आईएमएफ के अनुसार इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर लगभग 3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि भारत इससे काफी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश की मजबूत घरेलू मांग, निजी उपभोग में निरंतर बढ़ोतरी और सेवा क्षेत्र की सुदृढ़ गतिविधियां आर्थिक विकास की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक स्थिर और मजबूत दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष और कैलेंडर वर्ष दोनों आधारों पर भारत की विकास दर का आकलन किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आईएमएफ ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि अगले वित्त वर्ष में इसके बढ़कर 6.7 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। वहीं कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए 7 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे रखता है।
आईएमएफ ने यह भी कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अपेक्षाकृत सीमित प्रभाव देखने को मिला है। कमोडिटी कीमतों, महंगाई की अपेक्षाओं और वित्तीय परिस्थितियों पर इसका असर नियंत्रित रहा है। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों के बढ़ते उपयोग ने वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में मांग को मजबूती दी है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को अतिरिक्त समर्थन मिला है।
रिपोर्ट के अनुसार चीन की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में लगभग 4.6 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जबकि अगले वर्ष इसमें और कमी आने का अनुमान है। वहीं अमेरिका की आर्थिक वृद्धि दर 2 प्रतिशत से कुछ अधिक रहने की संभावना जताई गई है। यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था भी अपेक्षाकृत धीमी गति से आगे बढ़ने का अनुमान है। इन अनुमानों के बीच भारत की विकास दर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक बनी हुई है।
भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर अन्य वैश्विक संस्थानों ने भी सकारात्मक अनुमान व्यक्त किए हैं। विश्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए 6.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए 6.6 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान बरकरार रखा है, जबकि कई वैश्विक वित्तीय संस्थानों ने भी अपने पूर्वानुमानों में सुधार किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, सेवा क्षेत्र का विस्तार, डिजिटल अर्थव्यवस्था का तेज़ विकास और बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहा निवेश भारत की आर्थिक वृद्धि को आगे भी गति दे सकता है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं तो भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है। आईएमएफ की ताजा रिपोर्ट इसी विश्वास को मजबूत करती है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था निरंतर विकास के मार्ग पर आगे बढ़ रही है।