केदारनाथ पैदल मार्ग पर भटके बुजुर्ग दंपती, अलर्ट पुलिस ने सकुशल किया रेस्क्यू

नई दिल्ली । केदारनाथ मंदिर यात्रा के दौरान भारी भीड़ और नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या के चलते श्रद्धालुओं के बिछड़ने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी बीच रीवा से दर्शन करने पहुंचे एक बुजुर्ग दंपती के पैदल मार्ग पर लापता होने से हड़कंप मच गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि पुलिस और प्रशासन की सक्रियता से देर रात दोनों को सकुशल ढूंढ लिया गया और उनके परिजनों से मिला दिया गया। जानकारी के अनुसार रीवा निवासी अखिलेश तिवारी और उनकी पत्नी सत्यवती बुधवार सुबह करीब 9 बजे बाबा केदार के दर्शन करने के बाद वापस लौट रहे थे। यात्रा मार्ग पर अत्यधिक भीड़ और मोबाइल नेटवर्क की समस्या के चलते दोनों अपने परिजनों से बिछड़ गए। देर रात तक उनके गौरीकुंड नहीं पहुंचने पर परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई। केदारनाथ पैदल मार्ग पर तैनात सभी सेक्टर अधिकारियों, चौकियों और सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट जारी किया गया। इसके बाद पूरी रात सर्च अभियान चलाया गया। पुलिस और प्रशासनिक टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर तलाश शुरू की ताकि दंपती का जल्द पता लगाया जा सके। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह राजवार ने बताया कि देर रात करीब 11:30 बजे दोनों बुजुर्गों को सुरक्षित ढूंढ लिया गया। इसके बाद उन्हें उनके परिजनों से मिलाया गया। दंपती के सुरक्षित मिलने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली और प्रशासन का आभार जताया। केदारनाथ यात्रा में इस समय बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिसके कारण पैदल मार्ग पर भारी भीड़ बनी हुई है। साथ ही कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने से यात्रियों को संपर्क में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन लगातार यात्रियों से अपील कर रहा है कि वे समूह से अलग न हों और यात्रा के दौरान सतर्कता बनाए रखें। इस घटना ने एक बार फिर यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और समन्वय की अहमियत को उजागर किया है। समय रहते प्रशासन की सक्रियता और पुलिस की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।
सोशल मीडिया स्टार पर गंभीर आरोप, सरेंडर के बाद बढ़ी हलचल

नई दिल्ली । रीवा में सोशल मीडिया पर ब्राह्मण समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में आरोपी यूट्यूबर मनीष पटेल के समर्थन में शुक्रवार को बड़ी संख्या में लोग एसपी कार्यालय पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इस दौरान एसपी कार्यालय परिसर में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई, हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस बल ने हालात को नियंत्रित रखा। समर्थकों का आरोप था कि पुलिस की कार्रवाई एकतरफा तरीके से की जा रही है और पूरे मामले की दोबारा समीक्षा होनी चाहिए। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि आरोपी को बिना निष्पक्ष जांच के निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई कानून और दर्ज मामलों के आधार पर की जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मनीष पटेल के खिलाफ अलग-अलग थानों में कुल छह मामले दर्ज हैं। इनमें विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में तीन प्रकरण, सिविल लाइन थाने में एक मामला और समान थाने में एक अन्य मामला शामिल है। इसके अलावा सिविल लाइन थाने में उसके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी मोबाइल लूट के एक मामले में स्थायी वारंटी भी रहा है। सिविल लाइन थाना प्रभारी विजय सिंह के अनुसार आरोपी के खिलाफ वर्ष 2016 में चोरी का मामला दर्ज हुआ था। वहीं विश्वविद्यालय थाने में उसी वर्ष चोरी, लूट और मारपीट के अलग-अलग मामलों में प्रकरण कायम किए गए थे। समान थाने में भी उसके खिलाफ चोरी का मामला दर्ज बताया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से जुड़े पुराने और वर्तमान सभी मामलों की एक साथ जांच की जा रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर भी नजर रखी जा रही है। इधर, पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष पुलिस कार्रवाई को सही ठहरा रहा है और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। मामले ने अब सामाजिक और राजनीतिक रंग लेना भी शुरू कर दिया है। फिलहाल पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। आरोपी को सरेंडर के बाद न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
ईरान ने अमेरिका डील पर पाकिस्तान को दिया स्पष्ट संकेत, कहा- आधिकारिक घोषणा के बिना कुछ तय नहीं

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया की कूटनीतिक हलचल के बीच अमेरिका और ईरान के संभावित समझौते को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच ईरान ने स्पष्ट संकेत देते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार का अंतिम समझौता अभी नहीं हुआ है और केवल अमेरिकी नेतृत्व के सार्वजनिक बयानों के आधार पर किसी डील को मान लेना उचित नहीं होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अमेरिका दौरे पर पहुंचे हैं और उनके इस दौरे को क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। रिपोर्टों में दावा किया गया था कि दोनों पक्ष युद्धविराम जैसी परिस्थितियों को स्थिर बनाए रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए किसी प्रारंभिक सहमति की दिशा में बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही समुद्री व्यापार और रणनीतिक मार्गों को लेकर भी चर्चाओं की बात सामने आई थी। हालांकि ईरान ने इन दावों पर सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी समझौते की पुष्टि केवल आधिकारिक घोषणा के बाद ही मानी जाएगी। तेहरान के करीबी सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया कि अभी बातचीत के मसौदे को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ईरान ने यह स्पष्ट किया कि केवल अमेरिकी राष्ट्रपति या किसी अन्य नेता के बयान से समझौता प्रभावी नहीं हो जाता। इस टिप्पणी को अमेरिका की ओर से लगातार दिए जा रहे आशावादी संकेतों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। उधर पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार का अमेरिका दौरा भी चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। आधिकारिक तौर पर इस यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत से जोड़ा जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसकी टाइमिंग काफी महत्वपूर्ण है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान खुद को पश्चिम एशिया की नई कूटनीतिक गतिविधियों में एक उपयोगी साझेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने और वैश्विक मंचों पर सक्रिय भूमिका दिखाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संवाद के दौरान खुद को मध्यस्थ या सहयोगी भूमिका में प्रस्तुत करना उसकी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। हालांकि ईरान के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी औपचारिक प्रक्रिया में अंतिम निर्णय और घोषणा तेहरान की सहमति से ही होगी। इस बीच अमेरिका ने ईरान से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना भी जारी रखा है। कई कंपनियों, व्यक्तियों और समुद्री कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं। इन कार्रवाइयों का उद्देश्य ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों के बीच यह घटनाक्रम आने वाले समय में अमेरिका, ईरान और पाकिस्तान के संबंधों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है। फिलहाल सभी पक्ष सतर्क बयानबाजी के साथ अपने रणनीतिक हितों को साधने की कोशिश में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
मौसम साफ फिर भी शहर अंधेरे में डूबा, MPEB ऑफिस बंद मिला

नई दिल्ली । रीवा शहर में गुरुवार रात बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। नौतपा की भीषण गर्मी और करीब 44 डिग्री तापमान के बीच घंटों बिजली गुल रहने से लोगों की रात भारी परेशानी में गुजरी। हालात इतने खराब रहे कि नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पांडेय के बंगले और उनके मोहल्ले तक में रात 10 बजे से गई बिजली सुबह तक वापस नहीं आई। उमस और गर्मी से परेशान लोग पूरी रात छतों, गलियों और सड़कों पर समय बिताने को मजबूर हो गए। खास बात यह रही कि शहर में कहीं भी आंधी या तूफान जैसी स्थिति नहीं थी, फिर भी बिजली आपूर्ति ठप रही। शहर के पड़रा, समान, ढेकहा, अमहिया, सिरमौर चौराहा, बिछिया, विश्वविद्यालय रोड और पुरानी बस्ती सहित कई इलाकों में या तो बार-बार ट्रिपिंग होती रही या पूरी रात बिजली सप्लाई बहाल ही नहीं हो सकी। लगातार कटौती के कारण लोगों के घरों में लगे इन्वर्टर भी जवाब दे गए। बिजली नहीं होने से पानी की मोटरें बंद रहीं और सुबह तक कई इलाकों में जल संकट की स्थिति बन गई। लोगों को पीने के पानी तक के लिए परेशान होना पड़ा। बिजली संकट के बीच विद्युत विभाग का रवैया भी लोगों के गुस्से का कारण बना। उपभोक्ता लगातार हेल्पलाइन नंबर पर फोन करते रहे, लेकिन वहां से सिर्फ संबंधित जेई से संपर्क करने की सलाह दी जाती रही। लोगों का आरोप है कि संबंधित जूनियर इंजीनियर का मोबाइल पूरी रात स्विच ऑफ रहा। रात करीब 12 बजे जब मीडिया टीम ने MPEB कार्यालय का जायजा लिया तो वहां ताला लगा मिला। मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था। इससे नाराज लोग दफ्तर के बाहर ही विभागीय अधिकारियों के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते नजर आए। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समान निवासी राजेश तिवारी ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण पूरा परिवार रातभर छत पर बैठा रहा। अमहिया निवासी पूजा मिश्रा ने कहा कि उमस से छोटे बच्चे पूरी रात रोते रहे, लेकिन बिजली बहाल नहीं हुई। ढेकहा के मोहम्मद आरिफ का कहना है कि नौतपा जैसी स्थिति में इतनी लंबी बिजली कटौती लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। वहीं बिछिया निवासी संगीता पटेल ने बताया कि रातभर बिजली न होने के कारण सुबह पानी की मोटर नहीं चल सकी और घरों में पानी खत्म हो गया। अब तक इस पूरे मामले में बिजली विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। दूसरी तरफ नागरिकों का कहना है कि जब नगर निगम अध्यक्ष के इलाके तक में पूरी रात अंधेरा छाया रहा, तो आम लोगों की परेशानी का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। शहरवासियों ने बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अक्षय कुमार से कंगना रनौत तक, जून में बड़े पर्दे पर छाएंगे कई सितारे

नई दिल्ली । साल 2026 की शुरुआत से ही सिनेमाघरों में फिल्मों का शानदार दौर देखने को मिला है। कई बड़ी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कमाई करते हुए दर्शकों का दिल जीता। मई महीने में भी रोमांस, एक्शन और ड्रामा से भरपूर कई फिल्मों ने एंटरटेनमेंट का तगड़ा डोज दिया। अब जून का महीना भी सिनेप्रेमियों के लिए बेहद खास होने जा रहा है, क्योंकि इस महीने एक नहीं बल्कि कई बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्में रिलीज होने को तैयार हैं। कॉमेडी से लेकर लव स्टोरी और देशभक्ति तक हर जॉनर की फिल्म दर्शकों को देखने को मिलेगी। सबसे पहले 5 जून 2026 को रिलीज होगी है जवानी तो इश्क होना है। मशहूर निर्देशक डेविड धवन के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक मजेदार कॉमेडी एंटरटेनर बताई जा रही है। फिल्म में वरुण धवन, मृणाल ठाकुर और पूजा हेगड़े मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। इनके अलावा मौनी रॉय, मनीष पॉल, जिमी शेरगिल, राकेश बेदी और चंकी पांडे भी अहम किरदार निभाते दिखेंगे। फिल्म की कहानी जस्स नाम के युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे एक साथ दो लड़कियों से प्यार हो जाता है। भारत भाग्य विधाता भी 12 जून 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। देशभक्ति से भरपूर इस फिल्म को मनोज तापड़िया ने लिखा और निर्देशित किया है। फिल्म में कंगना रनौत लीड रोल में दिखाई देंगी। उनके साथ गिरिजा ओक, स्मिता तांबे और अन्य कलाकार भी नजर आएंगे। इसी दिन यानी 12 जून को मैं वापस आऊंगा भी रिलीज होगी। निर्देशक इम्तियाज अली की यह रूहानी लव स्टोरी पहले से ही चर्चा में बनी हुई है। फिल्म में वेदांग रैना और शरवरी मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। वहीं दिलजीत दोसांझ और नसीरुद्दीन शाह भी अहम किरदारों में दिखाई देंगे। 19 जून 2026 को रिलीज होगी कॉकटेल 2, जिसका दर्शकों को लंबे समय से इंतजार है। निर्देशक होमी अदजानिया की इस फिल्म में शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। फिल्म की कहानी लव ट्रायंगल पर आधारित बताई जा रही है। जून महीने का सबसे बड़ा धमाका 26 जून को होने वाला है, जब वेलकम टू द जंगल रिलीज होगी। निर्देशक अहमद खान की इस मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, रवीना टंडन, दिशा पटानी, लारा दत्ता, जैकलिन फर्नांडिस, परेश रावल, अरशद वारसी, जॉनी लीवर और राजपाल यादव समेत 20 से ज्यादा कलाकार एक साथ नजर आने वाले हैं। जून 2026 में रिलीज होने वाली ये फिल्में दर्शकों को भरपूर मनोरंजन देने के लिए तैयार हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सबसे बड़ा धमाका करती है।
सिद्धारमैया के बाद डीके शिवकुमार पर दांव, कांग्रेस संगठन के सबसे मजबूत चेहरे के हाथों में होगी जिम्मेदारी

नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लंबे समय से संगठन की रीढ़ माने जाने वाले डीके शिवकुमार अब सत्ता के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र तक पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और माना जा रहा है कि पार्टी अब राज्य की कमान अपने सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली रणनीतिकार के हाथों में सौंप सकती है। कांग्रेस संगठन में डीके शिवकुमार की पहचान केवल एक वरिष्ठ नेता के रूप में नहीं बल्कि ऐसे संकटमोचक के रूप में रही है, जिन्होंने कई बार कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में पार्टी को संभालने में निर्णायक भूमिका निभाई। पिछले दो दशकों में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई राजनीतिक संकटों के दौरान उन्होंने संगठन को एकजुट रखने, विधायकों को साथ बनाए रखने और चुनावी रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व के भीतर उनकी विश्वसनीयता लगातार मजबूत होती गई। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राज्य की राजनीति के शीर्ष तक पहुंचने वाले डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर संघर्ष, संगठन क्षमता और संसाधन प्रबंधन का उदाहरण माना जाता है। छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले शिवकुमार ने धीरे-धीरे अपने प्रभाव का विस्तार किया और वोक्कालिगा समुदाय के बीच मजबूत जनाधार तैयार किया। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के भीतर भी अपनी ऐसी स्थिति बनाई, जहां संगठनात्मक फैसलों में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाने लगी। कर्नाटक में कांग्रेस की हालिया चुनावी सफलता में भी उनकी भूमिका को निर्णायक माना गया था। एक तरफ सामाजिक और कल्याणकारी राजनीति का चेहरा सामने था, तो दूसरी ओर चुनावी प्रबंधन, संसाधनों के समन्वय और संगठन को सक्रिय रखने की जिम्मेदारी शिवकुमार के कंधों पर थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी यही क्षमता अब उन्हें मुख्यमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर रही है। हालांकि उनका राजनीतिक सफर विवादों और चुनौतियों से भी अछूता नहीं रहा है। वित्तीय मामलों और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को लेकर वह लगातार विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने हर राजनीतिक संकट के बाद खुद को पहले से अधिक मजबूत तरीके से स्थापित किया। समर्थकों के बीच उनकी छवि ऐसे नेता की बन चुकी है जो दबाव की परिस्थितियों में भी संगठन के लिए खड़े रहते हैं। कांग्रेस के लिए यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन नहीं बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी ऐसे समय में राज्य की कमान ऐसे नेता को सौंपने की तैयारी में दिखाई दे रही है, जो जातीय समीकरणों, संगठनात्मक ताकत, संसाधन प्रबंधन और चुनावी राजनीति की जमीनी समझ को एक साथ साधने की क्षमता रखता हो। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद संभालते हैं तो कर्नाटक की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है। यह दौर संगठन आधारित नेतृत्व, मजबूत राजनीतिक नियंत्रण और आक्रामक चुनावी रणनीति के लिए जाना जा सकता है। आने वाले समय में यह भी साफ होगा कि क्या उनकी राजनीतिक शैली राज्य में कांग्रेस को लंबे समय तक स्थिरता और मजबूती दे पाएगी।
चुनावी झटकों के बाद मैदान में उतरे अभिषेक बनर्जी, हिंसा प्रभावित कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर साधेंगे संगठन

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद एक बार फिर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। चुनावी झटकों और लगातार बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी अब दोबारा सक्रिय राजनीति में उतरते नजर आ रहे हैं। लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने के बाद उनका मैदान में लौटना राज्य की राजनीति में नए संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल सामान्य जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं बल्कि पार्टी संगठन और कैडर को फिर से मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से अभिषेक बनर्जी की सार्वजनिक गतिविधियां काफी सीमित हो गई थीं। वह मुख्य रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन अब उन्होंने सीधे पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच जाने का निर्णय लिया है। उनके कार्यक्रमों का केंद्र वे कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं, जो चुनाव बाद हिंसा की घटनाओं से प्रभावित हुए हैं। इसे तृणमूल कांग्रेस की ओर से संगठनात्मक एकजुटता और राजनीतिक संदेश दोनों के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल के घटनाक्रमों ने अभिषेक बनर्जी की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित किया है। चुनाव के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव, संपत्तियों से जुड़े प्रशासनिक नोटिस और एक चुनावी भाषण को लेकर दर्ज मामला लगातार चर्चा में बने हुए हैं। हालांकि अदालत से उन्हें अस्थायी राहत मिली है, लेकिन इन घटनाओं ने राजनीतिक वातावरण को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच जाकर संवाद स्थापित करना तृणमूल कांग्रेस के लिए संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर भी कई स्तरों पर असंतोष और पुनर्समीक्षा की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में वरिष्ठ नेतृत्व की सक्रियता कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और संगठन को एकजुट रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। राज्य की राजनीति में चुनाव बाद हिंसा लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है और विपक्ष लगातार इसे लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाता रहा है। अब जब तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व स्वयं प्रभावित कार्यकर्ताओं से मिलने की रणनीति अपना रहा है, तो यह राजनीतिक संदेश देने की कोशिश भी मानी जा रही है कि पार्टी अपने समर्थकों के साथ खड़ी है। इसके साथ ही कानूनी चुनौतियां भी अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक चुनावी बयान को लेकर उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। अदालत ने फिलहाल राहत जरूर दी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक गर्मी को और बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। तृणमूल कांग्रेस जहां संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में जुटी है, वहीं विपक्ष भी सरकार और पार्टी नेतृत्व पर लगातार हमलावर बना हुआ है। ऐसे माहौल में अभिषेक बनर्जी की सक्रियता राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दहेज के लिए मानसिक प्रताड़ना को सुप्रीम कोर्ट ने बताया गंभीर सामाजिक अपराध, आरोपी की याचिका खारिज

नई दिल्ली । दहेज प्रताड़ना और विवाह के बाद महिलाओं के साथ होने वाले मानसिक उत्पीड़न को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर गंभीर चिंता व्यक्त की है। देश की सर्वोच्च अदालत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि शादी के बाद बहू और उसके परिवार का अपमान करना समाज में एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है और ऐसे मामलों में सख्त संदेश देना बेहद जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवाह किसी परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का माध्यम नहीं बन सकता। मामला छत्तीसगढ़ के एक दहेज मृत्यु प्रकरण से जुड़ा था, जिसमें एक महिला की शादी के कुछ वर्षों के भीतर ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। जांच और अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था और उसके परिवार पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा था। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि महिला के परिवार को अपमानजनक शब्द कहे गए और अतिरिक्त धन तथा वाहन की मांग लगातार जारी रही। सुनवाई के दौरान पीठ ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि समाज में पढ़े-लिखे और जागरूक लोग भी दहेज जैसी कुप्रथा में शामिल पाए जाते हैं। अदालत ने कहा कि शादी जैसे पवित्र सामाजिक संबंध को लालच और अपमान से जोड़ना बेहद चिंताजनक है। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि लोग विवाह करने के बाद लड़की और उसके परिवार को अपमानित क्यों करते हैं। अदालत के अनुसार यह केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक और नैतिक समस्या भी है, जिस पर कठोर दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। मेडिकल रिपोर्ट में महिला की मौत फांसी लगने से दम घुटने के कारण बताई गई थी, लेकिन अदालत ने माना कि लगातार मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का उसकी मौत से सीधा संबंध था। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में प्रत्यक्ष हिंसा के साथ-साथ मानसिक उत्पीड़न को भी गंभीरता से देखने की आवश्यकता है, क्योंकि यह पीड़ित महिला को गहरे तनाव और असुरक्षा की स्थिति में पहुंचा देता है। इस मामले में निचली अदालत और उच्च न्यायालय पहले ही आरोपी पक्ष को दोषी ठहरा चुके थे। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सजा को चुनौती दी गई थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तथ्यों और परिस्थितियों से प्रताड़ना के आरोप स्पष्ट रूप से साबित होते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में केवल तकनीकी आधारों पर राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि दहेज प्रताड़ना के मामलों में समाज को स्पष्ट संकेत मिलना चाहिए कि महिलाओं और उनके परिवारों का अपमान स्वीकार नहीं किया जाएगा। न्यायालय की इस टिप्पणी को महिलाओं की सुरक्षा और दहेज विरोधी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कानून के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और पारिवारिक सोच में बदलाव भी बेहद जरूरी है ताकि विवाह संस्था सम्मान और समानता के आधार पर मजबूत हो सके।
नीट यूजी 2026 फीस वापसी प्रक्रिया फिर शुरू, लाखों छात्रों को बैंक जानकारी अपडेट करने का अंतिम मौका

नई दिल्ली । प्रवेश परीक्षा स्नातक यानी NEET UG 2026 से जुड़े लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत सामने आई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा शुल्क वापसी प्रक्रिया के तहत बैंक खाते की जानकारी जमा करने की समयसीमा को बढ़ाकर 22 जून 2026 तक कर दिया है। यह फैसला उन उम्मीदवारों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, जिन्होंने अब तक अपनी बैंक डिटेल्स पोर्टल पर अपडेट नहीं की थीं। परीक्षा रद्द होने के बाद शुरू हुई रिफंड प्रक्रिया में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए हैं और एजेंसी अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी पात्र उम्मीदवार शुल्क वापसी से वंचित न रहे। इस वर्ष मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित NEET UG परीक्षा देशभर में 3 मई को संपन्न हुई थी। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने पर इसे रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा का रूप ले लिया। जांच एजेंसियों द्वारा मामले की जांच जारी है और अब परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। पुनर्परीक्षा 21 जून को प्रस्तावित है और इसके लिए अभ्यर्थियों से किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा शुल्क जमा किया था, उनकी राशि वापस की जाएगी। इसी प्रक्रिया के तहत छात्रों से उनके बैंक खाते से संबंधित जानकारी मांगी गई थी ताकि रिफंड सीधे खाते में भेजा जा सके। एजेंसी ने मई महीने में सीमित समय के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर बैंक विवरण अपडेट करने की सुविधा उपलब्ध कराई थी, जिसके दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी जानकारी जमा की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक लगभग 13 लाख अभ्यर्थी अपने बैंक खाते की जानकारी अपडेट कर चुके हैं। हालांकि परीक्षा के लिए पंजीकरण कराने वाले कुल उम्मीदवारों की संख्या लगभग 23 लाख रही थी, जिसके कारण बड़ी संख्या में ऐसे छात्र अभी भी बाकी हैं जिन्होंने आवश्यक विवरण जमा नहीं किया है। इसी स्थिति को देखते हुए एजेंसी ने अंतिम अवसर के रूप में समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एक बार बैंक विवरण जमा करने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने खाते की जानकारी सावधानीपूर्वक भरें ताकि रिफंड प्रक्रिया में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या या देरी न हो। नीट यूजी परीक्षा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है और हर वर्ष लाखों छात्र इसमें हिस्सा लेते हैं। इस बार परीक्षा रद्द होने और दोबारा आयोजन की घोषणा ने छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि शुल्क वापसी और पुनर्परीक्षा को लेकर एजेंसी द्वारा लगातार जारी किए जा रहे निर्देशों से स्थिति को व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आने वाले समय में परीक्षा संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
बीजेपी ने महिला नेतृत्व पर जताया भरोसा, अर्चना गुप्ता बनीं प्रदेश अध्यक्ष

नई दिल्ली । Bharatiya Janata Party ने हरियाणा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए डॉ. अर्चना गुप्ता को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले के साथ करीब चार दशक बाद हरियाणा बीजेपी को दूसरी महिला प्रदेश अध्यक्ष मिली हैं। इससे पहले कमला वर्मा ने 1980 से 1983 तक पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। ऐसे में अर्चना गुप्ता की नियुक्ति को महिला नेतृत्व और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। डॉ. अर्चना गुप्ता पेशे से डॉक्टर हैं और लंबे समय से बीजेपी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। वह मूल रूप से हरियाणा के पानीपत की रहने वाली हैं। पार्टी में उनकी पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता और जमीनी नेता के रूप में रही है। प्रदेश अध्यक्ष बनने से पहले वह हरियाणा बीजेपी में महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इसके अलावा वह जिला बीजेपी अध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर भी काम कर चुकी हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने गुरुवार को हरियाणा समेत दिल्ली, पंजाब और त्रिपुरा इकाइयों के नए प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा की। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार हरियाणा में अर्चना गुप्ता, पंजाब में केवल सिंह ढिल्लों, त्रिपुरा में अभिषेक देबरॉय और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। अर्चना गुप्ता ने हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष के रूप में मोहन लाल बड़ौली की जगह ली है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह संगठन को बूथ स्तर तक और मजबूत बनाने के लिए पूरी मेहनत करेंगी। उन्होंने कहा कि बीजेपी महिलाओं को बराबरी का भागीदार मानती है और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। पानीपत में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अर्चना गुप्ता ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उनके सशक्तीकरण के लिए काम करना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। उन्होंने महिला आरक्षण अधिनियम के मुद्दे पर विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिलाओं को आरक्षण देने की दिशा में कई बार रुकावट पैदा की और महिलाओं के साथ विश्वासघात किया। नई प्रदेश अध्यक्ष ने हरियाणा बीजेपी को मजबूत बनाने में योगदान देने वाले नेताओं का भी धन्यवाद किया। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ और सुभाष बराला के कार्यों की सराहना की। अर्चना गुप्ता ने कहा कि उनका मुख्य लक्ष्य संगठन को और मजबूत करना तथा महिलाओं और युवाओं को पार्टी से जोड़ना रहेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी ने अर्चना गुप्ता को आगे कर हरियाणा में महिला वोट बैंक और संगठनात्मक मजबूती दोनों पर बड़ा दांव खेला है। आने वाले समय में उनकी नेतृत्व क्षमता पार्टी की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।