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किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

नई दिल्ली । देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत देने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक बार फिर चर्चा में है। 23वीं किस्त जारी होने से पहले किसानों के लिए एक अहम संदेश सामने आया है, जिसमें साफ किया गया है कि यदि जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं तो आर्थिक सहायता मिलने में बाधा आ सकती है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल छह हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। हाल ही में 22वीं किस्त जारी होने के बाद अब सभी लाभार्थी अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त गर्मियों के बाद यानी जून के अंत या जुलाई 2026 की शुरुआत में जारी हो सकती है। लेकिन इस बार किस्त जारी होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी गई है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। इसी को देखते हुए अब पात्रता की जांच को और गहराई से किया जा रहा है। अगर किसी लाभार्थी की जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है और पहले दी गई राशि की वसूली भी संभव है। किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि तीन प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सबसे पहले ई-केवाईसी को अपडेट करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना भुगतान संभव नहीं होगा। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी वास्तव में कृषि भूमि का मालिक है। तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बैंक खाते को आधार से लिंक होना चाहिए और डीबीटी सुविधा सक्रिय होनी चाहिए, तभी राशि सीधे खाते में पहुंच सकेगी। कई किसान इन औपचारिकताओं को हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी अगली किस्त पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए सभी रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन लगातार किया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में इस समय किसान अपने दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं ताकि किसी भी तरह की गलती सुधार ली जाए। कई लोग अपने स्टेटस को भी समय-समय पर देख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका नाम लाभार्थी सूची में बना हुआ है या नहीं।

RAJKUMAR KUSHWAHA CONTROVERSY: BJP के पूर्व मंत्री को शादी समारोह में जाना पड़ा भरी, बकायदारों में पैसे के लिए घेरा; 4 घंटे बाद ठाणे में समझौता

BJP FORMER MINISTER RAJKUMAR KUSHWAHA

HIGHLIGHTS : शादी समारोह में पूर्व राज्यमंत्री को बकायादारों ने घेरा करीब 4 घंटे तक चला हंगामा पुलिस की मौजूदगी में भी पैसे की मांग जारी थाने में 10 मई तक भुगतान का आश्वासन लेन-देन विवाद और प्लॉट-बुकिंग के आरोप   RAJKUMAR KUSHWAHA CONTROVERSY: ग्वालियर। मध्य प्रदेश के भिंड में एक शादी समारोह उस समय हंगामे में बदल गया, जब पूर्व राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त बीजेपी नेता डॉ. राजकुमार कुशवाहा को बकायादारों ने घेर लिया। भारौली रोड स्थित एक मैरिज गार्डन में 27 अप्रैल की शाम आयोजित कार्यक्रम में वे मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे थे। करीब रात 9 बजे उनके पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए और उन्हें घेरकर पैसे की मांग करने लगे। आतंकवाद पर भारत का करारा संदेश: ऑपरेशन सिंदूर से बदली रणनीति, पाकिस्तान पर राजनाथ का तीखा प्रहार चार घंटे तक चला विवाद मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, दो दर्जन से अधिक महिला-पुरुष लंबे समय से अपना पैसा वापस मांग रहे थे। जैसे ही उन्हें कुशवाहा के कार्यक्रम में आने की जानकारी मिली, वे वहां पहुंच गए। हंगामा बढ़ने पर पुलिस को बुलाया गया, लेकिन बकायादार अपनी मांग पर अड़े रहे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुशवाहा को कार्यक्रम से निकलने नहीं दिया गया। सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई थाने में बातचीत के बाद मिला आश्वासन हालात नियंत्रण से बाहर होते देख पुलिस कुशवाहा को देहात थाने लेकर पहुंची, लेकिन यहां भी बकायादारों की भीड़ पहुंच गई। काफी देर तक चली बातचीत के बाद कुशवाहा ने 10 मई तक बकाया राशि चुकाने का आश्वासन दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ और मामला शांत हो सका। दर्शन से लौट रहा परिवार बना हादसे का शिकार, कार में लगी आग ने छीन ली 6 जिंदगियां लेन-देन बना विवाद की जड़ प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुशवाहा पर कई लोगों से पैसे लेने के आरोप हैं, जिनमें प्लॉट बुकिंग और जमीन खरीद से जुड़े मामले शामिल हैं। कुछ लोगों ने लाखों रुपए देने का दावा किया है। हालांकि, कुशवाहा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विरोधियों की साजिश बताया है और कहा कि मामले को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।  

आतंकवाद पर भारत का करारा संदेश: ऑपरेशन सिंदूर से बदली रणनीति, पाकिस्तान पर राजनाथ का तीखा प्रहार

नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान भारत की बदलती रणनीति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोला उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान एक ही समय आजाद हुए थे, लेकिन आज जहां भारत पूरी दुनिया में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनकर IT हब के रूप में पहचान बना चुका है, वहीं पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र बन गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इसकी सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान द्वारा लगातार आतंकवाद को समर्थन देना है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवाद केवल एक राष्ट्र-विरोधी गतिविधि नहीं है, बल्कि इसके कई आयाम हैं और इससे प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ऑपरेशनल, वैचारिक और राजनीतिक तीनों स्तरों पर एक साथ काम करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा था, जिसने देश की नई ताकत और दृढ़ इच्छाशक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां आतंकी हमलों के बाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहना पड़ता था, वहीं अब भारत निर्णायक कार्रवाई करने में विश्वास रखता है। ऑपरेशन सिंदूर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसने यह साबित कर दिया कि भारत अब किसी भी चुनौती का जवाब देने में सक्षम है। रक्षा मंत्री ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए बताया कि 22 अप्रैल 2025 को निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन केवल 72 घंटे में पूरा कर लिया गया, लेकिन इसके पीछे लंबी और सटीक रणनीतिक तैयारी थी। यदि आवश्यकता पड़ती तो भारत लंबी लड़ाई के लिए भी पूरी तरह तैयार था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं करता। देश की नीति अब पूरी तरह जीरो टॉलरेंस पर आधारित है, जिसके तहत किसी भी प्रकार की आतंकी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऑपरेशन के दौरान मिली परमाणु धमकियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ऐसे दबावों में आने वाला नहीं है और राष्ट्रहित सर्वोपरि है। वैश्विक परिदृश्य पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। यूरोप से लेकर पश्चिम एशिया तक तनाव और संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तथाकथित न्यू वर्ल्ड ऑर्डर वास्तव में एक ऐसी स्थिति बन गया है जहां कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं दिखाई देती। ऐसे समय में भारत का मजबूत और स्पष्ट रुख न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक संदेश देता है। उन्होंने अपने संबोधन के अंत में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं था, बल्कि यह भारत की नई सोच, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। यह दुनिया को यह बताने के लिए पर्याप्त है कि अब भारत हर चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी कीमत पर अपने नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा।

सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई

सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से एक चार माह की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मझगंवा ब्लॉक के सुरांगी गांव में हुई इस घटना में जांच के दौरान आंगनबाड़ी स्तर से लेकर सुपरवाइजर तक की गंभीर लापरवाही सामने आई जिसके बाद तत्काल प्रभाव से कदम उठाए गए मृत बच्ची सूर्यांशी उर्फ प्रियांशी प्रजापति अति गंभीर कुपोषण की शिकार थी। जानकारी के अनुसार वह अपने जुड़वा भाई के साथ पोषण की कमी से जूझ रही थी लेकिन समय रहते उसे आवश्यक उपचार नहीं मिल सका। जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची की स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नहीं कराया गया जो उसकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी कदम था बुखार आने पर परिजन बच्ची को मझगंवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया और उसे पीआईसीयू में भर्ती किया गया लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे Rewa मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्ची ने दम तोड़ दिया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा इस पूरे मामले में जांच के बाद प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने बच्ची की नियमित वृद्धि निगरानी नहीं की और अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में होने के बावजूद उसे NRC के लिए रेफर नहीं किया। इतना ही नहीं परिजनों को सही समय पर उचित सलाह भी नहीं दी गई और टीकाकरण में भी लापरवाही बरती गई कलेक्टर Satish Kumar S ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वहीं पर्यवेक्षण स्तर पर भी बड़ी चूक सामने आई जिसके चलते दो सुपरवाइजर दीपक विश्वकर्मा और करूणा पाण्डेय के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। दोनों को बच्चों की निगरानी और फॉलोअप की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन नहीं किया प्रशासन ने दोनों सुपरवाइजर की दो वित्तीय वर्षों तक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई केवल दंड नहीं बल्कि एक सख्त संदेश भी है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी है कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक सजगता और जवाबदेही की जरूरत है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाते तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी

दर्शन से लौट रहा परिवार बना हादसे का शिकार, कार में लगी आग ने छीन ली 6 जिंदगियां

श्योपुर । राजस्थान के अलवर जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है जिसने कई जिंदगियों को एक झटके में खत्म कर दिया। वैष्णो देवी के दर्शन कर मध्यप्रदेश लौट रहे श्रद्धालुओं की कार अचानक आग का गोला बन गई और उसमें सवार छह लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई जबकि चालक ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है यह हादसा अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के पास हुआ जहां एक अर्टिगा कार में अचानक आग भड़क उठी। कार में सवार सभी लोग मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के नागदा गांव के रहने वाले थे और वैष्णो देवी के दर्शन कर अपने घर लौट रहे थे। यात्रा का यह सफर खुशियों से भरा होना चाहिए था लेकिन कुछ ही पलों में यह मातम में बदल गया बताया जा रहा है कि कार में आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अंदर बैठे श्रद्धालु आग की लपटों में घिर गए और बुरी तरह झुलस गए। राहगीरों ने तत्काल मदद करने की कोशिश की और चालक को किसी तरह बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बाद में उसे जयपुर रेफर किया गया जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया इस हादसे में जिन लोगों की जान गई उनमें चालक विनोद के अलावा संतोष आदिवासी उनकी पत्नी बबली दयावली उनकी सास पार्वती और दो मासूम बच्चियां रागनी और साक्षी शामिल हैं। एक ही परिवार के इतने लोगों की मौत ने गांव में सन्नाटा पसार दिया है। हर आंख नम है और हर चेहरा गम से भरा हुआ है प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी माना जा रहा है हालांकि पुलिस मामले की जांच में जुटी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन मेंटेनेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबी यात्राओं के दौरान वाहनों की नियमित जांच और सावधानी बेहद जरूरी होती है ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। लेकिन जब हादसा अचानक होता है तो उसके परिणाम इतने भयावह हो सकते हैं कि पूरा परिवार ही खत्म हो जाता है श्योपुर जिले के नागदा गांव में इस घटना के बाद मातम का माहौल है। जिन घरों में कुछ समय पहले दर्शन की खुशियां थीं वहां अब केवल आंसू और सन्नाटा है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि कई सपनों के एक साथ खत्म होने की कहानी बन गया है

टेक्नोलॉजी से बदली तस्वीर-गुजरात में हजारों चोरी हुए मोबाइल लौटे, पुलिस ने बनाया रिकॉर्ड

नई दिल्ली । गुजरात में कानून-व्यवस्था और तकनीकी पुलिसिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहां राज्य पुलिस ने चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस प्रदर्शन के चलते गुजरात पुलिस ने देशभर में मोबाइल रिकवरी के मामले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जो डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस अभियान के तहत पुलिस ने हजारों मोबाइल फोन को ट्रैक कर उनके मालिकों को वापस लौटाया है। कुल मिलाकर रिकवरी दर लगभग 46 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। यह सफलता इस बात का संकेत है कि तकनीक आधारित सिस्टम से अपराध नियंत्रण और नागरिक सहायता को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। मोबाइल रिकवरी प्रक्रिया में आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और ट्रैकिंग तकनीक की अहम भूमिका रही है। गुम या चोरी हुए मोबाइल को सिस्टम में ब्लॉक करने के बाद उनकी लोकेशन ट्रेस की गई और फिर उन्हें रिकवर किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस टीमों ने लगातार निगरानी और तेजी से कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य के कई जिलों ने इस अभियान में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कुछ क्षेत्रों में रिकवरी रेट बेहद प्रभावशाली रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस अधिकारियों की सक्रियता और समन्वय ने इस उपलब्धि को संभव बनाया। इस सफलता ने यह भी साबित किया है कि डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित पुलिसिंग भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं। इससे न केवल अपराधियों पर नियंत्रण आसान हुआ है, बल्कि आम नागरिकों को भी अपने खोए हुए मोबाइल वापस पाने की नई उम्मीद मिली है।

एक बूंद पानी को तरसे गांव इछावर में बिगड़े हालात जल जीवन मिशन पर उठे सवाल

इछावर। मध्यप्रदेश के इछावर क्षेत्र में इन दिनों जल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है जहां लोगों की जिंदगी का सबसे बड़ा संघर्ष अब पानी बन चुका है। भीषण गर्मी के बीच हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गांवों में रहने वाले लोगों को रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी की तलाश करनी पड़ रही है। सीहोर जिले के आलमपुरा जमनी और बड़ी कुलास जैसे गांवों में पानी के लिए जूझ रहे लोगों की तस्वीरें किसी त्रासदी से कम नहीं हैं सुबह होते ही महिलाएं बच्चे और बुजुर्ग खाली बर्तन लेकर घर से निकल पड़ते हैं और दिनभर पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। चिलचिलाती धूप में तपती जमीन पर नंगे पांव या चप्पल पहनकर लंबी दूरी तय करना उनकी मजबूरी बन चुका है। कई बार घंटों की मशक्कत के बाद भी उन्हें साफ पानी नहीं मिल पाता और जो पानी मिलता है वह भी पीने लायक नहीं होता ग्रामीणों के अनुसार इलाके के अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं और नलों में कई दिनों से पानी नहीं आया है। पानी की कमी ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया है बल्कि स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। दूषित पानी पीने से बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है इस गंभीर स्थिति को लेकर स्थानीय समाजसेवी और किसान एम.एस. मेवाड़ा ने प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी का संकट नहीं बल्कि मानवता की परीक्षा है जहां हर किसी को मिलकर आगे आना होगा सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन भी इस क्षेत्र में बेअसर साबित होती नजर आ रही है। इस योजना का उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना था लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई दे रही है। कई गांवों में नल तो लगाए गए लेकिन उनमें पानी नहीं आ रहा जिससे लोगों की उम्मीदें टूटती जा रही हैं जल संकट का असर अब सामाजिक जीवन पर भी पड़ने लगा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है क्योंकि उन्हें भी पानी लाने में परिवार का साथ देना पड़ता है। महिलाएं घर के कामकाज के साथ साथ पानी लाने की जिम्मेदारी निभाते हुए शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से थक चुकी हैं ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए ताकि लोगों को इस भीषण संकट से राहत मिल सके। जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उनका सही तरीके से क्रियान्वयन हो और हर गांव तक पानी की पहुंच सुनिश्चित की जाए

रिजेक्शन ने बदली किस्मत-अनुष्का शर्मा की डेब्यू कहानी बनी बॉलीवुड की सबसे प्रेरक शुरुआत

नई दिल्ली । कभी-कभी जिंदगी में मिलने वाले बार-बार के रिजेक्शन ही किसी बड़ी सफलता की नींव रख देते हैं, और ऐसा ही अनुभव अनुष्का शर्मा के साथ भी जुड़ा रहा। आज वह बॉलीवुड की सफल और चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं, लेकिन उनका शुरुआती सफर आसान नहीं था। मॉडलिंग और विज्ञापन की दुनिया में कदम रखने के दौरान उन्हें कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा, जिसने उनके आत्मविश्वास की परीक्षा ली। शुरुआती दौर में अनुष्का लगातार ऑडिशन देती रहीं, लेकिन कई बार चयन नहीं हो पाया। कुछ ही समय के भीतर उन्हें एक के बाद एक रिजेक्शन झेलने पड़े, जिससे उनका मन भी कई बार निराश हुआ। इसके बावजूद उन्होंने कोशिश करना नहीं छोड़ा और नए मौकों की तलाश जारी रखी। इसी बीच उन्हें एक बड़े फिल्म प्रोजेक्ट के लिए ऑडिशन का मौका मिला। उस समय तक उन्हें अपनी सफलता को लेकर ज्यादा उम्मीद नहीं थी, क्योंकि पहले के अनुभव कुछ खास अच्छे नहीं रहे थे। वह साधारण लुक में ऑडिशन देने पहुंचीं और इसे भी एक सामान्य प्रयास ही मान रही थीं। लेकिन यहीं से उनकी किस्मत बदलने लगी। ऑडिशन के बाद उन्हें दोबारा बुलाया गया और आगे की प्रक्रिया शुरू हुई। धीरे-धीरे बात आगे बढ़ी और अंत में उन्हें फिल्म में मुख्य भूमिका के लिए चुन लिया गया। यह वही फिल्म थी जिसने उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान दी और उनका करियर पूरी तरह बदल दिया। कहा जाता है कि उनके चयन के पीछे उनकी नेचुरल पर्सनालिटी और फ्रेश अप्रोच एक बड़ी वजह थी। उस समय इंडस्ट्री को नए चेहरे की जरूरत थी और अनुष्का शर्मा इस कसौटी पर बिल्कुल फिट बैठीं। यही कारण रहा कि लगातार मिले रिजेक्शन उनके लिए बाधा नहीं बने, बल्कि एक बड़े मौके की वजह बन गए। उनकी यह कहानी आज भी यह संदेश देती है कि रिजेक्शन हमेशा अंत नहीं होता, बल्कि कई बार यह एक नई शुरुआत का रास्ता खोल देता है। अनुष्का शर्मा का सफर इस बात का उदाहरण है कि धैर्य और लगातार प्रयास कभी भी बेकार नहीं जाते।

अचानक खरीदी केंद्र पहुंचे सीएम मोहन यादव ,व्यवस्थाओं की हकीकत जानी किसानों संग चाय पर चर्चा

भोपाल/खरगोन । मध्यप्रदेश में किसान कल्याण को लेकर सरकार की सक्रियता एक बार फिर देखने को मिली जब Mohan Yadav ने अपने ही बयान को अगले ही दिन जमीन पर उतार दिया। 29 अप्रैल को उन्होंने कहा था कि वे किसी भी गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर सकते हैं और 30 अप्रैल की सुबह उन्होंने इसे सच कर दिखाया। मुख्यमंत्री अचानक Khargone जिले के कतरगांव स्थित खरीदी केंद्र पहुंच गए जहां उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और किसानों से सीधे संवाद किया निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने न केवल उपार्जन की प्रक्रिया को देखा बल्कि किसानों के साथ बैठकर चाय भी पी और उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हों। यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं था बल्कि जमीनी हकीकत को समझने और सुधार की दिशा तय करने का प्रयास था दरअसल मुख्यमंत्री इससे एक दिन पहले महेश्वर में रात्रि विश्राम पर थे और वहीं से उन्होंने संकेत दिए थे कि वे कभी भी निरीक्षण कर सकते हैं। उनके इस कदम ने यह साफ कर दिया कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है बल्कि क्रियान्वयन पर भी उतना ही जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए छाया बैठने की व्यवस्था और अन्य जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े सरकार ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए कई अहम बदलाव भी किए हैं। तौल में देरी से बचने के लिए उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है और जरूरत के अनुसार इसे और बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा चमक विहीन गेहूं की स्वीकार्यता सीमा को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है जिससे अधिक किसानों को राहत मिल सके। सूकड़े दानों की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत और क्षतिग्रस्त दानों की सीमा को भी बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है खरीदी केंद्रों पर बारदाना तौल कांटे हम्माल तुलावटी सिलाई मशीन कंप्यूटर और इंटरनेट कनेक्शन जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और साफ सफाई के लिए पंखा और छन्ना जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं ताकि किसानों की उपज का सही मूल्य मिल सके यदि आंकड़ों पर नजर डालें तो इस वर्ष गेहूं उपार्जन को लेकर किसानों की भागीदारी भी बढ़ी है। अब तक प्रदेश में 9.83 लाख किसानों ने 60.84 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेचने के लिए स्लॉट बुक किए हैं जबकि 5 लाख से अधिक किसानों से 22.70 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की जा चुकी है। पिछले वर्ष जहां 77 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया था वहीं इस बार सरकार ने 100 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है मुख्यमंत्री का यह औचक दौरा यह संदेश देता है कि सरकार किसानों के हितों को लेकर गंभीर है और हर स्तर पर निगरानी रख रही है ताकि योजनाओं का लाभ सही समय पर और सही तरीके से किसानों तक पहुंच सके

उत्तराखंड में पांच भाइयों की एक साथ शादी, 'जोझोड़े' प्रथा ने बिखेरी सांस्कृतिक चमक।

नई दिल्ली । परंपराओं का अनूठा मिलन: चकराता के एक ही मंडप में पांच भाइयों ने रचाया इतिहास, जब खुद बारात लेकर दूल्हों के द्वार पहुँचीं दुल्हनें उत्तराखंड की हसीन वादियों में बसे चकराता के खरासी गांव ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच एक संयुक्त परिवार ने अपनी जड़ों और संस्कृति को जिस खूबसूरती से दुनिया के सामने रखा है, वह काबिले तारीफ है। यहाँ एक ही छत के नीचे, एक ही दिन और एक ही मंडप में एक परिवार के पांच भाइयों का विवाह संस्कार संपन्न हुआ। यह आयोजन न केवल पारिवारिक प्रेम और एकजुटता का प्रतीक बना, बल्कि इसने क्षेत्र की उस प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को भी जीवंत कर दिया, जो सदियों से इस समाज की पहचान रही है। इस विवाह की सबसे चर्चित और आकर्षक कड़ी यहाँ की विशेष ‘जोझोड़े’ परंपरा रही। जहाँ आमतौर पर दूल्हा बारात लेकर वधू के घर जाता है, वहीं इस पारंपरिक रिवाज के अनुसार पांचों दुल्हनें स्वयं गाजे-बाजे और बारातियों के साथ दूल्हों के घर पहुंचीं। नरेंद्र, प्रदीप, प्रीतम, अमित और राहुल नामक पांचों भाइयों ने अपनी जीवनसंगिनियों के साथ देवभूमि की पावन परंपराओं के बीच सात फेरे लिए। जौनसार-बावर क्षेत्र की यह अनूठी प्रथा न केवल महिलाओं के सम्मान को दर्शाती है, बल्कि यह संयुक्त परिवार के भीतर अनुशासन और आपसी तालमेल का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी पेश करती है। आयोजन की सादगी और भव्यता का संगम देखकर हर कोई दंग रह गया। गाँव के बुजुर्गों और मेहमानों का मानना है कि सामूहिक विवाह की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है। जहाँ एक ओर यह फिजूलखर्ची को रोकता है, वहीं दूसरी ओर यह रिश्तों की मिठास और सामूहिक आनंद को कई गुना बढ़ा देता है। इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग जमा हुए थे। भाइयों की शादी के इस उत्सव के ठीक अगले दिन परिवार की बेटी का विवाह भी निर्धारित है, जिससे पूरा घर और गाँव खुशियों के दोहरे उल्लास में सराबोर नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर इस ‘यूनिक वेडिंग’ की तस्वीरें और वीडियो खूब पसंद किए जा रहे हैं। लोग इसे जौनसारी संस्कृति और लोक-परंपराओं के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम बता रहे हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर थिरकते ग्रामीण और रीति-रिवाजों का पालन करते ये पांचों जोड़े यह संदेश दे रहे हैं कि हम चाहे कितने भी आधुनिक हो जाएं, अपनी जड़ों से जुड़कर ही हम वास्तविक गौरव प्राप्त कर सकते हैं। यह सामूहिक विवाह उत्सव लंबे समय तक क्षेत्र के लोगों की यादों में एक प्रेरक गाथा के रूप में जीवित रहेगा।