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ईरान संकट का असर: केले के दाम धराशायी, 2 रुपये किलो तक पहुंचे, महाराष्ट्र के किसान संकट में

मुंबई। पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत के कृषि व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है। खासतौर पर ईरान से जुड़े हालात और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते संकट ने महाराष्ट्र के केला उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है। निर्यात ठप होने से बाजार में सप्लाई बढ़ गई है और कीमतें गिरकर बेहद निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। निर्यात रुका, घरेलू बाजार में बढ़ा दबाव महाराष्ट्र के प्रमुख केला उत्पादक जिले जलगांव और सोलापुर इस समय सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बेहतर मौसम और अच्छी बारिश के कारण इस बार उत्पादन अच्छा हुआ था, लेकिन खाड़ी देशों में जारी संकट के चलते निर्यात लगभग ठप पड़ गया। कोल्ड स्टोरेज में बड़ी मात्रा में केले फंसे हुए हैं और शिपमेंट रुकने से किसानों को मजबूरन माल घरेलू बाजार में उतारना पड़ रहा है। कीमतों में भारी गिरावट फरवरी तक केले के दाम 18 से 22 रुपये प्रति किलो के बीच थे, लेकिन हालात तेजी से बिगड़े। मार्च में कीमतें घटकर 8–10 रुपये प्रति किलो रह गईं अप्रैल के पहले हफ्ते में ये गिरकर सिर्फ 2–3 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं कीमतों में यह गिरावट तब और तेज हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर तनाव बढ़ा और आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई। किसानों को भारी नुकसान सोलापुर जिले के करमाला क्षेत्र के एक किसान के मुताबिक, उन्होंने 10 एकड़ में केले की खेती पर करीब 20 लाख रुपये का निवेश किया था। फरवरी में जहां उन्हें 22 रुपये प्रति किलो तक भाव मिला, वहीं अब कीमतें 2–3 रुपये पर आ गई हैं। ऐसे में उन्हें कुल मिलाकर सिर्फ 2.5 से 3 लाख रुपये मिलने की उम्मीद है, यानी 17 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ सकता है। सालभर की फसल, जोखिम भी बड़ा केले की खेती अन्य फसलों की तरह मौसमी नहीं होती, बल्कि इसमें सालभर निवेश करना पड़ता है। ऐसे में कीमतों में अचानक गिरावट किसानों के लिए भारी संकट खड़ा कर देती है। लागत निकलना भी मुश्किल हो जाता है। सरकार से मदद की मांग निर्यात पर निर्भर किसान अब सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुआवजा दिया जाए नए निर्यात बाजार तलाशे जाएं खाड़ी देशों के विकल्प विकसित किए जाएं विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही निर्यात के रास्ते नहीं खुले, तो किसानों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।

आदित्य ठाकरे ने तो हीरोइन को ही मार दिया, निशिकांत दुबे के विवादित बोल, LS में हंगामा

नई दिल्‍ली। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान आज (गुरुवार, 16 अप्रैल को) विपक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों के बीच उस समय तीखी नोंकझोक देखने को मिली, जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या से जुड़े चर्चित मामले का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए शिवेसना (UBT) के एक प्रमुख युवा नेता के नाम का उल्लेख किया। इसके बाद शिवसेना (UBT) के सांसद सदन में हंगामा करने लगे। शिवसेना सांसदों ने कहा कि दुबे को अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। दरअसल, शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए बलात्कार के मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा से जुड़े दो नेताओं के नामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने विपक्ष को बदनाम कर रही है, जबकि खुद उसके नेता महिलाओं के यौन शोषण के आरोपी रहे हैं। ढोल बजाने के लिए आरक्षण बिल लाया गया सावंत ने कहा कि ढोल बजाने के लिए आरक्षण बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि आपने परिसीमन उससे जोड़ा है, इसलिए विरोध हो रहा है। सावंत ने कहा, आज भी मणिपुर में हमले शुरू हैं। आपकी कथनी और करनी में फर्क है, कहा कुछ, और किया कुछ। आपको नहीं भूलना चाहिए कि कुलदीप सिंह सेंगर कौन है, बृज भूषण शरण सिंह किसकी पार्टी का है? जिन लोगों ने महिलाओं का यौन शोषण किया है। इस पर जब सत्ता पक्ष ने रोटा-टोकी की तो सावंत ने कहा, “क्यों बलात्कारी बहुत प्यारे हैं क्या आपको?” तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा कि कार्रवाई से इसे निकलवा देंगे इस पर भी सावंत भड़क गए। उन्होंने पूछा क्यों क्या बलात्कारी आदर्श है किसी का? इसी बीच , भाजपा सांसद दुबे ने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या से जुड़े मामले का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) के एक प्रमुख नेता के नाम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “अगर ये कुलदीप सेंगर और बृजभूषण शरण की बात करेंगे तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी, उसने हिरोइन को मार दिया।” दुबे को माफी मांगनी चाहिए इसे लेकर सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार)की नेता सुप्रिया सुले और कांग्रेस के सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया। अरविंद सावंत ने कहा कि भाजपा सांसद दुबे को माफी मांगनी चाहिए। हंगामा होता देख पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने दुबे और सावंत की टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद भी सावंत ने अपना भाषण जारी रखा। सावंत ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है बल्कि केंद्र सरकार ने स्वार्थ के लिए विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने सरकार से ही पूछा कि बताइए हमने महिलाओं का कब विरोध किया? सावंत ने कहा कि 2023 में सभी ने महिला आरक्षण का समर्थन किया था, क्या प्रधानमंत्री जी आप ये भी भूल गए। दिशा सालियान की आत्महत्या का मामला बता दें कि भाजपा सांसद का इशारा दिशा सालियान की आत्महत्या केस की तरफ था। 2020 में भी अभिनेत्री दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में बीजेपी नेताओं ने आदित्य ठाकरे पर सवाल उठाए थे और उनके नाम का इस्तेमाल किया था। मार्च 2025 में, दिशा के पिता ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया और मामले में उनकी भूमिका की जांच की मांग की थी।

IPL 2026 में KKR की अग्निपरीक्षा क्या GT के खिलाफ खुलेगा जीत का खाता

नई दिल्ली । कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए इंडियन प्रीमियर लीग 2026 अब तक किसी बुरे सपने से कम साबित नहीं हुआ है टीम लगातार हार से जूझ रही है और अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर पहुंच गई है ऐसे में शुक्रवार को गुजरात टाइटन्स के खिलाफ होने वाला मुकाबला उसके लिए करो या मरो जैसा बन गया है जहां वह अपनी पहली जीत दर्ज करने के इरादे से मैदान में उतरेगी कप्तान अजिंक्य रहाणे और कोच अभिषेक नायर के नेतृत्व में टीम अब तक संतुलन और स्पष्ट रणनीति बनाने में असफल रही है केकेआर ने अब तक खेले गए पांच मैचों में से चार में हार का सामना किया है जबकि एक मुकाबला बारिश के कारण रद्द हो गया था टीम के प्रदर्शन में निरंतरता की कमी साफ नजर आ रही है गेंदबाजी विभाग में भी टीम को बड़ा झटका लगा है हर्षित राणा और आकाश दीप के चोटिल होने के अलावा मुस्तफिजुर रहमान के बाहर होने से गेंदबाजी कमजोर पड़ गई है वहीं स्पिन विभाग जो टीम की ताकत माना जाता था वह भी इस सीजन में बेअसर नजर आ रहा है सुनील नारायण और वरुण चक्रवर्ती जैसे गेंदबाज अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं चक्रवर्ती अब तक एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके हैं बल्लेबाजी में भी टीम का संयोजन सवालों के घेरे में है कैमरन ग्रीन पर बड़ी जिम्मेदारी है जिन्हें भारी कीमत पर टीम में शामिल किया गया था लेकिन वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं पांच पारियों में उनके बल्ले से सिर्फ 56 रन निकले हैं टीम मैनेजमेंट के फैसले भी चर्चा में हैं जैसे टिम सीफर्ट और रचिन रविंद्र जैसे खिलाड़ियों को बाहर रखना दूसरी ओर गुजरात टाइटन्स संतुलित और आत्मविश्वास से भरी टीम नजर आ रही है कप्तान शुभमन गिल के नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया है हालांकि उसे अपने घरेलू मैदान पर एक हार का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद उसने बाहर जीत दर्ज कर लय हासिल कर ली है गुजरात की गेंदबाजी आक्रमण मजबूत दिख रहा है जिसमें प्रसिद्ध कृष्णा और राशिद खान अहम भूमिका निभा रहे हैं वहीं बल्लेबाजी में जोस बटलर और शुभमन गिल का फॉर्म टीम को और मजबूती देता है इस मुकाबले में केकेआर के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपनी रणनीति को सुधारना और तीनों विभागों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा अगर टीम को इस सीजन में वापसी करनी है तो उसे इस मैच में हर हाल में जीत दर्ज करनी होगी वहीं गुजरात टाइटन्स अपनी जीत की लय को बरकरार रखते हुए अंक तालिका में अपनी स्थिति और मजबूत करने के इरादे से उतरेगी अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या केकेआर अपनी खोई हुई लय वापस पा सकेगी या फिर गुजरात टाइटन्स का दबदबा एक और मुकाबले में कायम रहेगा

आईपीएल 2026 में पंजाब किंग्स का दबदबा, लगातार जीत से शीर्ष पर मजबूत पकड़..

नई दिल्ली:   इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में पंजाब किंग्स का प्रदर्शन लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। टीम ने इस सीजन में अपनी शुरुआत बेहद प्रभावशाली अंदाज में की है और लगातार जीत दर्ज करते हुए अंकतालिका में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है। मुंबई इंडियंस के खिलाफ वानखेड़े स्टेडियम में मिली सात विकेट की जीत ने टीम की स्थिति को और मजबूत कर दिया है। यह मुकाबला हाई स्कोरिंग और प्रतिस्पर्धी रहा जिसमें दोनों टीमों ने अपनी क्षमता का अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन पंजाब किंग्स ने रणनीति और संयम के साथ लक्ष्य हासिल कर मैच अपने नाम कर लिया। टीम के लगातार बेहतर प्रदर्शन ने यह संकेत दिया है कि इस बार पंजाब किंग्स खिताब की प्रबल दावेदारों में शामिल है। मुंबई इंडियंस ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 195 रन बनाए। टीम की शुरुआत मजबूत रही और मध्यक्रम ने भी योगदान दिया लेकिन अंतिम ओवरों में रन गति को और तेज करने में थोड़ी कमी रह गई। इस पारी का सबसे बड़ा आकर्षण क्विंटन डिकॉक का शानदार शतक रहा जिन्होंने 60 गेंदों पर नाबाद 112 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता और तकनीक का बेहतरीन संतुलन देखने को मिला। हालांकि पंजाब किंग्स के गेंदबाजों ने बीच के ओवरों में वापसी की कोशिश की और रन गति पर अंकुश लगाने का प्रयास किया लेकिन मुंबई को बड़े स्कोर तक पहुंचने से पूरी तरह नहीं रोक सके। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पंजाब किंग्स की शुरुआत आत्मविश्वास से भरी रही। बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही सकारात्मक रुख अपनाया और गेंदबाजों पर दबाव बनाया। प्रभसिमरन सिंह ने तेजतर्रार पारी खेलते हुए 39 गेंदों पर 80 रन बनाए और पारी की गति को मजबूत आधार दिया। वहीं कप्तान श्रेयस अय्यर ने संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाते हुए 35 गेंदों पर 66 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों की साझेदारी ने मैच को पूरी तरह पंजाब के पक्ष में कर दिया और टीम ने केवल 16 ओवर और तीन गेंदों में तीन विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत ने टीम की बल्लेबाजी गहराई और आत्मविश्वास दोनों को उजागर किया। मैच के बाद टीम के मुख्य कोच ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम की सोच पर अपनी बात रखते हुए कहा कि उनका उद्देश्य खिलाड़ियों पर नियंत्रण करना नहीं बल्कि उन्हें एक ऐसा माहौल देना है जहां वे स्वतंत्र रूप से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। उनके अनुसार कोच की भूमिका खिलाड़ियों का समर्थन करने और उन्हें लगातार बेहतर करने के लिए प्रेरित करने की होती है। उन्होंने यह भी बताया कि टीम निर्माण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात स्पष्ट भूमिका और आपसी सहयोग होता है जिससे खिलाड़ी अपने दायित्व को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं और टीम के लिए योगदान दे पाते हैं। टीम प्रबंधन ने नीलामी के दौरान भी इसी सोच को अपनाया था और एक संतुलित टीम तैयार करने पर ध्यान दिया था जिसमें हर खिलाड़ी को उसकी भूमिका के अनुसार जिम्मेदारी दी गई। इस दृष्टिकोण का असर मैदान पर साफ दिखाई दे रहा है जहां खिलाड़ी आत्मविश्वास के साथ खेल रहे हैं और हर मैच में अलग-अलग खिलाड़ी टीम की जीत में योगदान दे रहे हैं। टी20 क्रिकेट की अनिश्चितता को देखते हुए यह रणनीति और भी प्रभावी साबित हो रही है क्योंकि किसी भी मैच में कुछ अच्छे प्रदर्शन ही परिणाम बदलने की क्षमता रखते हैं। इस सीजन में पंजाब किंग्स का प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि सही रणनीति और सकारात्मक माहौल के साथ कोई भी टीम लगातार सफलता हासिल कर सकती है।

जबलपुर में बुलडोजर एक्शन पर ब्रेक हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम कमिश्नर को नोटिस भेजा

जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में मदन महल पहाड़ी से विस्थापित किए जा रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है इस फैसले के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है और पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है कोर्ट ने इस संबंध में जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जिन स्थानों पर विस्थापितों को बसाया जा रहा है वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई कि प्रस्तावित पुनर्वास स्थल पर रहने के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव है जिससे विस्थापितों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई संजीव सचदेवा और विनय सराफ की खंडपीठ में हुई जहां अदालत ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए संतोषजनक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित की गई है जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं दरअसल मदन महल पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी जिसे हटाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया था यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है जिसका उद्देश्य पहाड़ी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करना और अवैध कब्जों को हटाना है जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2026 से इस अभियान को दोबारा शुरू किया गया और प्रशासन ने पुरवा क्षेत्र में ICMR के सामने स्थित करीब 700 अवैध कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हटाकर जबलपुर के तेवर क्षेत्र में पुनर्वासित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी हालांकि विस्थापितों ने पुनर्वास स्थल की स्थिति को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं उनका कहना है कि वहां न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं ऐसे में बिना समुचित व्यवस्था के उन्हें वहां बसाना उनके जीवन स्तर को और अधिक कठिन बना सकता है हाईकोर्ट का यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि विकास और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ साथ मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पुनर्वास केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि उसमें विस्थापितों के सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए फिलहाल प्रशासन इस मामले में अपना पक्ष तैयार करने में जुटा हुआ है और कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है वहीं प्रभावित लोगों को भी उम्मीद है कि अदालत उनके हितों की रक्षा करेगी और उन्हें उचित सुविधाओं के साथ सुरक्षित पुनर्वास मिलेगा आने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है

शहबाज शरीफ की इज्जत बच गई! कंगाल पाकिस्तान को सऊदी प्रिंस ने दिए 2 अरब डॉलर

इस्‍लमाबाद। किस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हो गए हैं। यह राशि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब द्वारा एक दिन पहले घोषित की गई 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है। तो पाकिस्तान की इज्जत बच गई? सऊदी अरब से पाकिस्तान को 2 अरब अमेरिकी डॉलर की माली मदद मिली है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने गुरुवार को पुष्टि की कि उसे सऊदी अरब से 2 अरब अमेरिकी डॉलर प्राप्त हो गए हैं। यह राशि वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब द्वारा एक दिन पहले घोषित की गई 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता का हिस्सा है। एसबीपी ने सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में बताया कि यह धनराशि 15 अप्रैल ( बुधवार ) को प्राप्त हुई है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सऊदी अरब ने मंगलवार को पाकिस्तान के लिए अपनी मौजूदा 5 अरब डॉलर की सुविधा को तीन वर्ष और बढ़ा दिया है तथा अतिरिक्त 3 अरब डॉलर की जमा राशि देने का वादा भी किया है। वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने अमेरिका से कहा कि मौजूदा 5 अरब डॉलर की जमा राशि अब सालाना रोलओवर व्यवस्था के अधीन नहीं रहेगी और इसे लंबी अवधि तक बढ़ा दिया गया है। वहीं, एसबीपी के प्रवक्ता ने बताया कि 2 अरब डॉलर पहले ही प्राप्त हो चुके हैं, जबकि शेष 1 अरब डॉलर जल्द ही आने वाला है। इस नई जमा राशि के साथ सऊदी अरब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक में कुल 8 अरब डॉलर की नकद जमा रखने वाला सबसे बड़ा देश बन गया है। पाकिस्तान को यह मदद सऊदी ने ऐसे समय में किया है जब पाकिस्तान इस महीने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को 3.5 अरब डॉलर चुकाने की तैयारी कर रहा है, जो उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। आईएमएफ ने शर्त रखी है कि पाकिस्तान के तीन प्रमुख द्विपक्षीय ऋणदाताओं ( सऊदी अरब, चीन और यूएई) को चल रहे तीन वर्षीय कार्यक्रम के पूरा होने तक अपनी नकद जमा राशि बनाए रखनी होगी। तीन देशों की यात्रा पर हैं शहबाज शरीफ बता दें कि यह वित्तीय सहायता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की पश्चिम एशिया यात्रा के दौरान प्राप्त हुई है। बुधवार को तीन देशों की यात्रा पर निकले शरीफ ने कहा कि सऊदी अरब का यह समर्थन पाकिस्तान की बाहरी वित्तीय जरूरतों के लिए ‘नाजुक समय’ पर आया है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और देश के बाहरी खाते को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री शरीफ ने कहा कि सरकार आईएमएफ समर्थित कार्यक्रम के तहत अपने बाजार दायित्वों और लक्ष्यों के अनुरूप भंडार बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। वित्तीय वर्ष के अंत तक लगभग 18 अरब डॉलर का भंडार बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो करीब 3.3 महीने के आयात कवर के बराबर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च तक पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, जो लगभग तीन महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त था। हालांकि, यूएई को ऋण चुकाने की मांग ने भंडार पर नया दबाव डाला था। मार्च में पाकिस्तान यूएई के साथ 3.5 अरब डॉलर की सुविधा बढ़ाने के समझौते में विफल रहा था, जो सात वर्षों में ऐसी पहली विफलता मानी जा रही है।

श्योपुर हादसे पर CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान मृतकों को 4 लाख घायलों को आर्थिक मदद

श्योपुर । मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है इस घटना पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता का बड़ा ऐलान किया है मुख्यमंत्री ने इस हादसे को बेहद पीड़ादायक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हर संभव मदद का भरोसा दिलाया मुख्यमंत्री द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी वहीं गंभीर रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 50 हजार रुपए की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं यह घोषणा मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से की और संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से राहत कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए यह दर्दनाक हादसा श्योपुर जिले के विजयपुर थाना क्षेत्र के खितरपाल गांव के पास हुआ जहां एक ट्रैक्टर ट्रॉली अनियंत्रित होकर पलट गई बताया जा रहा है कि ट्रॉली में सवार सभी लोग वीरपुर क्षेत्र के घूघस गांव से विजयपुर के झारबड़ौदा में भात देने जा रहे थे इसी दौरान गैस गोदाम के पास अचानक संतुलन बिगड़ने से ट्रैक्टर ट्रॉली पलट गई और उसमें सवार कई लोग उसके नीचे दब गए हादसा इतना भयावह था कि मौके पर ही चार महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए घटना के तुरंत बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और आसपास के लोग सहायता के लिए दौड़ पड़े स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव कार्य शुरू करते हुए घायलों को बाहर निकाला और उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया जहां उनका इलाज जारी है मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि इस दुखद घटना में घायल हुए सभी लोगों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना भी की साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में यात्रियों को ले जाने के लिए उपयोग किए जाने वाले ट्रैक्टर ट्रॉली जैसे असुरक्षित साधनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं अक्सर देखा जाता है कि ऐसे वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाया जाता है जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है फिलहाल प्रशासन द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है वहीं घायलों के इलाज और पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैला दी है और लोग मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं

यूरोप पर मंडरा रहा ‘फ्यूल संकट’ का खतरा: सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन, उड़ानें रद्द होने की आशंका

वाशिंगटन। मिडल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप लेता दिख रहा है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट ईंधन का भंडार बेहद सीमित रह गया है—सिर्फ करीब छह सप्ताह या उससे थोड़ा अधिक। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में फ्लाइट्स कैंसल होने की नौबत आ सकती है। होर्मुज बना संकट का ‘गला दबाने वाला पॉइंट’ बिरोल ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को इस पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बताया। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। मौजूदा युद्ध के चलते यहां आपूर्ति बाधित है, जिससे तेल, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ रहा है। उन्होंने साफ कहा—अगर यह मार्ग जल्द नहीं खुला, तो यह “अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” साबित हो सकता है। यूरोप में ईंधन की किल्लत, दुनिया पर असर IEA प्रमुख के मुताबिक, यूरोप में जेट ईंधन की कमी सबसे पहले नजर आएगी। फ्लाइट्स रद्द होने लगेंगी पेट्रोल, गैस और बिजली महंगी होगी सप्लाई चेन प्रभावित होगी इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा—महंगाई बढ़ेगी और विकास दर धीमी पड़ सकती है। गरीब देशों पर सबसे ज्यादा मार बिरोल ने चेताया कि इस संकट का असर सभी देशों पर पड़ेगा, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को झेलना पड़ेगा। उनके मुताबिक, आर्थिक नुकसान असमान होगा कमजोर अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा प्रभावित होंगी कुछ देशों में मंदी तक की स्थिति बन सकती है ‘टोल बूथ’ सिस्टम पर आपत्ति ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की कोशिश पर भी बिरोल ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था स्थायी हो गई, तो भविष्य में अन्य अहम समुद्री रास्तों—जैसे मलक्का स्ट्रेट—पर भी ऐसा हो सकता है, जो वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक संकेत है। टैंकर फंसे, उत्पादन ठप फारस की खाड़ी में 110+ तेल टैंकर और 15+ LNG जहाज फंसे हुए हैं युद्ध में 80 से ज्यादा ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित उत्पादन सामान्य होने में कई महीने, पूरी रिकवरी में 2 साल तक लग सकते हैं आगे क्या? बिरोल के अनुसार, अगर मई के अंत तक हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को ऊंची महंगाई धीमी आर्थिक वृद्धि और संभावित मंदी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह संकट भविष्य में परमाणु ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर दुनिया को तेजी से मोड़ सकता है। ऊर्जा और भू-राजनीति का यह टकराव अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुला, तो आने वाले हफ्तों में इसका असर सीधे लोगों की जेब और यात्रा दोनों पर दिखेगा।

सिंगरौली में तेज रफ्तार का कहर हाइवा ने बाइक सवारों को कुचला 2 की मौत सड़क पर उबाल

सिंगरौली । मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में एक बार फिर तेज रफ्तार ने कहर बरपाया है जहां देर रात हुए भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया घटना लघाडोल थाना क्षेत्र के भाटपानी इलाके की बताई जा रही है जहां कोयले से लोड एक तेज रफ्तार हाइवा वाहन ने बाइक सवार तीन लोगों को बेरहमी से कुचल दिया प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसा इतना भयावह था कि टक्कर लगते ही बाइक सवार दो युवकों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि तीसरा गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर तड़पता रहा स्थानीय लोगों की मदद से घायल को तुरंत बैढ़न के जिला ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया जहां उसका इलाज जारी है और उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है मृतकों की पहचान में सामने आया है कि एक युवक सीधी जिले के भुईमाड गांव का निवासी था जबकि दूसरा मृतक और घायल सिंगरौली जिले के बरवानी क्षेत्र के बताए जा रहे हैं इस दुखद घटना की खबर मिलते ही परिजनों में मातम छा गया और पूरे इलाके में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया हादसे के बाद गुस्साए ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया लोगों ने सड़क को दोनों तरफ से जाम कर दिया जिससे आवागमन पूरी तरह ठप हो गया और कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और हालात को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया अधिकारियों द्वारा लगातार लोगों को समझाइश दी जा रही है ताकि जाम को खुलवाया जा सके और स्थिति सामान्य हो सके हालांकि लोगों का गुस्सा इतना ज्यादा है कि वे दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं बताया जा रहा है कि हादसे के बाद आरोपी हाइवा चालक मौके से फरार हो गया जिसकी तलाश के लिए पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं आसपास के क्षेत्रों में नाकेबंदी भी की गई है ताकि जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जा सके यह घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है खासकर उन इलाकों में जहां भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया फिलहाल प्रशासन स्थिति को सामान्य करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के प्रयास में जुटा हुआ है लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही और तेज रफ्तार की कीमत निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी

असरानी की कॉमेडी यात्रा: दिग्गज कलाकारों से मिली प्रेरणा ने बदला करियर..

नई दिल्ली:   हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडी अभिनेता असरानी का सफर भारतीय फिल्म जगत में एक ऐसी मिसाल के रूप में देखा जाता है जिसने यह साबित किया कि सहज अभिनय और सटीक कॉमिक टाइमिंग किसी भी कलाकार को अमर बना सकती है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक अभिनय से आगे बढ़कर हास्य की बारीकियों को समझने की कोशिश की और धीरे धीरे अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनकी छवि आज भी दर्शकों के मन में उस सख्त लेकिन हास्यपूर्ण जेलर के रूप में जीवित है, जिनका संवाद आज भी लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बना हुआ है। असरानी के अभिनय जीवन को आकार देने में हिंदी सिनेमा के कई दिग्गज कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शुरुआती दौर में उन्होंने किशोर कुमार की फिल्मों और उनके अनोखे अंदाज को करीब से समझा, जहां हास्य केवल संवाद पर नहीं बल्कि अभिव्यक्ति और समय पर आधारित होता था। इसी तरह महमूद की कॉमेडी शैली ने उन्हें यह सिखाया कि हास्य में भावनाओं का संतुलन कितना महत्वपूर्ण होता है। वहीं जॉनी वॉकर के साथ काम करने के अनुभव ने उनके पेशेवर अनुशासन को मजबूत किया और यह समझ दी कि समय की पाबंदी और सेट पर अनुशासन भी एक कलाकार की पहचान बनाते हैं। इन तीनों कलाकारों का प्रभाव असरानी के व्यक्तित्व और अभिनय शैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। फिल्मी करियर के दौरान असरानी ने कई ऐसी फिल्मों में काम किया जो भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर का हिस्सा मानी जाती हैं। इन फिल्मों में उनका योगदान केवल एक हास्य कलाकार तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने हर किरदार में एक अलग तरह की ऊर्जा और वास्तविकता जोड़ी। उनकी खासियत यह रही कि वे हर दृश्य में स्वाभाविक लगते थे और दर्शकों को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के हंसा देते थे। समय के साथ उन्होंने यह भी समझाया कि कॉमेडी केवल चुटकुलों पर निर्भर नहीं होती बल्कि सही समय पर बोले गए संवाद और परिस्थिति की समझ से उत्पन्न होती है। अपने लंबे करियर में असरानी ने यह सिद्ध किया कि एक सफल कलाकार बनने के लिए निरंतर सीखना और अपने अनुभवों से विकसित होना जरूरी है। उन्होंने अपने समकालीन कलाकारों से जो सीख ली, उसे अपने अभिनय में इस तरह ढाला कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन गई। उनकी कॉमेडी शैली में सरलता, वास्तविकता और गहरी समझ का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है, जिसने उन्हें भारतीय फिल्म उद्योग में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। आज भी उनके किरदार और अभिनय शैली दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं और नई पीढ़ी के कलाकार उनके काम से प्रेरणा लेते हैं। उनका योगदान भारतीय सिनेमा में हास्य अभिनय की परिभाषा को नया आयाम देता है और यह दर्शाता है कि एक कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका अनुशासन, अवलोकन क्षमता और सीखने की इच्छा होती है।