HIGHLIGHTS:
- व्यापमं केस में बर्खास्त छात्रों को डिग्री देने का आरोप
- लोकायुक्त भोपाल और ग्वालियर ने शुरू की जांच
- डीन, रजिस्ट्रार समेत कई अधिकारी जांच के घेरे में
- वायरल ऑडियो में ‘पेंडिंग केस’ निपटाने की बात
- पूर्व छात्र की शिकायत के बाद खुला मामला
GWALIOR JIWAJI DEGREE SCAME: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज (GRMC) और जीवाजी यूनिवर्सिटी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। व्यापमं कांड में साल 2017 में बर्खास्त किए गए MBBS छात्रों को कथित रूप से डिग्रियां देने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बता दें कि यूनिवर्सिटी ने इस मामले में सिर्फ खानापूर्ति की और नियमों को नजरअंदाज कर डिग्रियां जारी कर दीं।
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लोकायुक्त ने मांगे दस्तावेज
मामले की शिकायत मिलने के बाद अब लोकायुक्त भोपाल और ग्वालियर ने जांच शुरू कर दी है। लोकायुक्त ने मेडिकल कॉलेज और जीवाजी यूनिवर्सिटी से जुड़े दस्तावेज तलब किए हैं। इस जांच के दायरे में कॉलेज के डीन, यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार और कई प्रशासनिक अधिकारी आ गए हैं।
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पूर्व छात्र की शिकायत से खुला मामला
इस पूरे मामले की शिकायत पूर्व मेडिकल छात्र संदीप लहारिया ने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2006 से 2010 के बीच के 25 छात्रों को व्यापमं कांड में नाम आने के बाद न्यू हाई पॉवर एक्शन कमेटी ने बर्खास्त कर दिया था। इसके बावजूद उन्हें बाद में MBBS की डिग्रियां दे दी गईं। शिकायत राज्यपाल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन को भी भेजी गई थी।
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वायरल ऑडियो से मचा हड़कंप
मामले में एक वायरल ऑडियो ने नया मोड़ ला दिया। ऑडियो में मेडिकल कॉलेज की छात्र शाखा के तत्कालीन प्रभारी बाबू प्रशांत चतुर्वेदी कथित रूप से ‘पुराने केस’ निपटाने की बात करते सुनाई दे रहे हैं। वहीं एक अन्य ऑडियो में वह माफी मांगते और खुद को बचाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। ऑडियो सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।