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Gwalior Medical Negligence: बिना डॉक्टर-वेंटिलेटर के चल रहा था अस्पताल, प्रसूता की मौत पर 3.12 लाख हर्जाना देने का आदेश

GWALIOR HOSPITAL

HIGHLIGHTS:

  • प्रसूता की मौत पर अस्पताल पर 3.12 लाख का जुर्माना
  • अस्पताल में नहीं थे विशेषज्ञ डॉक्टर और वेंटिलेटर
  • बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहा था हॉस्पिटल
  • ऑक्सीजन नहीं मिलने से बिगड़ी महिला की हालत
  • आयोग बोला- समय पर रेफर करते तो बच सकती थी जान

 

Gwalior Medical Negligence: मध्यप्रदेश। ग्वालियर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने इलाज में गंभीर लापरवाही के मामले में न्यू लाइफ लाइन हॉस्पिटल को दोषी माना है। आयोग ने अस्पताल प्रबंधन पर 3 लाख 12 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। बता दें कि आयोग के अनुसार अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर, वेंटिलेटर और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं मौजूद नहीं थीं, जिसके कारण प्रसूता की हालत बिगड़ती चली गई।

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डिलीवरी के बाद बिगड़ी तबीयत

मामला डी.डी. नगर निवासी उदयभान शर्मा की पत्नी अर्चना शर्मा से जुड़ा है। 30 सितंबर 2023 को उन्हें डिलीवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन सिजेरियन डिलीवरी हुई, लेकिन बाद में अर्चना का ऑक्सीजन लेवल गिरने लगा और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। परिजनों का आरोप है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अस्पताल ने समय पर ऑक्सीजन नहीं दी और न ही बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया। हालत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें कमला राजा अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

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जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही

आयोग की सुनवाई में अस्पताल प्रबंधन की कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। जांच में पता चला कि अस्पताल के बाहर जिस डॉक्टर के नाम का बोर्ड लगा था, वे वहां मरीज नहीं देखती थीं। अस्पताल बिना वैध रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहा था। साथ ही वेंटिलेटर, सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई और ऑपरेशन थिएटर के उपकरणों को कीटाणुमुक्त करने का कोई रिकॉर्ड भी अस्पताल प्रस्तुत नहीं कर सका।

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आयोग की सख्त टिप्पणी

आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा और सदस्य रेवती रमण मिश्रा ने अस्पताल को 45 दिन के भीतर 3 लाख 12 हजार रुपए देने का आदेश दिया है। इसमें 3 लाख रुपए आर्थिक क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपए मानसिक प्रताड़ना और 2 हजार रुपए वाद व्यय शामिल हैं। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर मरीज को समय रहते बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता, तो संभवतः उसकी जान बचाई जा सकती थी।

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