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केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली में भारी सुरक्षा बल तैनात, बिना औपचारिक अनुमति प्रदर्शन की तैयारी में जुटी कॉकरोच पार्टी

नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में हुई कथित धांधलियों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले एक बड़े छात्र आंदोलन से पहले राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के बीच तेजी से पहचान बनाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) को मुख्यधारा के राजनीतिक दलों का समर्थन जुटाने के प्रयास में बड़ा झटका लगा है। देश के सबसे बड़े युवा संगठनों में से एक इंडियन यूथ कांग्रेस (आईवाईसी) ने इस नए गुट के साथ किसी भी प्रकार का राजनीतिक मंच साझा करने या उनके आंदोलन में सीधे तौर पर शामिल होने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।

इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे दोनों संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच हुई एक बंद कमरे की बैठक को माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार हाल ही में यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब से मुलाकात करने पहुंचे थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर बड़े आंदोलनों का अनुभव रखने वाले यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का संगठनात्मक सहयोग प्राप्त करना था। सीजेपी का मानना था कि ऑनलाइन लोकप्रियता को सड़क पर एक प्रभावी और अनुशासित भीड़ में बदलने के लिए उन्हें कांग्रेस के युवा मोर्चे के संगठनात्मक ढांचे और तजुर्बे की आवश्यकता होगी, जिससे उनकी स्वीकार्यता आम जनता के बीच और अधिक मजबूत हो सके।

हालांकि, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने इस प्रकार के किसी भी गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के युवाओं और छात्रों से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे को उठाने वाले हर संगठन का वे व्यक्तिगत और नैतिक तौर पर स्वागत करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी की नीति किसी अन्य नए या अपरिचित संगठन के मंच पर जाकर उनके नेतृत्व में आंदोलन करने की इजाजत नहीं देती। कांग्रेस के भीतर चल रही रणनीतिक चर्चाओं के अनुसार, पार्टी का थिंक-टैंक इस नए आंदोलन को लेकर बेहद सतर्क और आशंकित नजर आ रहा है।

कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों को अंदेशा है कि सीजेपी का यह नया छात्र आंदोलन वर्ष 2011 में हुए ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन की राह पर जा सकता है, जिसने तत्कालीन सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर अंततः एक नए राजनीतिक दल को जन्म दिया था। कांग्रेस को खुफिया इनपुट मिले हैं कि इस नए संगठन के तार उनके कुछ प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंदियों से परोक्ष रूप से जुड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने अपने सभी सदस्यों और जमीनी कार्यकर्ताओं को निर्देश जारी किए हैं कि वे इस आंदोलन से एक निश्चित दूरी बनाकर रखें और युवाओं के इस मुद्दे को अपने स्वतंत्र मंचों से उठाएं।

इस राजनीतिक खींचतान के बीच दिल्ली का सुरक्षा तंत्र और पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। आगामी छह जून को प्रस्तावित इस विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर नई दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास के संवेदनशील इलाकों में एक हजार से अधिक दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात कर दिया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े इस संगठन के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने पूरी सुरक्षा घेराबंदी कर दी है ताकि लुटियंस दिल्ली की कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न न हो।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, पुलिस प्रशासन को इस प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के बारे में अब तक केवल सोशल मीडिया पोस्ट और ऑनलाइन प्रसारित हो रहे संदेशों के माध्यम से ही सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले इस संगठन की ओर से अब तक पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने या किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को प्रदर्शन की अनुमति के लिए कोई औपचारिक आवेदन या सूचना पत्र नहीं सौंपा गया है। पुलिस ने साफ किया है कि बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के जमावड़े की इजाजत नहीं दी जाएगी, हालांकि यदि संगठन की ओर से औपचारिक अनुरोध आता है, तो सुरक्षा और रूट नियमों के आधार पर उस पर विचार किया जा सकता है।

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