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Ujjain हाईवे पर हादसा: कार्मेल स्कूल बस से टकराई बाइक, 3 लोग गंभीर घायल

नई दिल्ली। उज्जैन जिले के घट्टिया क्षेत्र में मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। National Highway पर स्थित जगोटी फंटा के पास कार्मेल स्कूल बस और एक बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई। इस हादसे में बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि बस में मौजूद सभी स्कूली बच्चे सुरक्षित हैं। आगर जा रहे थे बाइक सवारप्राप्त जानकारी के अनुसार, उज्जैन के मोहननगर निवासी कैलाश सिंह अपनी पत्नी सीमा बाई और छोटे भाई मांगीलाल के साथ बाइक से आगर की ओर जा रहे थे। जैसे ही वे जगोटी फंटा के पास पहुंचे, सामने से आ रही स्कूल बस से उनकी जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक बस के नीचे जा फंसी और तीनों सवार गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिसकर्मी ने दिखाई तत्परताघटना के समय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी दीपक यादव ने तुरंत स्थिति संभाली और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। उन्होंने बस के नीचे फंसे घायलों को बाहर निकाला और तत्काल एम्बुलेंस बुलाकर अस्पताल भिजवाया। समय पर मिली मदद से घायलों की जान बचाई जा सकी। बच्चों को नहीं आई कोई चोटहादसे के दौरान बस में कई स्कूली बच्चे सवार थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे को चोट नहीं आई। सभी बच्चे पूरी तरह सुरक्षित हैं, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जिला अस्पताल रेफर, जांच जारीघायलों को पहले घट्टिया के शासकीय अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला चिकित्सालय उज्जैन रेफर किया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

जसप्रीत बुमराह के पहले ओवर ने बदला मैच का पूरा समीकरण, मुंबई इंडियंस की बड़ी जीत में अहम भूमिका

नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए मुंबई इंडियंस और गुजरात टाइटंस के मुकाबले में मुंबई ने एक बार फिर अपनी रणनीतिक समझ और दमदार प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा। इस मैच में सबसे बड़ी चर्चा का विषय रहा जसप्रीत बुमराह को पारी का पहला ओवर देना, जिसने मैच की दिशा शुरुआती गेंदों में ही बदल दी। बुमराह ने पहली ही गेंद पर विकेट लेकर विपक्षी टीम को बड़ा झटका दिया और अपने कप्तान हार्दिक पांड्या के फैसले को पूरी तरह सही साबित कर दिया। इस निर्णय की क्रिकेट विशेषज्ञों द्वारा भी जमकर सराहना की गई और इसे एक साहसिक और प्रभावी रणनीति माना गया जिसने मुंबई इंडियंस को मजबूत शुरुआत दिलाई। पूर्व न्यूजीलैंड तेज गेंदबाज और आईपीएल में मुंबई इंडियंस का हिस्सा रह चुके मिशेल मैक्लेनाघन ने इस फैसले को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उनका मानना था कि टीम को लंबे समय से नई गेंद से प्रभाव डालने की जरूरत थी और ऐसे में बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज को शुरुआती ओवर में आक्रमण के लिए इस्तेमाल करना सही कदम था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि गुजरात टाइटंस की ओपनिंग साझेदारी पर उनकी टीम काफी निर्भर रहती है और शुरुआती विकेट गिरने से उनका पूरा मध्यक्रम दबाव में आ जाता है। इस रणनीति ने मैच में वही प्रभाव पैदा किया और गुजरात की बल्लेबाजी बिखरती नजर आई। मैक्लेनाघन के अनुसार, पिछले कुछ मैचों में बुमराह को विकेट हासिल करने में सफलता नहीं मिल रही थी, लेकिन इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट ने उन पर भरोसा बनाए रखा। यह भरोसा आखिरकार रंग लाया और बुमराह ने महत्वपूर्ण विकेट लेकर अपनी लय में वापसी के संकेत दिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक तेज गेंदबाज के लिए सिर्फ रन रोकना ही नहीं बल्कि विकेट लेना भी उतना ही जरूरी होता है क्योंकि यही असली संतोष और आत्मविश्वास देता है। लगातार विकेट न मिलने का दबाव किसी भी गेंदबाज के लिए मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन इस मैच में मिली सफलता ने बुमराह के लिए राहत का काम किया। मैच की बात करें तो मुंबई इंडियंस ने बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन करते हुए निर्धारित ओवरों में पांच विकेट पर 199 रन बनाए। टीम के लिए सबसे बड़ी पारी तिलक वर्मा ने खेली, जिन्होंने नाबाद 101 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। जवाब में गुजरात टाइटंस की टीम मुंबई की धारदार गेंदबाजी के सामने पूरी तरह संघर्ष करती नजर आई और केवल 100 रन पर सिमट गई। मुंबई इंडियंस ने यह मुकाबला 99 रन के बड़े अंतर से अपने नाम किया और अपने प्रदर्शन से एक मजबूत संदेश दिया।

निगम की सख्ती: सिंहस्थ इलाके में अवैध कब्जों पर बुलडोजर, तीन मकानों को खाली करने की मोहलत

नई दिल्ली। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है। नगर निगम ने सिंहस्थ क्षेत्र में किए गए अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार को चार निर्माणाधीन मकानों को तोड़ दिया। वहीं, तीन मकान मालिकों को स्वयं निर्माण हटाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। उन्हेल नाके के पास अवैध निर्माण पर कार्रवाईनगर निगम के जोन क्रमांक-1 के अंतर्गत सिंहस्थ क्षेत्र में, खासकर उन्हेल नाके के आसपास, कई लोगों द्वारा बिना अनुमति मकान बनाए जा रहे थे। कुछ जगहों पर निर्माण कार्य जारी था, जिसे निगम ने नियमों का उल्लंघन मानते हुए तत्काल कार्रवाई के दायरे में लिया। जेसीबी से ढहाए गए निर्माणनिगम की रिमूवल गैंग पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीनों की मदद से अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। जिन मकानों में अभी छत नहीं डाली गई थी, ऐसे चार निर्माणों को पूरी तरह गिरा दिया गया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। 20 अवैध निर्माण चिन्हित, कार्रवाई जारीनगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, सिंहस्थ क्षेत्र में कुल 20 अवैध निर्माण चिन्हित किए गए हैं। इन सभी पर चरणबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि मेले की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त रखना आवश्यक है। तीन मकान मालिकों को दो दिन की मोहलतकार्रवाई के दौरान तीन मकानों में रह रहे लोगों ने घर खाली करने के लिए समय मांगा। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निगम ने उन्हें दो दिन का समय दिया है। यदि तय समय में निर्माण नहीं हटाया गया, तो प्रशासन स्वयं कार्रवाई करेगा। प्रशासन की अपीलनगर निगम के अधिकारियों ने साफ कहा है कि सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए क्षेत्र का सुव्यवस्थित और सुरक्षित होना बेहद जरूरी है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण न करें, अन्यथा सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘इनकंप्लीट रजिस्ट्रेशन’ वॉटरमार्क हटाने के लिए VC से हुई रजिस्ट्री, Indore में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

नई दिल्ली। इंदौर में Sampada 2.0 के जरिए रजिस्टर्ड एक सेल डीड में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। मामला सिर्फ एक दस्तावेज तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे रजिस्ट्रेशन सिस्टम की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि पहले से पूर्ण रजिस्टर्ड दस्तावेज को ‘इनकंप्लीट’ दिखाकर दोबारा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से गुजारा गया, जो नियमों के विपरीत हो सकता है। क्या है पूरा मामला?जानकारी के मुताबिक, 12 दिसंबर 2025 को एक सेल डीड का पंजीयन संपदा 2.0 के माध्यम से विधिवत किया गया था। इस दस्तावेज में खरीदार इंदौर निवासी महिला और विक्रेता दुबई में रहने वाले पक्षकार थे। रजिस्ट्रेशन के दौरान सभी जरूरी औपचारिकताएं स्टाम्प ड्यूटी, फीस भुगतान, पहचान सत्यापन और दस्तावेज परीक्षण पूरी कर ली गई थीं। इसके बाद दस्तावेज को वैध रूप से रजिस्टर्ड मानते हुए रजिस्ट्रेशन नंबर और इंडेक्स भी जारी कर दिया गया।लेकिन जब इसकी प्रमाणित कॉपी निकाली गई, तो हर पेज पर “INCOMPLETE REGISTRATION” का वॉटरमार्क दर्ज मिला। यहीं से विवाद शुरू हुआ और शिकायत विभाग तक पहुंची। विभाग की सलाह और दूसरी रजिस्ट्रीशिकायत के बाद संबंधित अधिकारियों ने वॉटरमार्क हटाने में असमर्थता जताते हुए दोबारा रजिस्ट्रेशन कराने का सुझाव दिया। चूंकि विक्रेता दुबई में थे, इसलिए यह प्रक्रिया आसान नहीं थी। इसके बावजूद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और आरोप है कि संपदा सिस्टम के जरिए दस्तावेज को दोबारा प्रोसेस में डालकर नया स्लॉट बुक किया गया। इस बार खरीदार ने स्थानीय स्तर पर उपस्थिति दर्ज कराई, जबकि विक्रेता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रक्रिया पूरी की। बताया जा रहा है कि पहले से पूरी हो चुकी सभी औपचारिकताएं दोबारा कराई गईं सिर्फ वॉटरमार्क हटाने के उद्देश्य से। तारीखों के अंतर ने बढ़ाए संदेहसबसे बड़ा सवाल दस्तावेज की तारीखों को लेकर उठ रहा है। रजिस्ट्री पर मूल तारीख 12 दिसंबर 2025 अंकित है, जबकि प्रक्रिया 26 फरवरी 2026 की बताई जा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि पहले से पूर्ण दस्तावेज को दोबारा प्रक्रिया में कैसे शामिल किया गया।कानूनी जानकारों के अनुसार, Registration Act 1908 के तहत किसी भी रजिस्टर्ड दस्तावेज को बिना अदालत के आदेश के निरस्त या संशोधित नहीं किया जा सकता। ऐसे में यह मामला नियमों के उल्लंघन की आशंका को जन्म देता है। शासन तक पहुंचा मामलाइस पूरे घटनाक्रम को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों मुख्य सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग और रजिस्ट्रार कार्यालय को नोटिस भेजा गया है। नोटिस में मांग की गई है कि भविष्य में रजिस्टर्ड दस्तावेज सीधे उच्च स्तर से जारी किए जाएं, ताकि जवाबदेही तय हो सके और किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना कम हो। विभाग का पक्ष: तकनीकी गड़बड़ीवहीं, विभाग की ओर से इसे तकनीकी समस्या बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर अपग्रेडेशन के दौरान दस्तावेज की स्थिति ‘इनकंप्लीट’ दिखने लगी थी। बाद में दोनों पक्षों की सहमति से नियमानुसार दोबारा प्रक्रिया पूरी कराई गई। उनका दावा है कि पूरी कार्यवाही विधिसम्मत रही और इसमें किसी तरह की अनियमितता नहीं हुई। सिस्टम पर उठे बड़े सवालहालांकि, इस पूरे मामले ने डिजिटल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि तकनीकी कारणों से एक वैध दस्तावेज ‘अपूर्ण’ दिख सकता है, तो इससे आम नागरिकों की संपत्ति संबंधी सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों की निष्पक्ष जांच और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है।

ओले-बारिश का असर: मौसम के बदलते मिजाज से ‘कंफ्यूज’ हुए पेड़-पौधे, समय से पहले निकल रहीं पत्तियां

नई दिल्ली। Climate Change का असर अब सिर्फ तापमान या मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति के मूल चक्र को भी प्रभावित करने लगा है। भोपाल और आसपास के इलाकों में हालिया ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश ने पेड़-पौधों को ‘कंफ्यूज’ कर दिया है। स्थिति यह है कि जिन पेड़ों को इस समय पतझड़ में होना चाहिए था, उनमें नई पत्तियां और कलियां निकलने लगी हैं। विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक चक्र के साथ ‘धोखा’ मान रहे हैं, जिसका सीधा असर भविष्य की खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है। समय से पहले पत्तियां, बिगड़ा प्राकृतिक चक्रपर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में पाए जाने वाले सागौन जैसे पेड़ गर्मियों में अपने पत्ते गिरा देते हैं। लेकिन इस बार अप्रैल में हुई असामान्य बारिश के कारण उन्हें मानसून जैसा भ्रम हो गया। नतीजतन, पतझड़ के बाद भी उनमें नई पत्तियां निकल आईं। यह बदलाव सामान्य नहीं है और आने वाले समय में पौधों की वृद्धि और उत्पादन पर नकारात्मक असर डाल सकता है। खाद्यान्न उत्पादन पर मंडराया संकटविशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो सबसे बड़ा खतरा Food Security पर होगा। मौसम के असंतुलन से फसलों का चक्र प्रभावित हो रहा है। फरवरी में अचानक बढ़ी गर्मी के कारण गेहूं समय से पहले पक गया, जिससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए। वहीं, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने सब्जियों की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया, जिससे बाजार में कीमतें भी बढ़ने लगी हैं। ‘सडन क्लाइमेट चेंज’ से बढ़ी अनिश्चिततामौसम में अचानक बदलाव गर्मी में बारिश और सर्दी में गर्मी अब आम होता जा रहा है। वैज्ञानिक इसे ‘सडन क्लाइमेट चेंज’ का परिणाम मानते हैं। इसके पीछे El Niño और La Niña जैसे वैश्विक कारक भी जिम्मेदार माने जाते हैं, जो समुद्री तापमान और हवाओं के जरिए पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करते हैं। हालांकि, इनके ट्रिगर होने के कारणों पर अभी भी शोध जारी है। ग्लोबल वार्मिंग बना सबसे बड़ा खतराGlobal Warming इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके चलते आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों की बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2050 तक कई तटीय शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा सकता है। इसका असर भारत के तटीय क्षेत्रों पर भी पड़ेगा, जहां बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य और आयुर्वेद पर भी असरमौसम के इस असंतुलन का असर अब स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, हर ऋतु के अनुसार तय उपचार पद्धतियां अब प्रभावित हो रही हैं। मार्च-अप्रैल का ‘संधिकाल’ पहले से ही संवेदनशील माना जाता था, लेकिन अब बदलते मौसम के कारण मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। इम्युनिटी बढ़ाने और शरीर को अनुकूल बनाने के लिए नई उपचार पद्धतियों पर जोर दिया जा रहा है। प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणामविशेषज्ञ मानते हैं कि बढ़ता प्रदूषण, वनों की कटाई और अनियंत्रित मानवीय गतिविधियां इस असंतुलन की मुख्य वजह हैं। “जो बाहर है, वही अंदर है”—इस सिद्धांत के अनुसार प्रकृति में हो रहे बदलाव सीधे मानव जीवन और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। बेमौसम बारिश और तापमान बदलाव से पेड़-पौधों का चक्र गड़बड़ा गया है, जिससे फसल उत्पादन और फूड सिक्योरिटी पर बड़ा खतरा पैदा हो रहा है।

तिलक विवाद गरमाया: Bhopal में Lenskart स्टाफ को तिलक लगाकर जताया विरोध, बोले-‘अपमान नहीं सहेंगे’

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal के न्यू मार्केट रोशनपुरा इलाके में Lenskart के शोरूम के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। हिंदू उत्सव समिति के कार्यकर्ताओं ने कथित ड्रेस कोड विवाद को लेकर शोरूम का घेराव किया और कर्मचारियों को तिलक लगाकर तथा मंत्रोच्चार के साथ कलावा बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।  “सनातन प्रतीकों का अपमान नहीं सहेंगे”हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि देश में तिलक, कलावा और बिंदी जैसे धार्मिक प्रतीकों का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी कंपनी ने इन पर रोक लगाने की कोशिश की, तो उसका विरोध किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा कि संगठन Lenskart के बहिष्कार की अपील कर रहा है और जरूरत पड़ी तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।  कर्मचारियों का दावा- “कोई रोक नहीं”प्रदर्शन के बीच शोरूम कर्मचारियों ने इन आरोपों को खारिज किया। एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें कभी भी तिलक या कलावा पहनने से नहीं रोका गया। उनका कहना है कि नवरात्रि जैसे अवसरों पर वे खुद इन धार्मिक प्रतीकों के साथ काम पर आते रहे हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चल रही बातें उनकी व्यक्तिगत अनुभव से मेल नहीं खातीं और उन्हें कंपनी की ओर से कोई दबाव महसूस नहीं हुआ। सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा विवाददरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित पॉलिसी डॉक्यूमेंट से हुई। इसमें दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई और कई लोगों ने इसे भेदभावपूर्ण बताया।  ‘ग्रूमिंग गाइड’ पर भी उठे सवालसोशल मीडिया पर एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइड’ भी वायरल हुई, जिसमें महिला कर्मचारियों के लिए बिंदी और क्लचर पर पाबंदी की बात कही गई थी। साथ ही कलावा या रिस्ट बैंड पर भी रोक का दावा किया गया।हालांकि, इन दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन इससे विवाद और गहरा गया। कंपनी की सफाईविवाद बढ़ने के बाद Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि कंपनी सभी धर्मों और उनकी मान्यताओं का सम्मान करती है। कर्मचारियों को अपने धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है।इसके बावजूद प्रदर्शन कर रहे संगठन कंपनी के जवाब से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने विरोध जारी रखने की बात कही है।

केदारनाथ धाम: जानिए कैसे हुई इस नाम की उत्पत्ति, स्कंदपुराण में वर्णित इससे जुड़ा रहस्य

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चार धामों में से एक केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अक्षय तृतीया से चारधाम यात्रा की शुरुआत होती है और गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद अब 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। यह पवित्र धाम भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख ज्योतिर्लिंग माना जाता है। पांडवों से जुड़ी कथा, लेकिन यह पूरी कहानी नहींअक्सर केदारनाथ धाम के इतिहास को महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें पांडवों के तप और शिवजी के बैल रूप में प्रकट होने की कथा प्रचलित है। मान्यता है कि पांडवों ने शिवजी के दर्शन और आशीर्वाद के लिए तप किया था और बाद में भगवान शिव ने केदार घाटी में बैल का रूप धारण कर उन्हें दर्शन दिए थे। इसी आधार पर केदारनाथ धाम का संबंध महाभारत काल से जोड़ा जाता है। स्कंदपुराण में मिलता है केदारनाथ नाम का वास्तविक स्रोतहालांकि, केदारनाथ नाम और इसकी उत्पत्ति को लेकर एक विस्तृत वर्णन स्कंदपुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार, एक बार हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने तीनों लोकों पर अधिकार कर देवताओं को स्वर्ग से बाहर कर दिया था। पराजित होकर देवराज इंद्र अन्य देवताओं के साथ हिमालय क्षेत्र में पहुंचे और मंदाकिनी नदी के किनारे भगवान शिव की तपस्या करने लगे। इंद्र की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव महिष (भैंसे) के रूप में प्रकट हुए। उसी रूप में उन्होंने इंद्र से पूछा “के दारयामि?” यानी “किसका विनाश करूं?” यही प्रश्न आगे चलकर ‘केदार’ नाम की उत्पत्ति का आधार बना। देवताओं की विनती और दैत्यों का अंतइंद्र ने भगवान शिव को उन दैत्यों के नाम बताए जो देवताओं के लिए संकट बने हुए थे हिरण्याक्ष, सुबाहु, वक्त्रकंधर, त्रिशृंग और लोहिताक्ष। भगवान शिव ने भैंसे के रूप में ही इन दैत्यों का संहार किया, जिससे देवताओं को राहत मिली। इसके बाद भगवान शिव ने एक कुंड का निर्माण किया और इंद्र की प्रार्थना पर उसी स्थान पर केदारनाथ रूप में निवास करने का वरदान दिया। कहा जाता है कि इस स्थान पर पूजा और जल अर्पण से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उनके कुल का उद्धार होता है। मोक्ष और आस्था का केंद्रमान्यता है कि यहां किया गया पिंडदान और पूजा अत्यंत फलदायी होती है और यह स्थल मोक्ष प्राप्ति का विशेष केंद्र माना जाता है। यही कारण है कि केदारनाथ धाम को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली तीर्थों में स्थान प्राप्त है।

‘मैंने प्यार किया’ में Salman Khan नहीं, अमाल के पिता बनने वाले थे हीरो! सिंगर का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। म्यूजिक कंपोजर Amaal Mallik ने हाल ही में एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने बॉलीवुड फैंस को चौंका दिया है। उन्होंने बताया कि सुपरहिट फिल्म Maine Pyar Kiya में शुरुआत में Daboo Malik को हीरो के तौर पर कास्ट किया गया था, न कि Salman Khan को। फिल्म की शूटिंग भी कर चुके थे डब्बू मलिकएक इंटरव्यू में अमाल ने बताया कि उनके पिता डब्बू मलिक ने फिल्म के शुरुआती शेड्यूल में हीरो के रूप में शूटिंग भी कर ली थी। उस समय फिल्म के निर्देशक Sooraj Barjatya और उनके परिवार ने उन्हें यह मौका दिया था।फोटोशूट और कुछ सीन पूरे हो चुके थे, और फिल्म का काम आगे बढ़ रहा था। लेकिन इसी बीच कहानी में अचानक बड़ा मोड़ आ गया। अचानक हुई एंट्री और बदल गया फैसलाअमाल मलिक के मुताबिक, इसी दौरान एक नए चेहरे की एंट्री हुई—जो बाद में सुपरस्टार बने Salman Khan।उन्होंने बताया कि उनके पिता ने खुद उस दिन को याद करते हुए कहा था कि ऑफिस की सीढ़ियों पर उन्हें एक हैंडसम लड़का दिखा, जो बाद में फिल्म का नया हीरो बना।  बिना बताए कर दिया गया रिप्लेससबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि डब्बू मलिक को उनके रिप्लेस होने की जानकारी सीधे तौर पर नहीं दी गई। अमाल के अनुसार, उनके पिता को यह बात एक सिक्योरिटी गार्ड से पता चली।यह घटना उनके लिए काफी झटका देने वाली थी। उस समय वे मानसिक रूप से परेशान भी हुए, लेकिन हालात को स्वीकार करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था। सालों बाद सलमान को बताई थी सच्चाईअमाल ने यह भी बताया कि बाद में जब Daboo Malik ने Sohail Khan की फिल्म के लिए गाना बनाया, तब उन्होंने यह पूरी कहानी Salman Khan को खुद सुनाई थी। सलमान के करियर की बनी टर्निंग प्वाइंटगौरतलब है कि Maine Pyar Kiya सलमान खान के करियर की पहली बड़ी हिट फिल्म थी, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वे इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में गिने जाते हैं। आगे भी व्यस्त हैं सलमान खानरिपोर्ट्स के मुताबिक, Salman Khan जल्द ही नई फिल्मों में नजर आने वाले हैं, जिनमें एक बड़ा प्रोजेक्ट इस साल और एक अगली ईद पर रिलीज हो सकता है।

तेज धूप में नंगे पैर Vrindavan पहुंचे Virat Kohli-Anushka Sharma, सादगी ने जीता दिल

नई दिल्ली। क्रिकेट और बॉलीवुड की चर्चित जोड़ी Virat Kohli और Anushka Sharma एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक यात्रा को लेकर सुर्खियों में हैं। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यह कपल Vrindavan पहुंचा, जहां उन्होंने प्रसिद्ध संत Premanand Maharaj के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया।  आम श्रद्धालुओं की तरह सुना प्रवचनविराट और अनुष्का ने किसी वीआईपी की तरह नहीं, बल्कि आम भक्तों की तरह बैठकर प्रवचन सुना। दोनों पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए और Radha Krishna की आराधना में डूबे दिखे। उनकी सादगी और समर्पण ने वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया। नंगे पैर गलियों में चलते दिखे ‘विरुष्का’सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कपल को वृंदावन की गलियों में नंगे पैर चलते देखा गया। भीषण गर्मी के बावजूद दोनों ने किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं ली और पूरी श्रद्धा के साथ गुरु के दरबार तक पहुंचे।लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “सच्ची भक्ति वही है, जहां दिखावा नहीं, सिर्फ समर्पण होता है।”  राधिका वाटिका में किए दर्शनकपल राधिका वाटिका भी गया, जहां उन्होंने बड़े महाराज के दर्शन किए। जैसे ही लोग उन्हें पहचान पाए, फोटो और वीडियो बनाने की होड़ लग गई। इसके बावजूद दोनों शांत भाव से पूजा-पाठ में लगे रहे।  एयरपोर्ट पर दिखे संस्कारएक और वीडियो में अनुष्का शर्मा एक व्यक्ति के पैर छूकर आशीर्वाद लेती नजर आईं, फिर उन्हें गले लगाया। इस व्यवहार ने फैंस को खासा प्रभावित किया।बताया जा रहा है कि यह शख्स Premanand Maharaj के आश्रम से जुड़े संत हो सकते हैं, जो कपल को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे। पारंपरिक लुक में दिखा अलग अंदाजइस दौरान विराट और अनुष्का ट्रेडिशनल पहनावे में नजर आए। गले में तुलसी की माला और माथे पर तिलक लगाए दोनों पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंगे दिखे।  5 महीनों में तीसरी बार दर्शनगौरतलब है कि पिछले 5 महीनों में यह तीसरा मौका है, जब विराट-अनुष्का Premanand Maharaj के दर्शन करने पहुंचे हैं। व्यस्त शेड्यूल, खासकर आईपीएल 2026 के बीच विराट का इस तरह आध्यात्म की ओर झुकाव लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है।

ग्‍लोबल मार्केट में Crude Oil की कीमत में गिरावट… ट्रंप की चेतावनी भी बेअसर

नई दिल्ली। इंटरनेशनल मार्केट (International Market) में क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में उथल-पुथल मची हुई है. एक द‍िन पहले ज‍िस क्रूड के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही थी, अगले द‍िन उसी में तेजी देखी जा रही है. दो द‍िन पहले की ही बात है जब ईरान ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को कमर्श‍ियल श‍िप के लि‍ए पूरी तरह खोल द‍िया गया है. इसके बाद क्रूड के दाम 9 प्रत‍िशत तक टूट गए. लेक‍िन डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump.) की तरफ से जब यह बयान आया क‍ि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी झंडे वाला कार्गो जहाज को जब्‍त कर ल‍िया है. इसके बाद तेल की कीमत में तेजी देखी गई. अब फ‍िर क्रूड ऑयल के दाम में ग‍िरावट देखी जा रही है। मंगलवार सुबह क्रूड ऑयल के दाम में फ‍िर से ग‍िरावट देखी जा रही है. WTI क्रूड के रेट में 0.87 डॉलर प्रत‍ि बैरल की ग‍िरावट देखी गई और यह 86.63 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह टूटकर 95.09 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद सीजफायर के बीच क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है. आने वाले समय में तेल की कीमत में अस्थिरता बनी रहने उम्मीद है. होर्मुज बंद होने के बाद ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है. दुन‍ियाभर के ऑयल मार्केट का 20 फीसदी इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ट्रंप ने दी चेतावनीइससे पहले अमेर‍िका और ईरान की पाक‍िस्‍तान में सोमवार को होने वाली बातचीत से ईरान ने यह कहकर क‍िनारा कर ल‍िया क‍ि यूएस की लगातार बढ़ती मांगों और धमकी के आगे वह नहीं झुकेगा. इसके बाद दोनों देशों का तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. दोनों पक्षों के बीच 8 अप्रैल को शुरू हुआ सीजफायद 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है. ईरान के बातचीत से क‍िनारा क‍िये जाने से नाराज ट्रंप ने कहा कि यद‍ि सीजफायर बिना किसी समझौते के मंगलवार शाम को खत्म हो जाता है तो फिर बहुत सारे बम फटने लगेंगे। भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल का हालक्रूड के दाम में उठा-पटक का असर सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल के रेट पर देखा जाता है. प‍िछले द‍िनों क्रूड के दाम में तेजी आई तो तेल कंपन‍ियों के प्रॉफ‍िट पर सीधा असर पड़ा. इसे मैनेज करने के लि‍ए सरकार ने आम आदमी को राहत देते हुए एक्‍साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल कंपन‍ियों के दबाव को कम क‍िया. अगर क्रूड के दाम लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास बने रहे तो इसका असर आम आदमी पर देखने को म‍िल सकता है। पेट्रोल-डीजल के रेट> दिल्ली : पेट्रोल 94.77, डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर> मुंबई: पेट्रोल 103.54, डीजल 90.03 रुपये प्रति लीटर> चेन्नई: पेट्रोल 100.84, डीजल 92.48 रुपये प्रति लीटर> कोलकाता: पेट्रोल 105.45, डीजल 91.81 रुपये प्रति लीटर