प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 और 11 जुलाई को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर न्यूजीलैंड पहुंचेंगे। लगभग चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा होगी। ऐसे समय में व्यापार समझौते को लेकर न्यूजीलैंड की ओर से आया यह संकेत दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और कृषि सहित कई क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर व्यापक चर्चा होगी।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा है कि भारत के साथ होने वाला व्यापार समझौता उनके देश के निर्यातकों के लिए नए अवसर लेकर आएगा। उनका मानना है कि भारतीय बाजार तक आसान पहुंच मिलने से न्यूजीलैंड के उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए दीर्घकालिक लाभ का आधार बनेगा।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कई वर्षों से जारी रही है। इसकी शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद वार्ताएं ठहर गई थीं। बाद में दोनों देशों ने दोबारा बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया और कई दौर की चर्चाओं के बाद समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। अब दोनों सरकारें इसे व्यावहारिक रूप से लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार का दायरा बढ़ेगा और निवेश के नए अवसर भी विकसित होंगे। कृषि उत्पाद, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों को भी न्यूजीलैंड के बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक व्यापार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच ऐसे समझौते दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और नए बाजार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बढ़ते आर्थिक संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक रणनीतिक सहयोग को भी नई गति दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की आगामी यात्रा को केवल एक औपचारिक राजनयिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय वार्ताओं से व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। ऐसे में टैरिफ में प्रस्तावित राहत का यह फैसला दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।