समर्थकों का आरोप था कि पुलिस की कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है और पूरे मामले की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि आरोपी को बिना निष्पक्ष जांच के निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई कानून और दर्ज मामलों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मनीष पटेल के खिलाफ अलग-अलग थानों में कुल छह मामले दर्ज हैं। इनमें विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में तीन प्रकरण, सिविल लाइन थाने में एक मामला और समान थाने में एक अन्य मामला शामिल है। इसके अलावा सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी मोबाइल लूट के एक मामले में स्थायी वारंटी भी रहा है।
सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह के अनुसार आरोपी के खिलाफ वर्ष 2016 में चोरी का मामला दर्ज हुआ था। वहीं विश्वविद्यालय थाने में उसी वर्ष चोरी, लूट और मारपीट के अलग-अलग मामलों में प्रकरण कायम किए गए थे। समान थाने में भी उसके खिलाफ चोरी का मामला दर्ज बताया गया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से जुड़े पुराने और वर्तमान सभी मामलों की एक साथ जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।
इधर, पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष पुलिस कार्रवाई को सही ठहरा रहा है और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। मामले ने अब सामाजिक और राजनीतिक रंग लेना भी शुरू कर दिया है।
फिलहाल पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। आरोपी को सरेंडर के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।