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'मुख्यमंत्री का बेटा होने' का टैग तोड़ने में लगे 23 साल, रितेश देशमुख ने साझा किया संघर्ष और सफलता का सफर

नई दिल्ली । अभिनेता रितेश देशमुख ने अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दौर से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें लंबे समय तक इस धारणा का सामना करना पड़ा कि उन्हें फिल्मों में अवसर केवल इसलिए मिलते हैं क्योंकि उनके पिता महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके थे। उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलने और अपनी अलग पहचान बनाने में उन्हें कई वर्षों की लगातार मेहनत करनी पड़ी। रियलिटी शो के दौरान एक प्रतियोगी की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए रितेश ने बताया कि किसी भी व्यक्ति पर लगने वाला टैग केवल उसके आत्मविश्वास को ही नहीं, बल्कि उसके पेशेवर सफर को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा था, तब अक्सर यह कहा जाता था कि उनकी सफलता का कारण उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि है, न कि उनकी मेहनत या प्रतिभा। रितेश ने कहा कि उन्होंने इन धारणाओं का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि अपने काम से दिया। वर्षों तक लगातार अलग-अलग तरह की फिल्मों में अभिनय करने और विविध भूमिकाएं निभाने के बाद लोगों की सोच बदली। उन्होंने बताया कि आज दो दशक से अधिक लंबे करियर और दर्जनों फिल्मों के बाद उन्हें संतोष है कि उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान स्थापित की है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कलाकार के लिए दर्शकों का विश्वास सबसे बड़ी उपलब्धि होता है। शुरुआत में लोगों की राय बदलना आसान नहीं होता, लेकिन लगातार अच्छा प्रदर्शन और ईमानदारी से किया गया काम अंततः अपनी जगह बना ही लेता है। उनका मानना है कि समय और मेहनत ऐसे हर पूर्वाग्रह को समाप्त कर सकते हैं। रितेश ने शो के प्रतियोगी को भी यही संदेश दिया कि किसी भी नकारात्मक पहचान या आरोप से घबराने के बजाय धैर्य और निरंतर प्रयास पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार कुछ टैग जल्दी नहीं टूटते, लेकिन यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य पर कायम रहे तो एक दिन उसकी मेहनत ही उसकी असली पहचान बन जाती है। फिल्मी करियर की बात करें तो रितेश देशमुख ने रोमांटिक, कॉमेडी, ड्रामा और नकारात्मक किरदारों सहित कई अलग-अलग भूमिकाओं में अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया है। हिंदी सिनेमा के साथ-साथ उन्होंने मराठी फिल्मों में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अभिनेता के अलावा उन्होंने निर्देशन और निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई है। इन वर्षों में रितेश ने कई लोकप्रिय फिल्मों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया है और अपनी सहज अभिनय शैली के कारण अलग पहचान बनाई है। उनकी हालिया परियोजनाओं को भी दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर उद्योग में मजबूत स्थान बनाया है। रियलिटी शो में साझा किए गए उनके अनुभव को संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास का उदाहरण माना जा रहा है। रितेश का कहना है कि सफलता का वास्तविक मूल्य तब और बढ़ जाता है, जब वह किसी पूर्वाग्रह या धारणा को पीछे छोड़कर केवल अपनी मेहनत और प्रदर्शन के दम पर हासिल की जाए।

राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। ब्यावरा के जगनियापुरा गांव स्थित पानी से भरी क्रेशर खदान में डूबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में पांच वर्षीय मासूम निखरा पारदी उसकी ग्यारह वर्षीय बहन नम्रता पारदी और दोनों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी पैंतीस वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे। बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए। घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई। यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।

सीहोर में भीषण सड़क हादसा बोलेरो और ट्रक की आमने सामने टक्कर में पांच की मौत चार जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में सोमवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने पांच परिवारों की खुशियां छीन लीं। आष्टा और शुजालपुर मार्ग पर मेना गोदी गांव के पास तेज रफ्तार ट्रक और बोलेरो की आमने सामने हुई जोरदार टक्कर में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि बोलेरो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार कई लोग वाहन के अंदर ही फंस गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा तफरी मच गई और आसपास के ग्रामीण तुरंत राहत कार्य में जुट गए। जानकारी के अनुसार दुर्घटना सोमवार दोपहर करीब पौने तीन बजे हुई। बोलेरो में कुल नौ लोग सवार थे जो राजगढ़ जिले के कालीपीठ थाना क्षेत्र के भियापुरा गांव से इलाज के लिए आष्टा जा रहे थे। रास्ते में मेना गोदी गांव के पास सामने से आ रहे ट्रक से उनकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर का प्रभाव इतना जबरदस्त था कि बोलेरो के परखच्चे उड़ गए और तीन लोग वाहन से कई फीट दूर जाकर सड़क किनारे गिर पड़े। चालक वाहन में बुरी तरह फंस गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कई घायल दर्द से तड़पते रहे। स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए पुलिस को सूचना दी और खुद भी राहत कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों ने मिलकर क्षतिग्रस्त बोलेरो में फंसे लोगों को बाहर निकाला। कई घायलों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें थीं जबकि कुछ के हाथ पैर भी टूट गए थे। एंबुलेंस की मदद से सभी घायलों को पहले आष्टा के सिविल अस्पताल पहुंचाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए सीहोर जिला अस्पताल और फिर भोपाल रेफर किया गया। आष्टा पुलिस के अनुसार हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की बड़ी वजह माना जा रहा है हालांकि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेगा। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मृतकों और घायलों की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक कुछ घायलों की पहचान इंदर सिंह और राजाराम के रूप में हुई है जबकि अन्य की पहचान और परिजनों को सूचना देने का काम जारी है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यातायात नियमों का पालन सुरक्षित गति से वाहन चलाना और लंबी यात्रा के दौरान पूरी सतर्कता बरतना ऐसे हादसों को काफी हद तक रोक सकता है। प्रशासन ने भी लोगों से सड़क पर सावधानी बरतने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।

वैश्विक संकेतों और मजबूत खरीदारी से बाजार में लौटी रफ्तार, सेंसेक्स-निफ्टी मजबूती के साथ बंद, ऑटो और रियल्टी शेयरों ने दिखाई ताकत

नई दिल्ली । सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगातार चौथे सत्र में मजबूती का सिलसिला कायम रखते हुए बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। सकारात्मक वैश्विक संकेतों, प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी और निवेशकों के बेहतर भरोसे के चलते बाजार में पूरे दिन उत्साह का माहौल बना रहा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे बाजार की सकारात्मक धारणा और मजबूत हुई। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंकों की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 159.50 अंक चढ़कर 24,430.35 अंक के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार से ही दोनों सूचकांकों में तेजी का रुख दिखाई दिया और दिनभर खरीदारी का दबदबा बना रहा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 78,398.06 अंक और निफ्टी 24,458.65 अंक के उच्चतम स्तर तक पहुंचने में सफल रहे। व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की रुचि बनी रही। बाजार की व्यापक मजबूती को निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में देखा। सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो तथा ऑयल एंड गैस कंपनियों के शेयरों में सबसे अधिक खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और वित्तीय सेवाओं से जुड़े शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए। हालांकि आईटी, मीडिया और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में कुछ मुनाफावसूली देखने को मिली, जिसके कारण इन क्षेत्रों के सूचकांक दबाव में रहे। प्रमुख कंपनियों में एचडीएफसी बैंक, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, ओएनजीसी, बजाज ऑटो और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर कोटक महिंद्रा बैंक, टीसीएस, कोल इंडिया, बजाज फिनसर्व और मैक्स हेल्थकेयर के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही। बाजार में आई इस तेजी का सीधा लाभ निवेशकों को भी मिला। कारोबार समाप्त होने तक सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर लगभग 482.33 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक ही कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब दो लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ। विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव में नरमी, कच्चे तेल की अपेक्षाकृत स्थिर कीमतें, पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों से पहले सकारात्मक माहौल तथा घरेलू स्तर पर मजबूत खरीदारी ने बाजार को मजबूती प्रदान की है। इन कारकों ने निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया और बाजार में लगातार चौथे दिन तेजी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के ऊपर टिके हुए हैं, जिससे निकट अवधि में सकारात्मक रुझान बने रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निफ्टी आने वाले सत्रों में प्रमुख प्रतिरोध स्तरों को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में तेजी का अगला चरण देखने को मिल सकता है। वहीं, किसी भी सीमित गिरावट की स्थिति में निचले स्तरों पर खरीदारी का समर्थन मिलने की संभावना बनी हुई है, जिससे बाजार की मजबूती आगे भी बरकरार रह सकती है।

'भारत टैक्सी' मॉडल पर आएगी सहकारी जीवन बीमा कंपनी, अमित शाह बोले- 30 करोड़ सदस्यों को मिलेगा सशक्त मंच

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने सहकारिता क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि देश में जल्द ही एक सहकारी जीवन बीमा कंपनी की स्थापना की जाएगी। यह कंपनी ‘भारत टैक्सी’ मॉडल की तर्ज पर संचालित होगी और इसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं की बीमा क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ करोड़ों सदस्यों को व्यापक लाभ उपलब्ध कराना होगा। सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि सहकारी जीवन बीमा कंपनी देश के सहकारी आंदोलन को नई मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि ‘भारत टैक्सी’ मॉडल को अच्छा प्रतिसाद मिला है और अगले दो वर्षों में इसका विस्तार 500 शहरों तक करने की योजना है। इसी अनुभव के आधार पर अब बीमा क्षेत्र में भी सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान समय में करीब 8.5 लाख सहकारी संस्थाएं कार्यरत हैं, जिनसे 30 करोड़ से अधिक सदस्य जुड़े हुए हैं। नई सहकारी जीवन बीमा कंपनी इन संस्थाओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने और बीमा सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख सहकारी संस्था इफको पहले से ही एक जापानी कंपनी के साथ संयुक्त उपक्रम के माध्यम से बीमा कारोबार से जुड़ी हुई है। अमित शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारिता मंत्रालय ने पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान दिया है। मंत्रालय ने देशभर की सहकारी संस्थाओं का व्यापक डेटाबेस तैयार किया है, जिससे भविष्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और सहकारी तंत्र के विस्तार में मदद मिलेगी। उन्होंने जानकारी दी कि गुजरात के आणंद में त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। यह संस्थान सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करेगा और क्षमता निर्माण के माध्यम से संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में योगदान देगा। उनके अनुसार सहकारी क्षेत्र अब केवल डेयरी, चीनी और उर्वरक उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि अनेक नए क्षेत्रों में भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां तैयार करना है जो पूरे देश में सहकारी संस्थाओं के विकास को गति दें। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य सरकार ने मंत्रालय पर अपने अधिकार क्षेत्र में दखल देने का आरोप नहीं लगाया है। समारोह में केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने भी सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार की पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित है और इसे संगठित करने के लिए सहकारी व्यवस्था का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी सहकारिता क्षेत्र में सुधारों को लेकर सरकार के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया गया। इनमें 75 हजार टन क्षमता वाले 135 गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का उद्घाटन तथा 47 नए अनाज भंडारण गोदामों का वर्चुअल शिलान्यास शामिल रहा। इसके अलावा ‘सहकार वन’ परियोजना का भूमिपूजन तथा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड की टिश्यू कल्चर सुविधाओं की आधारशिला भी रखी गई। इस अवसर पर 50 हजार प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को ई-पैक्स प्रणाली से जोड़ने की पहल को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। साथ ही भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के बीच बीज प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम के अंत में डेयरी सहकारी समितियों के लिए मॉडल उपविधियों तथा सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।

कर्नाटक में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठा विवाद, NDA ने चुनाव आयोग से की शिकायत; सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताओं का लगाया आरोप

नई दिल्ली । कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत की है। प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे मतदाता सूची की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बूथ स्तर के अधिकारियों को प्रत्येक घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करना चाहिए, लेकिन कई स्थानों पर इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। आरोप लगाया गया कि घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करने के बजाय सामुदायिक भवनों, अन्य सार्वजनिक स्थानों तथा कुछ निजी परिसरों में लोगों को बुलाकर सामूहिक रूप से फॉर्म भरवाए जा रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि इससे वास्तविक सत्यापन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। NDA नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में लोगों को व्हाट्सएप समूहों और अन्य माध्यमों से विशेष शिविरों में बुलाया गया, जहां एक साथ बड़ी संख्या में आवेदन पत्र भरे गए। उनका दावा है कि इस तरह की प्रक्रिया चुनाव आयोग के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं है और इससे मतदाता सूची में त्रुटियों या अनियमितताओं की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में नेताओं ने मांग की है कि अब तक भरे गए सभी गणना प्रपत्रों का दोबारा घर-घर जाकर सत्यापन कराया जाए। साथ ही यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आधारशिला है और इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। प्रतिनिधिमंडल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्हें राज्य के विभिन्न हिस्सों से ऐसी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उनका दावा है कि इन कथित अनियमितताओं से जुड़े कुछ वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर भी साझा की गई है। नेताओं ने आग्रह किया कि इन शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे। शिकायत के दौरान NDA नेताओं ने राज्य सरकार पर भी आरोप लगाए और कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया तो इसका असर चुनावी व्यवस्था की पारदर्शिता पर पड़ सकता है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं का सही पंजीकरण सुनिश्चित करना और सूची को अद्यतन रखना होता है। ऐसे में इस प्रक्रिया को लेकर उठे आरोपों ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। अब नजर चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर रहेगी कि शिकायतों की जांच किस प्रकार की जाती है और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो उसके समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

चंद्रमा की शुभ-अशुभ स्थिति बदल सकती है जीवन की दिशा, जानें किन योगों से मिलता है सुख और किन दोषों से बढ़ती हैं मुश्किलें

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक संतुलन और सुख-समृद्धि का प्रमुख कारक माना गया है। किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति उसके स्वभाव, निर्णय क्षमता, पारिवारिक संबंधों और मानसिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि चंद्रमा शुभ और मजबूत स्थिति में हो तो जीवन में स्थिरता, सम्मान और खुशहाली बढ़ती है, जबकि कमजोर या पीड़ित चंद्रमा मानसिक तनाव, अस्थिरता और अनेक चुनौतियों का कारण बन सकता है। ज्योतिष के अनुसार वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च का तथा कर्क राशि में स्वराशि का माना जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का मन संतुलित रहता है और वह कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने में सक्षम होता है। मजबूत चंद्रमा रचनात्मक सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करने वाला माना जाता है। ऐसे लोगों को पारिवारिक सुख, सामाजिक सम्मान और आर्थिक उन्नति के अवसर भी अधिक प्राप्त होते हैं। मान्यता है कि यदि चंद्रमा पर बृहस्पति, शुक्र या बुध जैसे शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो कई शुभ योगों का निर्माण होता है। ऐसे योग व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाते हैं और जीवन में सफलता के अवसर बढ़ाते हैं। मजबूत चंद्रमा वाले लोगों का अपनी माता के साथ संबंध भी सामान्यतः मधुर और सहयोगपूर्ण माना जाता है। इसके विपरीत यदि चंद्रमा कमजोर, नीच राशि में स्थित या पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो इसका असर व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक जीवन पर पड़ सकता है। वृश्चिक राशि में स्थित चंद्रमा को ज्योतिष में नीच का माना गया है। इसके अलावा राहु, केतु अथवा शनि के प्रभाव से बनने वाले कुछ दोष मानसिक अस्थिरता, चिंता और निर्णय लेने में कठिनाई का कारण माने जाते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ऐसे लोगों में अनावश्यक भय, आत्मविश्वास की कमी, अनिद्रा, तनाव और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। कई बार व्यक्ति छोटी-छोटी बातों को लेकर अत्यधिक चिंतित रहता है और भावनात्मक रूप से स्वयं को कमजोर महसूस करता है। हालांकि इन प्रभावों को आध्यात्मिक और धार्मिक उपायों के माध्यम से कम करने की मान्यता भी प्रचलित है। चंद्रमा को मजबूत करने के लिए भगवान शिव की नियमित आराधना को विशेष महत्व दिया गया है। शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करना मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही माता का सम्मान करना, उनका आशीर्वाद लेना तथा परिवार के प्रति जिम्मेदार व्यवहार रखना भी शुभ फलदायी माना जाता है। सोमवार के दिन व्रत रखना, सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी या सफेद वस्त्रों का दान करना भी चंद्र दोष की शांति के लिए उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा जल का सम्मान करना और अनावश्यक रूप से पानी की बर्बादी से बचना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नियमित सकारात्मक सोच, संयमित जीवनशैली और आध्यात्मिक अभ्यास से भी मानसिक संतुलन मजबूत किया जा सकता है। ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जन्म कुंडली का समग्र विश्लेषण आवश्यक होता है। केवल चंद्रमा की स्थिति के आधार पर जीवन के सभी परिणाम निर्धारित नहीं किए जा सकते। इसलिए यदि किसी व्यक्ति को अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति या उससे जुड़े प्रभावों को लेकर संदेह हो तो अनुभवी ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना बेहतर माना जाता है।

देवास में आशा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन मांगें पूरी नहीं हुईं तो विधानसभा घेराव की चेतावनी

देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में सोमवार को आशा कार्यकर्ताओं और आशा पर्यवेक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं दो हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने समय पर वेतन भुगतान, लंबित प्रोत्साहन राशि और एरियर जारी करने की मांग उठाई। तेज धूप के बावजूद बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय परिसर में डटी रहीं। कई महिलाएं धूप से बचने के लिए छाते लेकर धरने पर बैठीं जबकि कुछ अपने छोटे बच्चों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुईं। कार्यकर्ताओं का कहना था कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उन्हें समय पर भुगतान और निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई महीनों तक प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जाता और भुगतान में मनमानी कटौती भी की जाती है। उनका कहना है कि बकाया राशि का स्पष्ट विवरण भी उपलब्ध नहीं कराया जाता जिससे उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आशा कार्यकर्ताओं ने वर्ष 2023 में घोषित एक हजार रुपये की वार्षिक वेतन वृद्धि का एरियर तत्काल जारी करने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि सरकार द्वारा घोषणा किए जाने के बावजूद अब तक एरियर का भुगतान नहीं हुआ है। साथ ही छह हजार रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि में परिवार का भरण पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंची जहां करीब आधे घंटे तक धरना प्रदर्शन चला। इस दौरान भारत माता की जय और हमारा हक हमें दो जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के माध्यम से सरकार को अपनी मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगला चरण विधानसभा घेराव का होगा और तब तक आंदोलन जारी रहेगा जब तक लंबित भुगतान और अन्य मांगों का समाधान नहीं किया जाता।

बारिश में घूमने का बना रहे हैं प्लान तो पहुंचिए उदयपुर जानिए 7 दिन की यात्रा और खर्च

नई दिल्ली । बारिश का मौसम शुरू होते ही राजस्थान का उदयपुर अपनी अलग ही खूबसूरती में नजर आता है। झीलों से घिरा यह ऐतिहासिक शहर मानसून के दौरान हरियाली से ढक जाता है और अरावली की पहाड़ियां बादलों की चादर ओढ़ लेती हैं। पानी से लबालब भरी झीलें और शाही महलों का नजारा इस शहर को देश के सबसे खूबसूरत मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल कर देता है। यदि आप एक सप्ताह की यादगार यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उदयपुर बेहतरीन विकल्प हो सकता है। यात्रा के पहले दिन सिटी पैलेस और लेक पिछोला की सैर करें। शाम को बोट राइड का आनंद लें और झील किनारे स्थानीय भोजन का स्वाद लें। दूसरे दिन फतेह सागर झील, सहेलियों की बाड़ी और स्थानीय बाजारों की सैर करें। मानसून के दौरान यहां का वातावरण बेहद सुहावना रहता है। तीसरे दिन सज्जनगढ़ पैलेस जाएं जिसे मानसून पैलेस भी कहा जाता है। यहां से पूरे शहर और झीलों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। बारिश के मौसम में यह स्थान फोटोग्राफी के लिए सबसे पसंदीदा माना जाता है। चौथे दिन एकलिंगजी मंदिर और नाथद्वारा मंदिर का धार्मिक भ्रमण किया जा सकता है। दोनों स्थल उदयपुर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। पांचवें दिन बागोर की हवेली और स्थानीय संग्रहालय देखें। शाम को पारंपरिक राजस्थानी लोकनृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम यात्रा को और यादगार बना देंगे। छठे दिन आसपास की अरावली पहाड़ियों और प्राकृतिक स्थलों की सैर करें। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और शांत वातावरण प्रकृति प्रेमियों को खूब आकर्षित करता है। सातवें दिन स्थानीय हस्तशिल्प बाजारों से राजस्थानी कला वस्तुएं कपड़े और स्मृति चिह्न खरीदकर अपनी यात्रा का समापन करें। अनुमानित खर्चआने जाने का यात्रा खर्च लगभग 4000 से 10000 रुपये (शहर और परिवहन के अनुसार)होटल का खर्च प्रति रात लगभग 2000 से 5000 रुपयेभोजन पर प्रतिदिन लगभग 800 से 1500 रुपयेस्थानीय घूमने और प्रवेश शुल्क लगभग 3000 से 5000 रुपयेकुल सात दिन का औसत बजट प्रति व्यक्ति लगभग 25000 से 45000 रुपये हो सकता है। मानसून के दौरान यात्रा करते समय छाता या रेनकोट साथ रखें। फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतें और मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही यात्रा की योजना बनाएं। बारिश के मौसम में उदयपुर की झीलें, महल और हरियाली मिलकर ऐसा अनुभव देती हैं जो लंबे समय तक याद रहता है।

मानसून में बढ़ जाता है इन 7 बीमारियों का खतरा जानिए बचाव के आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत तो देता है लेकिन अपने साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लेकर आता है। इस दौरान जगह जगह पानी जमा होने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ता है जबकि दूषित पानी और गंदगी बैक्टीरिया तथा वायरस के फैलाव को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान साफ सफाई और खानपान का विशेष ध्यान रखकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। मानसून में सबसे अधिक फैलने वाली बीमारियों में डेंगू प्रमुख है। यह एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। तेज बुखार सिरदर्द आंखों के पीछे दर्द और शरीर तथा जोड़ों में तेज दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं। इससे बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उत्पादों का उपयोग करें तथा पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें। मलेरिया भी बारिश के मौसम में तेजी से फैलता है। संक्रमित मच्छर के काटने से होने वाली इस बीमारी में ठंड लगकर बुखार आना पसीना आना कमजोरी और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शाम के समय मच्छरों से बचाव और साफ वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है। चिकनगुनिया भी मच्छरों के जरिए फैलने वाला संक्रमण है जिसमें तेज बुखार के साथ जोड़ों में असहनीय दर्द हो सकता है। नियमित सफाई और मच्छरों की रोकथाम इसके बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। बारिश में दूषित भोजन और पानी के कारण टाइफाइड का खतरा भी बढ़ जाता है। लगातार बुखार पेट दर्द कमजोरी और पाचन संबंधी समस्याएं इसके प्रमुख संकेत हैं। हमेशा स्वच्छ पानी पिएं और खुले में मिलने वाले खाद्य पदार्थों से बचें। हेपेटाइटिस ए भी गंदे पानी और दूषित भोजन से फैलने वाला संक्रमण है। इसमें आंखों और त्वचा का पीला पड़ना भूख कम लगना थकान और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। भोजन और पानी की स्वच्छता इसका सबसे प्रभावी बचाव है। गैस्ट्रोएंटेराइटिस यानी पेट का संक्रमण भी मानसून में आम हो जाता है। दूषित भोजन या पानी के कारण दस्त उल्टी पेट दर्द और शरीर में पानी की कमी की समस्या हो सकती है। ताजा और अच्छी तरह पका हुआ भोजन खाना तथा पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीना जरूरी है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण सर्दी जुकाम और फ्लू के मामले भी तेजी से बढ़ते हैं। नाक बहना गले में खराश खांसी और हल्का बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। नियमित हाथ धोना पर्याप्त नींद लेना संतुलित आहार और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखना संक्रमण से बचने में मदद करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इन बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर और आसपास पानी जमा न होने दें केवल साफ और उबला हुआ पानी पिएं ताजा भोजन करें और बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। समय पर सतर्कता ही स्वस्थ मानसून की सबसे बड़ी कुंजी है।