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पुरानी गाड़ियों के लिए खतरे की घंटी क्या E20 पेट्रोल से घटेगा माइलेज और खराब होंगे पार्ट्स नई रिपोर्ट में बड़ा खुलासा


नई दिल्ली । देशभर में E20 पेट्रोल की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही करोड़ों वाहन मालिकों के मन में इसके प्रभाव को लेकर सवाल भी बढ़ गए हैं। खासकर वे लोग अधिक चिंतित हैं जिनकी कार या बाइक E20 ईंधन के लिए प्रमाणित नहीं है। अब ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक ताजा रिपोर्ट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि पुराने और गैर सर्टिफाइड वाहनों में लंबे समय तक E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ रबर और प्लास्टिक के पुर्जों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी वाहनों में एक जैसी समस्या सामने नहीं आई और कई मामलों में वाहन सामान्य रूप से चलते रहे।

ARAI ने विभिन्न प्रकार के इंजनों और वाहनों पर लंबे समय तक परीक्षण किए। रिपोर्ट के अनुसार कुछ टर्बोचार्ज्ड फोर व्हीलर इंजनों में लंबे समय तक E20 पेट्रोल के उपयोग के बाद तकनीकी समस्याएं देखने को मिलीं। वहीं कुछ अन्य इंजन बिना किसी बड़ी परेशानी के परीक्षण में सफल रहे। एक वाहन निर्माता के परीक्षण में 400 घंटे तक कोई समस्या सामने नहीं आई जबकि दूसरे परीक्षण में 809 घंटे बाद एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मोमैकेनिकल फेलियर दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऐसी खराबी केवल E20 पेट्रोल की वजह से हुई हो यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसके पीछे अन्य तकनीकी कारण भी हो सकते हैं।

रिपोर्ट में सबसे अधिक चिंता रबर और प्लास्टिक से बने फ्यूल सिस्टम के पुर्जों को लेकर जताई गई है। इंजीनियरों के अनुसार इथेनॉल में नमी को तेजी से सोखने की क्षमता होती है। ऐसे में जिन वाहनों को E20 ईंधन के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया है उनमें समय के साथ फ्यूल होज पाइप गैसकेट सील और ओ रिंग जैसे हिस्सों के खराब होने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि धातु से बने पुर्जों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया और वाहन स्टार्ट होने या सामान्य संचालन में भी कोई बड़ी समस्या दर्ज नहीं हुई।

रिपोर्ट में माइलेज को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। परीक्षण के दौरान E10 पेट्रोल की तुलना में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर ईंधन की खपत लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ी। इसका मतलब है कि कुछ वाहनों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। हालांकि यह अंतर वाहन की तकनीक इंजन की स्थिति और ड्राइविंग शैली पर भी निर्भर करता है।

दूसरी ओर देश की प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों ने इस रिपोर्ट के बाद अपने पक्ष को भी स्पष्ट किया है। मारुति सुजुकी टोयोटा हुंडई हीरो मोटोकॉर्प टीवीएस और बजाज जैसी कंपनियों का कहना है कि उनके परीक्षण और लाखों वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड में E20 पेट्रोल से बड़े पैमाने पर किसी गंभीर नुकसान के प्रमाण नहीं मिले हैं। मारुति सुजुकी के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में करोड़ों वाहनों की सर्विस के दौरान तीन वर्ष से अधिक पुराने गैर E20 प्रमाणित वाहनों में भी रबर पार्ट्स के खराब होने या जंग लगने जैसी कोई व्यापक शिकायत सामने नहीं आई।

भारत सरकार ने अप्रैल 2025 में पूरे देश में E20 पेट्रोल उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया था। अब भविष्य में E22 और E30 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर भी काम चल रहा है। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन मालिक अपनी गाड़ी के निर्माता द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करें। यदि वाहन E20 के लिए प्रमाणित नहीं है तो समय समय पर फ्यूल सिस्टम की जांच कराना और अधिकृत सर्विस सेंटर से सलाह लेना बेहतर रहेगा। इससे संभावित समस्याओं से बचा जा सकता है और वाहन की कार्यक्षमता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

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