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दतिया में अब क्लीनिक किराए पर देने से पहले कराना होगा वेरिफिकेशन

Fake Clinics Raid

Fake Clinics Raid: दतिया जिले में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तेज हो गई है। अब विभाग ने उन मकान और दुकान मालिकों पर भी जिम्मेदारी तय की है, जो बिना जांच-पड़ताल किए अपने भवन फर्जी डॉक्टरों को क्लीनिक (Fake Clinics Raid ) चलाने के लिए किराए पर दे रहे हैं।

नई गाइडलाइन के तहत वेरिफिकेशन जरूरी

स्वास्थ्य विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत भवन मालिकों को अब किसी भी क्लीनिक, अस्पताल या पैथोलॉजी संचालक को किराए पर जगह देने से पहले स्वास्थ्य विभाग से वेरिफिकेशन कराना अनिवार्य होगा। अगर बाद में वहां फर्जी डॉक्टर पकड़ा जाता है, तो कार्रवाई भवन मालिक पर भी होगी।

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भवन मालिकों से अपील

स्वास्थ्य विभाग के मीडिया प्रभारी डॉ. राहुल चउदा ने कहा कि जिले में झोलाछाप और कथित बंगाली डॉक्टरों का नेटवर्क (Fake Clinics Raid ) सक्रिय है। उन्होंने भवन मालिकों से अपील की है कि किसी को भी क्लीनिक या अस्पताल के लिए जगह देने से पहले सीएमएचओ कार्यालय जाकर किरायेदार की पात्रता की जानकारी लें। इससे फर्जी डॉक्टरों की संख्या पर रोक लगाई जा सकेगी।

रविवार को 4 क्लीनिकों पर छापेमारी

रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने विशेष अभियान चलाकर चार क्लीनिकों की जांच की। इनमें से दो को सील किया गया और दो को बंद कराया गया। रेलवे पुल के नीचे संचालित पंकज क्लीनिक (Fake Clinics Raid ) को इसलिए बंद कराया गया क्योंकि वह अपनी मान्य पैथी छोड़कर दूसरी चिकित्सा पद्धति से इलाज कर रहा था। वहीं ठंडी सड़क पर स्थित बंगाली डीके विश्वास का क्लीनिक भी अवैध पाया गया।

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FIR दर्ज कराने की तैयारी

सीएमएचओ डॉ. बी.के. वर्मा ने बताया कि इन क्लीनिकों (Fake Clinics Raid ) के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इस संबंध में कलेक्टर को नोटशीट भेजी गई है। उन्होंने कहा कि जिले में बिना मान्यता के इलाज करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

क्लीनिक खोलने के नियम

किसी भी चिकित्सक को क्लीनिक खोलने के लिए मान्यता प्राप्त डिग्री (एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस) होना जरूरी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में पंजीकरण कराना आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट रहे कि चिकित्सक किस पद्धति से इलाज करेगा। बिना डिग्री के इलाज करना दंडनीय अपराध है।

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