मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शुक्ला ने उपस्वास्थ्य केंद्र बसुधा की आशा सुपरवाइजर महेश्वरी सिंह, आशा कार्यकर्ता विमला पारासर और एएनएम प्रभा बागरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। तीनों से तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
जानकारी के अनुसार, 25 अप्रैल को गिंजारा गांव में एक बच्चे में बुखार और शरीर पर दाने के लक्षण पाए गए थे। बच्चे को सिविल अस्पताल नागौद में भर्ती कराया गया था, जहां मीजल्स की जांच की गई। बाद में विभागीय समीक्षा और आईडीएसपी पोर्टल की रिपोर्ट से पता चला कि मई महीने में गांव में 15 से अधिक बच्चे इस संक्रमण की चपेट में आ चुके थे।
स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस में स्पष्ट कहा है कि यह एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो खांसने, छींकने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क से तेजी से फैलती है। ऐसे मामलों में तत्काल सूचना और सक्रिय निगरानी अनिवार्य होती है, लेकिन संबंधित कर्मचारियों ने समय पर रिपोर्टिंग नहीं की।
विभाग का कहना है कि न केवल सूचना देने में देरी हुई, बल्कि क्षेत्र में संक्रमण नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था भी कमजोर पाई गई। आईडीएसपी और आईएचआईपी पोर्टल पर भी मामलों की एंट्री समय पर नहीं की गई।
सीएमएचओ ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और संक्रामक रोगों की रिपोर्टिंग प्रणाली की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है।