देखते हुए एक जैसे नाम होने की संभावना काफी अधिक है। इसी समस्या के समाधान के लिए कंपनी ने नाम रिजर्व करने की प्रक्रिया को जल्दी शुरू किया है ताकि लोगों को उनकी पसंद का यूनिक नाम मिल सके। उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए ऐप के भीतर एक ‘यूजरनेम जनरेटर’ टूल भी दिया जाएगा, जो उपलब्ध नामों के विभिन्न विकल्प सुझाएगा। सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए कंपनी ने साफ किया है कि व्हाट्सएप पर यूजरनेम की कोई सार्वजनिक डायरेक्टरी या खोजने योग्य सूची नहीं होगी, यानी किसी को आपसे संपर्क करने के लिए आपके सटीक यूजरनेम की जानकारी होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही छोटे व्यवसायों, डिजिटल क्रिएटर्स और व्यावसायिक संगठनों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिसके तहत वे अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम के मौजूदा यूजरनेम को व्हाट्सएप के लिए भी क्लेम कर सकेंगे। अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर यूजर्स एक ‘यूजरनेम की’ (Username Key) भी सेट कर सकते हैं, जिसके बिना कोई भी अज्ञात व्यक्ति पहला संदेश नहीं भेज पाएगा। इस फीचर का लाभ उठाने के लिए यूजर्स को ऐप के नवीनतम संस्करण में सेटिंग्स के भीतर अकाउंट सेक्शन में जाकर अपना नाम सुरक्षित करना होगा। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से सभी देशों के यूजर्स को ऐप के भीतर इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन मिल जाएगा।