शाहरुख खान की फिल्म 'किंग' के 450 करोड़ के भारी-भरकम बजट पर निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान की आने वाली फिल्म ‘किंग’ को लेकर इन दिनों सिनेमा जगत और सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा बनी हुई है। इस फिल्म को शाहरुख खान के पूरे फिल्मी करियर की अब तक की सबसे महंगी और भव्य फिल्म बताया जा रहा था। मीडिया और सिनेमाई गलियारों में लगातार यह दावा किया जा रहा था कि इस मेगा-प्रोजेक्ट का कुल बजट लगभग 450 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इन तमाम कयासों और बड़ी खबरों के बीच अब फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने खुद सामने आकर सच्चाई बयां की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज करते हुए एक बड़ा बयान दिया है, जिसने फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। फिल्म ‘किंग’ की रिलीज का प्रशंसक काफी समय से बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इस फिल्म के जरिए शाहरुख खान लगभग तीन साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर मुख्य भूमिका में बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी करने जा रहे हैं। इसी भारी उत्सुकता के बीच एक हालिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया था कि यह फिल्म बजट के मामले में भारतीय सिनेमा के पिछले कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ देगी और इसका निर्माण 450 करोड़ रुपये की अभूतपूर्व लागत से किया जा रहा है। बजट की यह खबर जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुई, वैसे ही फिल्म को लेकर तरह-तरह की वित्तीय चर्चाएं शुरू हो गईं। मध्य प्रदेश। इन तमाम उड़ती खबरों और दावों के बीच बुधवार रात को फिल्म के निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली ट्वीट किया। उन्होंने बजट से जुड़ी खबरों की ओर इशारा करते हुए अपने ट्वीट में सिर्फ एक शब्द लिखा— ‘गलत’। इसके अलावा सिद्धार्थ ने अपने पोस्ट में कोई अन्य स्पष्टीकरण या विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। हालांकि, उनका यह एक शब्द का साफ जवाब इंटरनेट यूज़र्स और समीक्षकों के लिए यह समझने के लिए काफी था कि शाहरुख खान की फिल्म ‘किंग’ का वास्तविक बजट 450 करोड़ रुपये नहीं है और मीडिया में चल रहे आंकड़े महज कोरी अफवाह हैं। अगर शाहरुख खान की अब तक की सबसे महंगी फिल्मों के इतिहास पर नजर डालें, तो उनके करियर में साल 2023 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘जवान’ इस सूची में सबसे ऊपर काबिज है। इस एक्शन-थ्रिलर फिल्म का कुल निर्माण बजट लगभग 400 करोड़ रुपये आंका गया था। वहीं, उनके करियर की दूसरी सबसे बड़ी और महंगी फिल्म ‘पठान’ मानी जाती है, जिसका कुल बजट 350 करोड़ रुपये के आसपास दर्ज किया गया था। यही वजह थी कि कयास लगाए जा रहे थे कि आगामी फिल्म ‘किंग’ इन दोनों ही फिल्मों के बजट रिकॉर्ड को आसानी से पार कर जाएगी, लेकिन निर्देशक के ट्वीट ने इन अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। फिल्म के जॉनर और मेकिंग की बात करें तो ‘किंग’ एक हाई-ऑक्टेन एक्शन और स्टंट-बेस्ड फिल्म होने वाली है, जिसमें शाहरुख खान एक बार फिर अपने खतरनाक एक्शन अवतार में दिखाई देंगे। फिल्म की भव्यता को बढ़ाने के लिए इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टंट्स और कई शानदार विजुअल इफेक्ट्स (वीएफएक्स) सीक्वेंसेज का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिस पर मेकर्स पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं। यही कारण है कि फिल्म के बजट को लेकर इतनी बड़ी-बड़ी रिपोर्ट्स सामने आ रही थीं। बजट के अलावा यह फिल्म अपनी बेहतरीन और कद्दावर स्टार कास्ट को लेकर भी लगातार सुर्खियों बटोर रही है। इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि इसमें शाहरुख खान पहली बार अपनी बेटी सुहाना खान के साथ स्क्रीन स्पेस शेयर करते हुए नजर आने वाले हैं। इसके अलावा फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट में बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री रानी मुखर्जी, दीपिका पादुकोण, जयदीप अहलावत, अभिषेक बच्चन और अनिल कपूर जैसे प्रतिभावान और बड़े सितारे भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे, जो इस प्रोजेक्ट को इस साल की सबसे बड़ी मल्टीस्टारर फिल्म बनाते हैं। फिल्म की रिलीज टाइमलाइन को लेकर जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उसके मुताबिक शाहरुख खान की यह बहुप्रतीक्षित फिल्म इस साल के अंत में बड़े पर्दे पर दस्तक दे सकती है। मेकर्स इसे दिसंबर के महीने में क्रिसमस के खास और बड़े मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज करने की पूरी योजना बना रहे हैं। फिलहाल, निर्देशक सिद्धार्थ आनंद के इस तीखे खंडन के बाद अब फैंस और ट्रेड एक्सपर्ट्स के बीच इस बात की नई बहस छिड़ गई है कि अगर फिल्म का बजट 450 करोड़ रुपये नहीं है, तो आखिर असल लागत कितनी है।
पुरानी गाड़ियों के लिए खतरे की घंटी क्या E20 पेट्रोल से घटेगा माइलेज और खराब होंगे पार्ट्स नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली । देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही करोड़ों वाहन मालिकों के मन में इसके प्रभाव को लेकर सवाल भी बढ़ गए हैं। खासकर वे लोग अधिक चिंतित हैं जिनकी कार या बाइक E20 ईंधन के लिए प्रमाणित नहीं है। अब ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक ताजा रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि पुराने और गैर सर्टिफाइड वाहनों में लंबे समय तक E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ रबर और प्लास्टिक के पुर्जों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी वाहनों में एक जैसी समस्या सामने नहीं आई और कई मामलों में वाहन सामान्य रूप से चलते रहे। ARAI ने विभिन्न प्रकार के इंजनों और वाहनों पर लंबे समय तक परीक्षण किए। रिपोर्ट के अनुसार कुछ टर्बोचार्ज्ड फोर व्हीलर इंजनों में लंबे समय तक E20 पेट्रोल के उपयोग के बाद तकनीकी समस्याएं देखने को मिलीं। वहीं कुछ अन्य इंजन बिना किसी बड़ी परेशानी के परीक्षण में सफल रहे। एक वाहन निर्माता के परीक्षण में 400 घंटे तक कोई समस्या सामने नहीं आई जबकि दूसरे परीक्षण में 809 घंटे बाद एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मोमैकेनिकल फेलियर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसी खराबी केवल E20 पेट्रोल की वजह से हुई हो यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसके पीछे अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं। रिपोर्ट में सबसे अधिक चिंता रबर और प्लास्टिक से बने फ्यूल सिस्टम के पुर्जों को लेकर जताई गई है। इंजीनियरों के अनुसार इथेनॉल में नमी को तेजी से सोखने की क्षमता होती है। ऐसे में जिन वाहनों को E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है उनमें समय के साथ फ्यूल होज पाइप गैसकेट सील और ओ रिंग जैसे हिस्सों के खराब होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि धातु से बने पुर्जों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया और वाहन स्टार्ट होने या सामान्य संचालन में भी कोई बड़ी समस्या दर्ज नहीं हुई। रिपोर्ट में माइलेज को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। परीक्षण के दौरान E10 पेट्रोल की तुलना में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर ईंधन की खपत लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ी। इसका मतलब है कि कुछ वाहनों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि यह अंतर वाहन की तकनीक इंजन की स्थिति और ड्राइविंग शैली पर भी निर्भर करता है। दूसरी ओर देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने इस रिपोर्ट के बाद अपने पक्ष को भी स्पष्ट किया है। मारुति सुजुकी टोयोटा हुंडई हीरो मोटोकॉर्प टीवीएस और बजाज जैसी कंपनियों का कहना है कि उनके परीक्षण और लाखों वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड में E20 पेट्रोल से बड़े पैमाने पर किसी गंभीर नुकसान के प्रमाण नहीं मिले हैं। मारुति सुजुकी के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में करोड़ों वाहनों की सर्विस के दौरान तीन वर्ष से अधिक पुराने गैर E20 प्रमाणित वाहनों में भी रबर पार्ट्स के खराब होने या जंग लगने जैसी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई। भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया था। अब भविष्य में E22 और E30 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी काम चल रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन मालिक अपनी गाड़ी के निर्माता द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। यदि वाहन E20 के लिए प्रमाणित नहीं है तो समय समय पर फ्यूल सिस्टम की जांच कराना और अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लेना बेहतर रहेगा। इससे संभावित समस्याओं से बचा जा सकता है और वाहन की कार्यक्षमता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
रोहित शेट्टी के शो 'खतरों के खिलाड़ी 15' की रिलीज डेट टली, अब इस नई तारीख से शुरू होगा डर का सफर

नई दिल्ली । टेलीविजन के सबसे चर्चित और रोमांचक स्टंट बेस्ड रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ का बेसब्री से इंतजार कर रहे दर्शकों को बड़ा झटका लगा है। मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के इस शो की रिलीज डेट को ऐन वक्त पर आगे बढ़ा दिया गया है। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यह रियलिटी शो इसी महीने 25 जुलाई से ऑन-एयर होने वाला था, लेकिन कुछ तकनीकी और प्रशासनिक कारणों के चलते मेकर्स ने इसे पोस्टपोन करने का फैसला लिया है। अब यह शो अगस्त के पहले हफ्ते से दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए टेलीविजन स्क्रीन पर दस्तक देगा। इस अचानक हुए बदलाव की वजह से फैंस को अपने पसंदीदा सितारों को हैरतअंगेज स्टंट करते देखने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा। शो की रिलीज डेट टलने के पीछे मुख्य वजह देश में चल रहा ‘टीआरपी ब्लैकआउट’ बताया जा रहा है। दरअसल, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक जब तक टीवी चैनल्स और शोज को नया लाइसेंस प्राप्त नहीं हो जाता और वे नई टेलीविजन रेटिंग्स पॉलिसी 2026 के सभी नियमों का पूरी तरह पालन नहीं करने लगते, तब तक शोज की टीआरपी रेटिंग्स सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। इस प्रशासनिक गतिरोध और तकनीकी बदलाव के कारण ही चैनल और मेकर्स ने शो की लॉन्चिंग को कुछ दिनों के लिए टालना ही बेहतर समझा। चैनल की ओर से जारी किए गए नए आधिकारिक प्रोमो के साथ अब शो की नई रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है। ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ अब 1 अगस्त से हर शनिवार और रविवार रात 9 बजे प्रसारित किया जाएगा। नए प्रोमो को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए मेकर्स ने कैप्शन में लिखा है कि ‘लगेगी जान की बाजी, क्योंकि शुरू हो रहा है डर का नया दौर।’ इस नए प्रोमो के सामने आने के बाद दर्शकों के बीच शो को लेकर उत्साह और ज्यादा बढ़ गया है। यह शो इस बार कलर्स टीवी के साथ-साथ ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर भी स्ट्रीम किया जाएगा। मध्य प्रदेश। इस बीच शो से जुड़ी एक राहत भरी खबर यह है कि ‘खतरों के खिलाड़ी 15’ की पूरी शूटिंग सफलता के साथ पूरी हो चुकी है। इस बार रोमानिया की खूबसूरत और खतरनाक लोकेशंस पर कंटेस्टेंट्स ने रोहित शेट्टी के कड़े इम्तिहानों का सामना किया है। इस सीजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें कुछ बिल्कुल नए चेहरों के साथ-साथ शो के इतिहास के कुछ बेहद मजबूत पुराने कंटेस्टेंट्स की भी वापसी कराई गई है। नए और पुराने खिलाड़ियों के बीच होने वाली यह सीधी टक्कर इस सीजन को बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण बनाने वाली है। इस साल डर का सामना करने वाले कन्फर्म कंटेस्टेंट्स की बात करें तो शो में गौरव खन्ना, इंटरनेट सेंसेशन ओरी, स्टैंडअप कॉमेडियन हर्ष गुजराल, अविका गौर, विशाल आदित्य सिंह, शगुन शर्मा, पूर्व विनर रुबीना दिलैक, जैस्मिन भसीन, फरहाना भट्ट, रितविक धनजानी, अविनाश मिश्रा और करण वाही जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सभी कंटेस्टेंट्स अपना-अपना सफर पूरा करके भारत वापस लौट चुके हैं। सोशल मीडिया पर इन खिलाड़ियों के अनुभव और स्टंट्स को लेकर अभी से कई तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जाने शुरू हो गए हैं। इंटरनेट पर लीक हुई कुछ शुरुआती रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इस सीजन में अविनाश मिश्रा, फरहाना भट्ट और रितविक धनजानी ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर टॉप 3 में जगह बना ली है, जबकि टीवी के मशहूर अभिनेता करण वाही चौथे नंबर पर रहे हैं। वहीं, कुछ दूसरी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिनाले का मुख्य मुकाबला करण वाही और फरहाना भट्ट के बीच देखने को मिलेगा और यही दोनों इस सीजन के टॉप 2 कंटेस्टेंट्स बनकर उभरे हैं। हालांकि, इन दावों पर अभी तक मेकर्स या चैनल की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पिछले सीजन की याद दिलाते हुए बताते चलें कि ‘खतरों के खिलाड़ी 14’ की ट्रॉफी अभिनेता करणवीर मेहरा ने अपने नाम की थी, जिन्होंने बाद में बिग बॉस के घर में भी अपनी जीत का परचम लहराया था। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नई रेटिंग्स पॉलिसी के दौर में शुरू हो रहा यह नया सीजन दर्शकों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है और इस बार रोहित शेट्टी के खतरनाक स्टंट्स को मात देकर कौन सा खिलाड़ी सीजन 15 का अल्टीमेट विनर बनता है।
रियालिटी शो 'लॉकअप 2' में गौरव खन्ना की धमाकेदार एंट्री, पत्नी आकांक्षा चमोला को सामने देख छलके आंसू

नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के मशहूर और विवादित रियलिटी शो ‘लॉकअप 2’ का आगामी एपिसोड बेहद धमाकेदार और भावनाओं से भरपूर होने वाला है। शो के मेकर्स द्वारा जारी किए गए नए प्रोमो वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में टीवी जगत के मशहूर अभिनेता गौरव खन्ना विजिटर के तौर पर अपनी पत्नी आकांक्षा चमोला से मिलने के लिए जेल के भीतर दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं। पिछले काफी समय से अपनी निजी जिंदगी और आपसी मतभेदों को लेकर चर्चा में चल रहे इस कपल का शो के भीतर आमना-सामना होते ही माहौल पूरी तरह से भावुक हो गया। लंबे समय बाद एक-दूसरे को अपने सामने पाकर दोनों ही कलाकार अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। गौरव खन्ना की इस शो में एंट्री को बेहद फिल्मी और भव्य अंदाज में फिल्माया गया है। प्रोमो में गौरव खन्ना का चेहरा सामने आने से पहले बैकग्राउंड में उनकी ही आवाज में एक बेहद दर्दभरी और दिल छू लेने वाली शायरी गूंजती है। गौरव कहते हैं कि एक समंदर है जो काबू में है, लेकिन एक कतरा है जो मुझसे संभाला नहीं जाता। एक उम्र बितानी है उसके बगैर और एक लम्हा है जो मुझसे गुजारा नहीं जाता। इस बेहद भावुक शायरी के बाद गौरव खन्ना सीधे कैदियों की सेल की तरफ कदम बढ़ाते हैं और अपनी पत्नी आकांक्षा की सेल के पास जाकर रुक जाते हैं। आकांक्षा को देखते ही उनके मुंह से पहला वाक्य निकलता है कि ‘बैंड बजा दिया तूने’, जिसे सुनकर आकांक्षा खुद को संभाल नहीं पाती हैं। दरअसल, गौरव खन्ना के जेल में पहुंचने से ठीक पहले वाले एपिसोड में आकांक्षा चमोला का एक बेहद उग्र और हिंसक रूप दर्शकों को देखने को मिला था। जेल के अंदर सह-प्रतियोगी श्रेया कालरा और आकांक्षा चौधरी के बीच किसी बात को लेकर तगड़ी बहस शुरू हो गई थी। यह आपसी विवाद देखते ही देखते इतना बढ़ गया कि इस हाथापाई के दौरान आकांक्षा के चेहरे पर गंभीर चोट लग गई। चेहरे पर चोट लगते ही आकांक्षा ने पूरी तरह से अपना आपा खो दिया और जेल के नियमों को ताक पर रखकर भारी बवाल काट दिया। उन्होंने गुस्से में आकर श्रेया का पूरा बिस्तर बेड से उठाकर नीचे फेंक दिया और वहां मौजूद माधुरी के बेड को भी पानी डालकर पूरी तरह गीला कर दिया। आकांक्षा का यह हिंसक और आक्रामक रवैया देखकर जेल में मौजूद अन्य सभी कैदी और टीवी दर्शक पूरी तरह हैरान रह गए। इतना ही नहीं, उन्होंने शिल्पा शिंदे और श्रेया पर बेहद तीखे पर्सनल अटैक भी किए। आकांक्षा ने शिल्पा के अतीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर उनके खुद के बच्चे होते तो उन्हें समझ आता कि एक मां पर क्या बीतती है। वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने श्रेया को खुलेआम धमकी देते हुए कहा कि वह उनके सारे राज दुनिया के सामने खोल देंगी और उनके बाहरी संबंधों का पर्दाफाश कर देंगी। जेल में मचे इस अभूतपूर्व उपद्रव के बाद जब शो की होस्ट फराह खान वहां पहुंचीं, तो उन्होंने सभी कैदियों को कड़ी फटकार लगाई और साफ किया कि इस दुर्व्यवहार के लिए उन्हें बख्शा नहीं जाएगा और इसका फैसला जजमेंट डे पर होगा। मध्य प्रदेश। जेल के भीतर मचे इस भारी बवाल के तुरंत बाद गौरव खन्ना की एंट्री ने इस शो के रोमांच को दोगुना कर दिया है। दर्शक इस कड़वे मोड़ पर गौरव के आने से बेहद उत्साहित हैं, क्योंकि इसी शो के दौरान आकांक्षा ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया था कि वह और गौरव खन्ना पिछले एक साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे हैं। आकांक्षा ने शो के सह-प्रतियोगी राम कपूर से बात करते हुए यह भी साफ कर दिया था कि गौरव से तलाक लेने के बाद वह अपनी पूरी जिंदगी अकेले गुजारेंगी और दोबारा कभी शादी नहीं करेंगी। उन्होंने राम कपूर से इंडस्ट्री में दोबारा काम शुरू करने के लिए मार्गदर्शन और मदद भी मांगी थी, जिस पर राम कपूर ने उन्हें पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया था। अब जब गौरव खन्ना खुद इस शो का हिस्सा बनकर आकांक्षा के सामने आ चुके हैं, तो हर कोई यह जानने के लिए बेताब है कि वह अपनी टूटती शादी और तलाक के फैसले पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या इस शो के मंच पर दोनों के बीच की कड़वाहट दूर होगी या फिर दूरियां और ज्यादा बढ़ जाएंगी, यह आने वाले एपिसोड में साफ हो जाएगा। फिलहाल, गौरव को अपनी सेल के सामने खड़ा देखकर आकांक्षा बुरी तरह टूट गईं और रोते हुए अपने आंसू पोंछती नजर आईं। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे और पारिवारिक इमोशन्स के कॉम्बिनेशन ने ‘लॉकअप 2’ की टीआरपी और दर्शकों की उत्सुकता को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' के डीसीपी बिल माफी को लेकर विवादों में आए शाहरुख खान, डायरेक्टर बोले- "अच्छा इंसान सिर्फ इंसान होता है"

नई दिल्ली । बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान इन दिनों एक मराठी फिल्म की मदद करने को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों के निशाने पर आ गए हैं। हाल ही में रिलीज हुई सुपरहिट मराठी फिल्म ‘देऊल बंद 2’ के डिजिटल सिनेमा पैकेज (डीसीपी) के लाखों रुपये के बिल को अपनी कंपनी के माध्यम से माफ करने के बाद शाहरुख खान को ट्रोल किया जा रहा है। कुछ कट्टरपंथी यूज़र्स ने सोशल मीडिया पर यह सवाल उठाने शुरू कर दिए कि एक मुस्लिम अभिनेता ने हिंदू देवता और संस्कृति पर आधारित फिल्म की वित्तीय सहायता क्यों की। इस पूरे विवाद और बढ़ती बहस को देखते हुए अब फिल्म के निर्देशक प्रवीण तारडे खुलकर शाहरुख खान के समर्थन में आ गए हैं और उन्होंने नफरत फैलाने वालों को करारा जवाब दिया है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब शाहरुख खान को इस फिल्म से जुड़े किसी मामले में निशाना बनाया गया हो। इससे पहले जब फिल्म के डायरेक्टर प्रवीण तारडे ने एक इंटरव्यू के दौरान सुपरस्टार की इस दिलदारी और आर्थिक मदद का पहली बार खुलासा किया था, तब भी सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर काफी हंगामा हुआ था कि आखिर शाहरुख को इस फिल्म की सफलता का श्रेय क्यों दिया जा रहा है। अब एक बार फिर जब यह मुद्दा सोशल मीडिया पर गरमाया, तो प्रवीण तारडे ने एक पॉडकास्ट के जरिए ट्रोल्स की क्लास लगाते हुए अभिनेता का बचाव किया और फिल्म उद्योग के भीतर के भाईचारे को सर्वोपरि बताया। प्रवीण तारडे ने एक प्रसिद्ध पॉडकास्ट में बात करते हुए साफ शब्दों में कहा कि इस पूरे मामले में हिंदू और मुस्लिम का मुद्दा कहां से आ जाता है। उन्होंने कहा कि शाहरुख खान भी इसी फिल्म इंडस्ट्री का एक सम्मानित हिस्सा हैं और वह खुद भी इसी बिरादरी से आते हैं। तारडे ने फिल्म के निर्माण के समय आए आर्थिक संकट का जिक्र करते हुए बताया कि जब फिल्म रिलीज के लिए तैयार थी, तब उनकी टीम के पास सिर्फ 12 से 13 लाख रुपये ही बचे थे, जबकि तकनीकी काम का कुल बिल लगभग 43 लाख रुपये के आसपास पहुंच गया था। ऐसी विकट स्थिति में वे मदद की उम्मीद लेकर शाहरुख खान की कंपनी के पास पहुंचे थे। डायरेक्टर ने आगे बताया कि जब यह मामला शाहरुख खान के सामने आया, तो उन्होंने सबसे पहले अपनी तकनीकी टीम से फिल्म की गुणवत्ता और उसकी कहानी के बारे में फीडबैक मांगा। टीम की ओर से फिल्म को बेहद शानदार बताए जाने के बाद शाहरुख ने बिना किसी देरी के अपनी टीम को आदेश दिया कि फिल्म की डीसीपी तुरंत निर्माताओं को सौंप दी जाए ताकि फिल्म की रिलीज में कोई बाधा न आए। शाहरुख ने साफ कहा था कि पैसों का हिसाब-किताब बाद में आराम से देख लिया जाएगा। प्रवीण तारडे ने सवाल किया कि क्या किसी संकटग्रस्त फिल्म निर्माता के लिए ऐसा सोचना और तुरंत मदद करना एक बड़े दिल वाले इंसान की दरियादिली को नहीं दर्शाता है। ट्रोल्स को आड़े हाथों लेते हुए प्रवीण तारडे ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इतने बड़े और साफ दिल से किसी की मदद के लिए आगे आता है, तो क्या सिर्फ उसकी जाति या मजहब देखकर उसकी भलाई और अच्छाई को नजरअंदाज कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय पर मदद करने वाले इंसान का शुक्रिया अदा करना हर किसी का नैतिक कर्तव्य बनता है। जहां तक हिंदुत्व या अपनी विचारधारा का सवाल है, उन्हें समाज में किसी भी व्यक्ति के सामने खुद को सही साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। शाहरुख खान का आभार व्यक्त करने का उनकी व्यक्तिगत विचारधारा से कोई टकराव नहीं है, क्योंकि एक अच्छा इंसान हमेशा अच्छा इंसान ही रहता है। गौरतलब है कि तमाम विवादों और सोशल मीडिया पर चल रही नकारात्मकता के बावजूद फिल्म ‘देऊल बंद 2’ ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया है। धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस मराठी फिल्म ने दुनिया भर के सिनेमाघरों में शानदार प्रदर्शन करते हुए लगभग 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस बिजनेस किया है। इसके साथ ही यह फिल्म मराठी सिनेमा के इतिहास की सबसे सफल और सबसे ज्यादा कमाई करने वाली चुनिंदा फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है, जिसने यह साबित कर दिया है कि कला और अच्छी कहानी को दर्शकों के बीच किसी भी प्रकार के विवाद से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
फीफा विश्व कप के बीच अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ पर एफबीआई का शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से मेसी की टीम की बढ़ी मुश्किलें

नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 के रोमांच के बीच डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना की मुश्किलें मैदान के बाहर काफी बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। मिस्र के खिलाफ हुए मुकाबले में वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) के विवादास्पद फैसलों को लेकर चल रही बहस अभी शांत भी नहीं हुई थी कि अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ (एएफए) एक गंभीर कानूनी संकट में घिर गया है। अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी एफबीआई ने महासंघ की वित्तीय गतिविधियों और संदिग्ध लेन-देन को लेकर एक व्यापक जांच शुरू कर दी है। इस जांच के सामने आने के बाद वैश्विक फुटबॉल जगत में हड़कंप मच गया है और टूर्नामेंट के बीच अर्जेंटीना की टीम पर मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना है कि अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ ने अमेरिकी बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली का उपयोग करके सैकड़ों मिलियन डॉलर की राशि को किस प्रकार स्थानांतरित किया। एफबीआई इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या इन भारी-भरकम वित्तीय लेन-देन के पीछे मनी लॉन्ड्रिंग अथवा कोई अन्य वित्तीय अपराध छिपा हुआ है। अमेरिकी कानूनों के उल्लंघन के संदेह में शुरू हुई इस कार्रवाई ने एएफए के शीर्ष नेतृत्व को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया है। इस वित्तीय नेटवर्क के तार अमेरिका के फ्लोरिडा से लेकर अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स तक फैले हुए हैं। इस पूरे मामले में अमेरिका के फ्लोरिडा में स्थित एक निजी कंपनी मुख्य संदिग्ध के रूप में उभरकर सामने आई है। यह कंपनी विदेशों में अर्जेंटीना फुटबॉल महासंघ की तमाम वित्तीय जिम्मेदारियों और व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करती है। दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चला है कि इस कंपनी के मालिकों ने अमेरिका के पांच प्रमुख वित्तीय संस्थानों में खाते खोल रखे थे। इन खातों के माध्यम से बीते कुछ समय में सैकड़ों मिलियन डॉलर का लेन-देन किया गया, जिसने अमेरिकी सुरक्षा और वित्तीय निगरानी एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, इस निजी कंपनी ने महासंघ की करीब 260 मिलियन अमेरिकी डॉलर की भारी-भरकम आय का प्रबंधन किया था। हालांकि, बैंक रिकॉर्ड की प्रारंभिक समीक्षा में यह बात सामने आई है कि इस विशाल राशि का केवल एक छोटा हिस्सा ही फुटबॉल महासंघ के वास्तविक संचालन और आवश्यक खर्चों में इस्तेमाल हुआ दिखाई देता है। इसके विपरीत, लगभग 57 मिलियन डॉलर की एक बड़ी रकम विभिन्न अज्ञात कंपनियों और लाभार्थियों को स्थानांतरित कर दी गई। इस विशाल ट्रांसफर के पीछे दस्तावेजों में कोई स्पष्ट आर्थिक कारण या व्यावसायिक औचित्य नजर नहीं आ रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है। जांचकर्ताओं को शक है कि जिन कंपनियों को करोड़ों डॉलर भेजे गए, उनमें से कई कागजी थीं और उनकी तरफ से किसी भी प्रकार की वास्तविक सेवा प्रदान करने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इतना ही नहीं, कुछ संदिग्ध कंपनियों का नियंत्रण ऐसे व्यक्तियों के हाथों में पाया गया है जो ब्यूनस आयर्स और बारिलोचे जैसे क्षेत्रों में रहते हैं और सरकारी सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। एक तरफ जहां देश की आम जनता सरकारी मदद पर निर्भर है, वहीं उनके नाम पर चल रही कंपनियों के खातों में करोड़ों डॉलर का यह संदिग्ध लेन-देन मिलना गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है। एएफए के अध्यक्ष क्लाउडियो टैपिया इस मेगा इवेंट से पहले ही कई तरह के विवादों के कारण लगातार आलोचनाओं का सामना कर रहे थे। उनके कार्यकाल में घरेलू लीग के ढांचे में किए गए अलोकप्रिय बदलाव और विश्व कप की तैयारियों के दौरान बेहद कमजोर टीमों के खिलाफ खेले गए मैत्री मैचों को लेकर फुटबॉल विशेषज्ञों और प्रशंसकों ने गंभीर सवाल उठाए थे। अब एफबीआई की इस ताजा कार्रवाई ने उनके नेतृत्व पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। टैपिया पर पहले से ही भ्रष्टाचार से जुड़ी कुछ अन्य आंतरिक जांचों का साया मंडरा रहा था। इसके अलावा, 58 वर्षीय क्लाउडियो टैपिया का अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के साथ भी लंबे समय से तीखा टकराव चल रहा है। दोनों के बीच अर्जेंटीना के फुटबॉल क्लबों के मालिकाना हक और उनके व्यावसायिक मॉडल को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद हैं। कुछ समय पहले ही सरकार की ओर से दर्ज कराई गई एक शिकायत के बाद टैपिया पर टैक्स चोरी के गंभीर आरोप भी लगे थे। इस राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध के कारण घरेलू मैदानों पर भी टैपिया को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है, जहां एक मुकाबले के दौरान दर्शकों ने सार्वजनिक रूप से उनकी हूटिंग की थी। मैदान के भीतर अर्जेंटीना की टीम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाकर अपनी खेल क्षमता का प्रदर्शन तो किया है, लेकिन कप्तान लियोनेल मेसी और मिस्र के कोच के बीच हुई तीखी बहस और रेफरी के फैसलों पर मचे बवाल ने पहले ही टीम को विवादों में रखा था। अब इस सब के बीच एएफए की वित्तीय गड़बड़ियों पर एफबीआई की इस बड़ी जांच ने अर्जेंटीना फुटबॉल के भविष्य और उसकी प्रतिष्ठा पर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में यदि अमेरिकी एजेंसियां कोई सख्त कदम उठाती हैं, तो इसका सीधा असर विश्व कप में टीम के अभियान और खिलाड़ियों के मनोबल पर पड़ना तय माना जा रहा है।
Morena news: सड़क नहीं बानी तो युवक ने की दंडवत यात्रा, मुरैना में युवक 25 km दूर सांसद के घर तक पहुंचा

Morena news: मुरैना। शहर की कीचड़ भरी सड़कें और दलदल भरे गड्ढों से लोग इतने परेशान हो गए हैं कि अब उनके सब्र का बांध टूट चुका है। इन्हीं हालातों के बिच जोहा गांव में सड़क निर्माण की मांग को लेकर एक युवक 25 km दूर सांसद शिवमंगल सिंह तोमर के घर तक पहुंच गया, वो भी दंडवत यात्रा करते हुए। करीब 10 किलोमीटर की दंडवत यात्रा तय करने के बाद सांसद के बेटे गौरव तोमर, स्थानीय जनप्रतिनिधि और अंबाह तहसीलदार मौके पर पहुंचे। जिसके बाद उन्होंने युवक को आश्वासन दिया कि गांव की सड़क का निर्माण आठ दिन के भीतर शुरू कर दिया जाएगा। साथ ही मशीनें और निर्माण सामग्री मौके पर पहुंचाने की बात भी कही गई। इसके बाद युवक ने पानी पीकर अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। Report: दुनिया की 99% आबादी ले रही है प्रदूषित हवा में सांस…. WHO ने चेताया बरसात में सड़क नहीं, दलदल बन जाता है रास्ता नवनीत का कहना है कि जोहा गांव की सड़क पिछले कईं सालों से खराब हालत में है। बारिश शुरू होते ही पूरा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और किसानों को होती है। ग्रामीणों के मुताबिक लगातार बारिश के कारण पिछले तीन दिनों से गांव के बच्चे स्कूल तक नहीं जा सके। कई लोगों को जरूरी काम के लिए भी गांव से बाहर निकलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। Monsoon Alert: उत्तर से दक्षिण तक सक्रिय हुआ मानसून आज इन राज्यों में तेज बारिश और आंधी की संभावना चुनाव के दौरान किया था सड़क का वादा नवनीत का आरोप है कि लोकसभा चुनाव के समय सांसद शिवमंगल सिंह तोमर वोट मांगने गांव आए थे। उस दौरान उन्होंने गांव में पक्की सड़क बनवाने का भरोसा दिया था, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद अब तक काम शुरू नहीं हुआ। इसी वजह से उन्होंने दंडवत यात्रा के जरिए विरोध दर्ज कराने का फैसला लिया। Gwalior rain alert: ग्वालियर में आज जमकर बरसेंगे बदल, MP के 20 ज्यादा जिलों में भरी बारिश का अलर्ट! पहले अन्न-जल त्यागने का किया था ऐलान आंदोलन शुरू करने से पहले नवनीत सिंह तोमर ने कहा था कि जब तक सड़क निर्माण शुरू नहीं होगा, तब तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। हालांकि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आश्वासन के बाद उन्होंने पानी पीकर अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
क्या बिल्ली पालने से बढ़ सकता है मानसिक बीमारी का खतरा? नई स्टडी ने चौंकाए वैज्ञानिक सावधानी बरतने की दी सलाह

नई दिल्ली । घर में बिल्ली पालना आजकल केवल शौक नहीं बल्कि कई लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। पालतू जानवरों से लगाव तनाव कम करने और मानसिक सुकून देने के लिए भी जाना जाता है। हालांकि हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक स्टडी ने बिल्ली पालने वालों का ध्यान एक संभावित स्वास्थ्य जोखिम की ओर खींचा है। शोध में दावा किया गया है कि बिल्लियों के संपर्क और एक गंभीर मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया के बीच संभावित संबंध देखा गया है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि इसका मतलब यह नहीं है कि बिल्ली पालने से हर व्यक्ति को यह बीमारी हो जाएगी। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कई वर्षों में प्रकाशित विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों का विश्लेषण किया। इस समीक्षा में अलग अलग देशों के शोध आंकड़ों को शामिल किया गया। अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि जिन लोगों का बिल्लियों से अधिक संपर्क रहा उनमें सिजोफ्रेनिया से जुड़े जोखिम कुछ मामलों में अधिक दिखाई दिए। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी माना कि इस संबंध को पूरी तरह साबित करने के लिए अभी और विस्तृत शोध की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस संभावित संबंध का कारण टोक्सोप्लाज्मा गोंडी नामक एक सूक्ष्म परजीवी माना जाता है। यह परजीवी मुख्य रूप से संक्रमित बिल्लियों के मल में पाया जा सकता है। यदि कोई व्यक्ति उचित स्वच्छता का पालन नहीं करता और किसी तरह यह परजीवी शरीर में प्रवेश कर जाए तो कुछ मामलों में यह मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है। हालांकि अधिकांश स्वस्थ लोगों में संक्रमण होने पर भी कोई गंभीर लक्षण दिखाई नहीं देते। डॉक्टरों का कहना है कि सिजोफ्रेनिया एक जटिल मानसिक बीमारी है जिसके पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता। आनुवंशिक प्रवृत्ति मानसिक तनाव मस्तिष्क में रासायनिक असंतुलन पर्यावरणीय प्रभाव और कई अन्य जैविक कारण भी इस बीमारी के विकास में भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए केवल बिल्ली पालने को इस बीमारी का सीधा कारण मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आप घर में बिल्ली पालते हैं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है बल्कि कुछ सामान्य सावधानियां अपनाना ही पर्याप्त है। बिल्ली का लिटर बॉक्स साफ करने के बाद हमेशा साबुन से अच्छी तरह हाथ धोएं। घर और पालतू जानवर दोनों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। नियमित रूप से पशु चिकित्सक से बिल्ली का स्वास्थ्य परीक्षण कराएं और गर्भवती महिलाओं कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों तथा छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि टोक्सोप्लाज्मा संक्रमण इन समूहों के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पालतू जानवरों से मिलने वाले भावनात्मक और मानसिक लाभ भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं। इसलिए किसी एक अध्ययन के आधार पर बिल्ली पालना छोड़ देने की जरूरत नहीं है। जरूरी यह है कि वैज्ञानिक तथ्यों को समझते हुए स्वच्छता और जिम्मेदार देखभाल को प्राथमिकता दी जाए। संतुलित जानकारी और सावधानी ही आपको और आपके पालतू साथी दोनों को सुरक्षित रख सकती है।
एचआईवी का नया हॉटस्पॉट बनता पंजाब! युवाओं में बढ़ रहे संक्रमण ने बढ़ाई चिंता जीएमसी जम्मू की लैब पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली । पंजाब में एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि राज्य को संक्रमण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में गिना जाने लगा है। बीते पांच महीनों के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब के आठ जिलों से हर महीने करीब 2500 एचआईवी जांच के नमूने राजकीय मेडिकल कॉलेज जीएमसी जम्मू की अत्याधुनिक वायरोलॉजी लैब भेजे जा रहे हैं। यहां जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट संबंधित जिलों को भेजी जाती है। लगातार बढ़ती जांच और सामने आ रहे मामलों ने संकेत दिया है कि संक्रमण की चुनौती अब पहले से कहीं अधिक गंभीर होती जा रही है। जीएमसी जम्मू की माइक्रोबायोलॉजी लैब को इस वर्ष फरवरी में नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज की मान्यता मिलने के बाद इसकी जांच क्षमता और विश्वसनीयता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कार्य करने वाली यह प्रदेश की पहली एनएबीएल मान्यता प्राप्त वायरोलॉजी लैब है। इसी वजह से पंजाब के होशियारपुर पठानकोट जालंधर रोपड़ मोगा बटाला नवांशहर और कपूरथला जैसे जिलों के एचआईवी जांच नमूनों की जिम्मेदारी भी इसी लैब को सौंपी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जांच रिपोर्टों में सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि संक्रमण के मामलों में बड़ी संख्या 25 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। इसके अलावा महिलाओं और बच्चों में भी संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नशीले पदार्थों का इंजेक्शन के माध्यम से सेवन संक्रमण फैलने का एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है। इसके साथ ही असुरक्षित यौन संबंध और समय पर जांच नहीं कराना भी संक्रमण बढ़ने की अहम वजह मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जीएमसी जम्मू में केवल सैंपलों की जांच की जाती है जबकि संक्रमित मरीजों का उपचार पंजाब में ही किया जाता है। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित स्वास्थ्य विभाग को भेज दी जाती है ताकि समय पर इलाज शुरू किया जा सके और संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके। एनएबीएल मान्यता मिलने के बाद जीएमसी जम्मू की जांच क्षमता में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 90 नमूनों की जांच हो पाती थी वहीं अब आधुनिक तकनीक और नई सुविधाओं की मदद से 24 घंटे में 1200 से अधिक नमूनों की जांच संभव हो गई है। इससे न केवल जम्मू कश्मीर बल्कि दूसरे राज्यों के सैंपलों की भी तेजी से जांच की जा रही है। भविष्य में नई मशीनों के जुड़ने के बाद यह क्षमता और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए समय पर जांच जागरूकता और सुरक्षित व्यवहार सबसे प्रभावी उपाय हैं। साथ ही नशे की रोकथाम नियमित स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना भी बेहद जरूरी है। यदि संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को समय रहते नहीं रोका गया तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। इसलिए सरकार स्वास्थ्य विभाग और समाज सभी को मिलकर जागरूकता अभियान तेज करने और जोखिम वाले समूहों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने पर विशेष ध्यान देना होगा।
US की H-1B वीजा फर्जीवाड़े पर बड़ी कार्रवाई….. भारतीय दिग्गज IT समेत कई बड़ी कंपनियां रडार पर

वाशिंगटन। अमेरिका (America) ने H-1B और पर्म (PERM) वर्क वीजा में चल रही कथित धोखाधड़ी के खिलाफ एक बड़ा जांच अभियान छेड़ दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि इस बड़े फर्जीवाड़े की जांच के रडार पर दिग्गज भारतीय आईटी कंपनी ‘कॉग्निजेंट’ (Leading Indian IT company ‘Cognizant’) समेत कई बड़ी कंपनियां शामिल हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में हुआ एक्शनवीजा से जुड़े इस बड़े गोरखधंधे के खिलाफ यह सख्त कदम अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (US Vice President JD Vance) के नेतृत्व वाली ‘टास्क फोर्स टू एलिमिनेट फ्रॉड’ के तहत उठाया गया है। कैसे खुला फर्जीवाड़े का राज?श्रम विभाग के तहत काम करने वाले ‘ऑफिस ऑफ द इंस्पेक्टर जनरल’ (OIG) ने बड़े स्तर पर चल रहे इस फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। OIG के आधिकारिक बयान में जांच से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं। कई नियोक्ताओं और लेबर ब्रोकर्स ने मिलकर वीजा के लिए फर्जी आवेदन जमा किए। विदेशी कामगारों का शोषण किया गया, उनसे जबरन कम वेतन पर काम कराया गया और उनके पैसों में अवैध कटौती की गई। कम मजदूरी वाले विदेशी कर्मचारियों से बाजार को भर दिया गया, जिसका सीधा नुकसान अमेरिकी कामगारों को हुआ और उनकी नौकरियां छिन गईं। ‘दर्जनों कंपनियों को जारी किए गए समन’बुधवार को फॉक्स बिजनेस से बातचीत के दौरान श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथोनी डी एस्पोसिटो ने इस कार्रवाई को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “हमने इस मामले में पहले ही दर्जनों समन जारी कर दिए हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम जांच में मिले हर एक सुराग की तह तक जाएं।” आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, “हमारे पास ऐसे व्हिसलब्लोअर्स मौजूद हैं जो ‘कॉग्निजेंट’ जैसी कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। ये कंपनियां पर्म और H-1B वीजा से जुड़े मुद्दों में पहले से ही काफी चर्चा में रही हैं।” अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों से समझौता नहींOIG ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि ऐसे जालसाज उन श्रम कार्यक्रमों की साख को नुकसान पहुंचाते हैं, जिन्हें देश में श्रमिकों की वास्तविक कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। इन कार्यक्रमों का मकसद अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों की कीमत पर भ्रष्ट लोगों की जेब भरना बिल्कुल नहीं है। जांच एजेंसी ने कहा कि वह विदेशी गेस्ट वर्कर वीजा सिस्टम का गलत इस्तेमाल करने वाले मानव तस्करी और जबरन मजदूरी कराने वाले पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। संस्था का साफ कहना है कि वह उन सभी साजिशों को जड़ से खत्म करेगी जो मजबूर मजदूरों का शोषण करते हैं और अमेरिकी नागरिकों के हक की नौकरियां छीनते हैं।