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Robot Buddha: अब AI देगा धर्म का ज्ञान, दक्षिण कोरिया से जापान तक रोबोट भिक्षुओं की बढ़ती चर्चा



नई दिल्ली। रोबोट बुद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ ऑफिस, फैक्ट्री और टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रह गया है। AI अब धर्म और आध्यात्म की दुनिया में भी अपनी जगह बना रहा है। हाल ही में दक्षिण कोरिया और जापान में रोबोट भिक्षुओं की एंट्री ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इन AI रोबोट्स ने न सिर्फ धार्मिक प्रवचन दिए, बल्कि पारंपरिक बौद्ध रीति-रिवाजों का पालन करते हुए आध्यात्मिक संदेश भी सुनाए। इसके बाद यह सवाल तेजी से उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में AI रोबोट धर्मगुरु की भूमिका निभा सकते हैं?

दक्षिण कोरिया में ‘गाबी’ बना रोबोट भिक्षु
दक्षिण कोरिया की राजधानी Seoul के प्रसिद्ध Jogyesa Temple में ‘गाबी’ नाम के ह्यूमनॉइड रोबोट भिक्षु को पेश किया गया। करीब 130 सेंटीमीटर लंबे इस AI रोबोट ने पारंपरिक बौद्ध वस्त्र पहने और बौद्ध परंपरा के अनुसार दीक्षा भी ली। रोबोट ने लोगों के सामने प्रार्थना की और कहा, “मैं बौद्ध धर्म के लिए खुद को समर्पित करता हूं।”

तकनीक और आध्यात्म के इस अनोखे संगम ने लोगों को हैरान भी किया और उत्साहित भी। कई लोग इसे धर्म को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आधुनिक तरीका मान रहे हैं।

जापान के 400 साल पुराने मंदिर में AI प्रवचन
सिर्फ दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि Japan में भी AI आधारित रोबोट भिक्षुओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है। Kyoto के एक 400 साल पुराने बौद्ध मंदिर में ‘Android Kannon’ नाम का रोबोट लोगों को धार्मिक शिक्षा और प्रवचन दे रहा है। यह रोबोट जापानी भाषा में बौद्ध धर्म की बातें समझाता है और उसके संदेशों का दूसरी भाषाओं में अनुवाद भी किया जा सकता है।

माना जा रहा है कि इन AI रोबोट्स का मकसद युवाओं को धर्म और आध्यात्म से जोड़ना है, क्योंकि आधुनिक दौर में युवा पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं।

क्या AI रोबोट बन जाएंगे भविष्य के धर्मगुरु?
AI आधारित ‘Buddharoid’ जैसे रोबोट्स को बौद्ध ग्रंथों और धार्मिक शिक्षाओं के बड़े डेटा पर ट्रेन किया गया है। ये रोबोट लोगों के सवालों के जवाब दे सकते हैं और आध्यात्मिक सलाह भी देने लगे हैं। जापान समेत कई देशों में बौद्ध भिक्षुओं की घटती संख्या भी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि रोबोट ज्ञान और जानकारी तो दे सकते हैं, लेकिन वे इंसानों जैसी भावनाएं, करुणा और आध्यात्मिक अनुभव महसूस नहीं कर सकते। AI केवल उसी डेटा और प्रोग्रामिंग के आधार पर जवाब देता है, जो उसे सिखाया गया है।

इसके बावजूद तकनीक और धर्म का यह मेल आने वाले समय में दुनिया के धार्मिक ढांचे और आध्यात्मिक तरीकों को बदल सकता है

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