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‘कुर्बानी पर रोक बर्दाश्त नहीं’: हुमायूं कबीर के बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति..

नई दिल्ली । बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। राज्य सरकार की ओर से पशु वध को लेकर जारी किए गए नए निर्देशों के बाद अब इस मुद्दे ने सियासी रंग पकड़ लिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर के तीखे बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और कुर्बानी की परंपरा पहले की तरह जारी रहेगी।

दरअसल राज्य सरकार ने हाल ही में पशु वध नियंत्रण कानून के तहत एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के गाय और भैंस के वध पर सख्त रोक लगाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध निर्धारित नियमों और प्रमाण पत्र के बिना नहीं किया जा सकेगा। बकरीद से ठीक पहले जारी इस निर्देश के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने सरकार पर धार्मिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कबीर ने कहा कि सरकार प्रशासन चलाने तक सीमित रहे और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने से बचे।

हुमायूं कबीर ने अपने बयान में यह भी कहा कि कुर्बानी केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आस्था और परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समाज में पहले से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कदम सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए।

इस विवाद के बीच राज्य की राजनीति में माहौल और अधिक गर्म हो गया है। विपक्षी दल जहां सरकार के फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर संतुलित रवैया अपनाने की अपील की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बकरीद से पहले उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

हुमायूं कबीर पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। पिछले वर्षों में भी उनके कुछ बयान राजनीतिक बहस का कारण बने थे। हालांकि इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे मामले का असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल राज्य में प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सरकार की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की जा रही है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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