जॉइंट डायरेक्टर की संपत्तियों पर लोकायुक्त की नजर: सूदखोरी, चेक बाउंस और करोड़ों के निवेश की जांच तेज

इंदौर इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल के खिलाफ चल रही आय से अधिक संपत्ति की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। लोकायुक्त पुलिस की छापामार कार्रवाई के बाद अब ऐसे तथ्य सामने आ रहे हैं, जिनसे जांच का दायरा और बढ़ सकता है। कंडवाल के परिवार के नाम पर करोड़ों रुपए की संपत्तियां, निवेश और व्यवसाय मिलने के साथ-साथ सूदखोरी और चेक बाउंस मामलों को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। लोकायुक्त पुलिस ने हाल ही में कंडवाल के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान उनकी पत्नी शारदा कंडवाल, पुत्रवधु तनु और हर्षिता के नाम पर कई संपत्तियों और निवेश का पता चला। शुरुआती जांच में इन संपत्तियों का मूल्य करोड़ों रुपए में आंका गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह संपत्ति उनकी ज्ञात आय की तुलना में काफी अधिक हो सकती है। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कंडवाल के पुत्र अभिषेक के नाम से वर्ष 2022 में रमेश मलकानी के खिलाफ चेक बाउंस के छह मामले दर्ज कराए गए थे। ये मामले न्यायालय तक पहुंचे और बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। हालांकि इन मामलों से जुड़े वित्तीय लेनदेन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार जिन चेकों को लेकर मुकदमे दर्ज हुए थे, वे केसरबाग रोड स्थित एक संपत्ति के सौदे से जुड़े बताए जाते हैं। बाद में समझौते के तहत राशि प्राप्त होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया था। लेकिन जांच एजेंसियां अब यह जानने का प्रयास कर सकती हैं कि उस समय पढ़ाई कर रहे अभिषेक के पास इतनी बड़ी रकम कहां से आई और संपत्ति निवेश के लिए धन का स्रोत क्या था। जानकारों का कहना है कि यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि निवेश की राशि वास्तव में लक्ष्मी नारायण कंडवाल द्वारा उपलब्ध कराई गई थी, तो बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी गहन जांच हो सकती है। लोकायुक्त टीम इस बात का भी परीक्षण कर सकती है कि कहीं परिवार के नाम का उपयोग कर संपत्तियां तो नहीं बनाई गईं। कंडवाल ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1986 में ग्राम सुनाला के माध्यमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में की थी। इसके बाद वे विभिन्न पदों पर पदोन्नत होते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग में संयुक्त संचालक के पद तक पहुंचे। नौकरी के दौरान उनकी पदस्थापना नीमच, खरगोन, उज्जैन, जबलपुर, भोपाल, रीवा सहित कई जिलों में रही। लोकायुक्त जांच में यह भी सामने आया है कि उनके पुत्र अभिषेक और पवन के नाम पर एक सुपर मार्केट संचालित है, जिसमें लाखों रुपए का निवेश किया गया है। इसके अलावा एक आधुनिक और आलीशान जिम की जानकारी भी सामने आई है, जहां अत्याधुनिक फिटनेस उपकरण और सुविधाएं उपलब्ध हैं। इन निवेशों और व्यवसायों के वित्तीय स्रोतों की भी जांच की जा रही है। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। सभी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और वित्तीय लेनदेन का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट राज्य शासन को भेजी जाएगी। साथ ही विभागीय कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को भी पत्र भेजा जा सकता है। इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है और अब सभी की नजर लोकायुक्त की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
बुढ़वा मंगल पर बजरंगबली को बेहद प्रिय हैं ये पांच विशेष चीजें, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से राहत मिलने की है मान्यता

नई दिल्ली । उत्तर भारत की सनातन धार्मिक परंपराओं में ज्येष्ठ महीने के मंगलवार का एक बेहद विशिष्ट और पावन महत्व माना गया है, जिन्हें आम बोलचाल में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से पुकारा जाता है। ज्येष्ठ महीना अब अपने समापन की ओर अग्रसर है और आज यानी १६ जून २०२६ को इस पावन महीने का सातवां बड़ा मंगल पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस साल ज्येष्ठ मास के दौरान अधिकमास का विशेष संयोग बनने के कारण कुल आठ बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जिसके चलते आज के सातवें बड़े मंगल का महत्व ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कहीं अधिक बढ़ गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशेष दिन पर व्रत रखने और पूरी निष्ठा से संकटमोचन की उपासना करने से बजरंगबली अपने भक्तों पर अटूट कृपा बरसाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार, बड़े मंगल के दिन की गई पूजा न केवल जीवन के संकटों को टालती है, बल्कि इससे कुंडली में मंगल ग्रह की स्थिति भी बेहद मजबूत और शुभ होती है। इसके अतिरिक्त, जो जातक वर्तमान समय में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के बुरे दौर और कष्टों से गुजर रहे हैं, उनके लिए भी आज के दिन हनुमान जी की आराधना करना अचूक और राहत देने वाला माना गया है। इस पावन अवसर पर पूजा और आरती के लिए शास्त्रों में कुछ विशेष और कल्याणकारी मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं, जिनमें सुबह ०५:४५ बजे से ०७:२५ बजे तक अमृत काल का श्रेष्ठ समय रहा, जबकि दोपहर ११:५० बजे से १२:४५ बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा और शाम को संध्या आरती के लिए ०६:३० बजे से ०७:४५ बजे तक का समय सर्वश्रेष्ठ माना गया है। उत्तर भारत, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और उसके आस-पास के तमाम क्षेत्रों में बड़े मंगल के अवसर पर एक बहुत ही भव्य सांस्कृतिक व धार्मिक नजारा देखने को मिलता है। इस दिन जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन करने, भीषण गर्मी के इस मौसम में राहगीरों को ठंडा शरबत व पानी पिलाने तथा सामूहिक रूप से सुंदरकांड का पाठ करने की एक लंबी और गौरवशाली परंपरा रही है। सुबह से ही तमाम प्रमुख हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और कीर्तन के कार्यक्रम अनवरत रूप से चल रहे हैं। धर्म-शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन बजरंगबली को उनकी कुछ बेहद प्रिय चीजें अर्पित करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं स्वतः ही दूर हो जाती हैं। शास्त्रों में वर्णित इन पांच प्रमुख चीजों में सबसे पहला स्थान लाल फूलों का है, जिसके तहत हनुमान जी को गुड़हल या गुलाब के लाल पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। दूसरी प्रमुख सामग्री चोला है, जिसमें चमेली के तेल में केसरिया सिंदूर मिलाकर प्रभु के चरणों से शुरुआत करते हुए चोला चढ़ाया जाता है और अंत में वही सिंदूर माथे पर लगाया जाता है। इसके अलावा, बजरंगबली को बनारसी पान पर कत्था, गुलकंद, सौंफ और इलायची रखकर मीठे पान का बीड़ा अर्पित करने से जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ध्यान रहे कि इस पान में चूना या सुपारी बिल्कुल न हो। चौथी और पांचवीं चीज के रूप में हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू तथा आटे, शुद्ध घी और गुड़ से बने पारंपरिक चूरमे या मीठी रोटी का भोग लगाने से घर में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।
अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की ब्लॉकबस्टर जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर रचा था इतिहास, इन ९ फिल्मों में साथ आकर दर्शकों को बनाया दीवाना

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे प्रतिष्ठित और स्क्रीन पर तहलका मचाने वाली जोड़ियों का जिक्र होता है, तो अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। सत्तर और अस्सी के दशक में इन दोनों दिग्गज कलाकारों ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा चमत्कारी तालमेल दिखाया कि डिस्ट्रीब्यूटर्स और दर्शकों के बीच यह माना जाने लगा था कि जिस फिल्म में ये दोनों साथ हैं, उसका सुपरहिट होना तय है। इस ब्लॉकबस्टर जोड़ी की लोकप्रियता का आलम यह था कि इनकी एक कल्ट क्लासिक फिल्म रिलीज के बाद लगातार पांच सालों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी, जो अपने आप में एक अटूट कीर्तिमान है। इन दोनों महानायकों ने मुख्य भूमिकाओं से लेकर खास कैमियो रोल्स तक, कुल ९ फिल्मों में एक साथ स्क्रीन शेयर कर सिल्वर स्क्रीन पर अपनी दोस्ती और अभिनय का लोहा मनवाया। इस बेमिसाल जोड़ी के करियर और हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल १९७५ में आई फिल्म ‘शोले’ एक मील का पत्थर साबित हुई। निर्देशक रमेश सिप्पी की इस एक्शन-ड्रामा फिल्म में जय और वीरू के किरदारों में अमिताभ और धर्मेंद्र ने जिगरी दोस्ती की ऐसी अनूठी मिसाल पेश की, जो आज आधी सदी बीत जाने के बाद भी मुहावरा बनी हुई है। यह फिल्म न केवल उस दौर की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी, बल्कि मुंबई के मिनर्वा थिएटर में लगातार पांच सालों तक चलकर इसने इतिहास रच दिया। इसी साल इस सुपरहिट जोड़ी की एक और क्लासिक फिल्म ‘चुपके चुपके’ रिलीज हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी यह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म बंगाली सिनेमा की रीमेक थी। फिल्म में दोनों की कॉमिक टाइमिंग कमाल की थी और एसडी बर्मन के संगीत से सजे इसके गाने आज भी चाव से सुने जाते हैं। एक्शन और कॉमेडी के बाद इस जोड़ी ने साल १९८० में आई फिल्म ‘राम बलराम’ के जरिए थ्रिलर जॉनर में अपनी धाक जमाई। विजय आनंद द्वारा निर्देशित इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में दोनों ने ऐसे दो भाइयों का किरदार निभाया था, जिनका पालन-पोषण धोखे से उनके माता-पिता के हत्यारे चाचा ने किया था। इसके अलावा यह जोड़ी ऋषिकेश मुखर्जी की ही एक और कल्ट फिल्म ‘गुड्डी’ में भी एक साथ नजर आई थी। हालांकि इस फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेत्री जया बच्चन की थी, लेकिन धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने फिल्म इंडस्ट्री की असलियत दिखाते हुए इसमें बेहद प्रभावी कैमियो रोल किए थे, जिसने फिल्म की कहानी को एक नया आयाम दिया था। सिल्वर स्क्रीन पर नए प्रयोग करने के मामले में भी यह जोड़ी पीछे नहीं रही। साल १९७७ में रिलीज हुई फिल्म ‘चरणदास’ एकमात्र ऐसी अनूठी फिल्म है, जिसमें अमिताभ और धर्मेंद्र दोनों ने कव्वाली गायकों के रूप में एक विशेष और बेहद दिलचस्प भूमिका निभाई थी। आशा भोसले और मुकेश की आवाज में सजे इस फिल्म के कव्वाली गीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। इसके बाद निर्देशक दुलल गुहा की फिल्म ‘दोस्त’ में भी अमिताभ बच्चन ने ‘आनंद’ नाम के किरदार में एक बेहद प्रभावशाली कैमियो किया था, जहां मुख्य भूमिका में धर्मेंद्र मौजूद थे। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजी इस फिल्म में दोनों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को दर्शकों ने खूब सराहा था। इन दोनों सितारों की जुगलबंदी का सिलसिला आगे भी जारी रहा, जिसमें एक हॉरर-थ्रिलर फिल्म ‘जादूगर’ शामिल है। इस रहस्यमयी कहानी में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन ने क्रमशः वीरेंद्र और फ्रैंक जेम्स की भूमिकाएं निभाकर दर्शकों को चौंका दिया था, जिसकी पृष्ठभूमि एक सुनसान हवेली से जुड़ी थी। इसके बाद फिल्म ‘दिल्लगी’ में भी दोनों का जादू देखने को मिला, जहां अमिताभ बच्चन का रोल भले ही छोटा था, लेकिन एक गंभीर और सीधे-सादे प्रोफेसर की भूमिका निभा रहे धर्मेंद्र के साथ उनकी ऑनस्क्रीन मौजूदगी ने फिल्म की रौनक बढ़ा दी थी। इसके अतिरिक्त इस लिस्ट में एक अन्य फिल्म ‘हम कौन हैं’ का नाम भी प्रमुखता से शामिल है, जिसमें इस महान जोड़ी ने अपने अभिनय से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
शराब पार्टी बनी मौत की वजह: दोस्त ने बोतल और पानी की मोटर से किया हमला, युवक की मौत

मध्य प्रदेश; मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में एक बार फिर शराब के नशे में हुई हिंसक वारदात ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। एरोड्रम थाना क्षेत्र की पंचवटी कॉलोनी में मंगलवार दोपहर शराब पीने के दौरान दो दोस्तों के बीच हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि एक युवक को अपनी जान गंवानी पड़ी। आरोपी ने पहले शराब की बोतल से हमला किया और फिर पास में रखी पानी भरने की मोटर उठाकर दोस्त के सिर पर दे मारी। गंभीर चोटों के कारण युवक की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान जितेन्द्र पुत्र फूलचंद मीणा के रूप में हुई है। वह एक निजी बैंक में कार्यरत था और पंचवटी कॉलोनी क्षेत्र में रहता था। बताया जा रहा है कि मंगलवार दोपहर करीब एक बजे जितेन्द्र अपने दोस्त धर्मेंद्र पंवार के साथ बैठकर शराब पी रहा था। दोनों के बीच बातचीत के दौरान किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। शुरुआत में यह सामान्य बहस थी, लेकिन कुछ ही देर में मामला हिंसक झड़प में बदल गया। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार विवाद बढ़ने पर धर्मेंद्र ने अपना आपा खो दिया। उसने पहले शराब की बोतल उठाकर जितेन्द्र पर हमला किया। इसके बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ और उसने पास में रखी पानी भरने वाली मोटर को हथियार बना लिया। आरोपी ने मोटर से जितेन्द्र के सिर पर कई वार किए। सिर में गंभीर चोट लगने से वह लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ा। घटना के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही एरोड्रम थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायल युवक को अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। थाना प्रभारी वरेन्द्र कुशवाह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या का कारण आपसी विवाद है, जो शराब पीने के दौरान हुआ था। आरोपी धर्मेंद्र पंवार घटना के बाद मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और जल्द गिरफ्तारी का दावा कर रही है। जानकारी के मुताबिक जितेन्द्र का निजी जीवन भी काफी संघर्षपूर्ण रहा था। उसकी पत्नी करीब सात वर्ष पहले उसे छोड़कर चली गई थी और वह अकेले रहकर नौकरी कर रहा था। परिवार और परिचितों के अनुसार वह शांत स्वभाव का व्यक्ति था। उसकी अचानक हुई मौत से परिजनों और परिचितों में शोक का माहौल है। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि नशे की हालत में छोटे-छोटे विवाद भी किस तरह गंभीर अपराध का रूप ले सकते हैं। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की जाएगी।
मंदिर ट्रस्टी की बेरहमी से हत्या: शराब पीने से टोका तो चौकीदार ने डंडे से किए 31 वार, गुरुद्वारे में घुसकर भी नहीं छोड़ा

इंदौर इंदौर शहर एक बार फिर सनसनीखेज हत्या की घटना से दहल उठा है। अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में स्थित करीब 150 साल पुराने मंदिर के ट्रस्टी कैलाश मोदी (70) की मंदिर के चौकीदार ने बेरहमी से हत्या कर दी। आरोप है कि शराब पीने से रोकने और समझाइश देने पर चौकीदार मुकेश शर्मा इतना गुस्से में आ गया कि उसने बुजुर्ग ट्रस्टी पर डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जान बचाने के लिए भाग रहे कैलाश मोदी का आरोपी ने पीछा किया और गुरुद्वारे के अंदर घुसकर भी उन पर हमला जारी रखा। पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसने इलाके में दहशत फैला दी है। पुलिस के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे मंदिर परिसर में यह खूनी वारदात हुई। बताया जा रहा है कि मंदिर का चौकीदार मुकेश शर्मा लंबे समय से शराब का आदी है और अक्सर नशे की हालत में मंदिर परिसर में विवाद करता था। मंदिर ट्रस्टी कैलाश मोदी उसे कई बार समझा चुके थे और उसके व्यवहार को लेकर लोगों की शिकायतें भी सामने आती रही थीं। घटना वाले दिन भी मुकेश नशे की हालत में मंदिर पहुंचा था। जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह भड़क गया। उसने पास में रखा डंडा उठा लिया और मोदी पर हमला करने दौड़ा। अपनी जान बचाने के लिए मोदी वहां से भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। कुछ दूरी पर उन्हें पकड़कर डंडे से लगातार वार करना शुरू कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैलाश मोदी किसी तरह खुद को बचाते हुए पास स्थित गुरुद्वारे तक पहुंच गए। उन्होंने अंदर जाकर गेट बंद करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी वहां भी पहुंच गया। सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दे रहा है कि आरोपी ने गुरुद्वारे के भीतर उन्हें जमीन पर गिराकर सिर, हाथ और पैरों पर लगातार डंडे बरसाए। जानकारी के मुताबिक आरोपी ने करीब 31 बार हमला किया, जिससे मोदी गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के बाद आरोपी उन्हें लहूलुहान अवस्था में छोड़कर फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन सिर में गंभीर चोट और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। गुरुद्वारे के वाइस प्रेसिडेंट दिलराज छाबड़ा ने बताया कि घटना के समय सुबह का सत्संग चल रहा था और लाउडस्पीकर की आवाज के कारण किसी को हमले की भनक नहीं लगी। उन्होंने बताया कि कैलाश मोदी लंबे समय से मंदिर की सेवा कर रहे थे और क्षेत्र में उनका सम्मान था। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी मुकेश शर्मा के खिलाफ पहले भी शिकायतें की जा चुकी थीं। उसके व्यवहार और नशे की आदत को लेकर प्रशासन को कई बार अवगत कराया गया था, लेकिन समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं होने से यह दुखद घटना सामने आ गई। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर मामले की जांच जारी है। वहीं कैलाश मोदी की हत्या से पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।
न मनमुटाव, न तलाक, फिर भी ३७ सालों से अलग शहरों में रह रहे हैं अलका याग्निक और नीरज कपूर, खुद सिंगर ने खोला इस अनोखे रिश्ते का राज

नई दिल्ली । भारतीय संगीत जगत पर दशकों तक राज करने वाली दिग्गज गायिका अलका याग्निक की सुरीली आवाज से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। अलका याग्निक ने साल १९८९ में बिजनेसमैन नीरज कपूर से शादी की थी, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि शादी के करीब ३७ साल बीत जाने के बाद भी यह कपल एक-दूसरे से अलग रहता है। अमूमन फिल्म इंडस्ट्री में अलग रहने का मतलब मनमुटाव या तलाक माना जाता है, मगर इस जोड़े के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है। दोनों के बीच आज भी अटूट प्यार और आपसी समझ कायम है। दरअसल, अलका याग्निक के पति नीरज कपूर मूल रूप से मेघालय की राजधानी शिलांग के रहने वाले हैं और वहीं रहकर अपना पूरा बिजनेस संभालते हैं, जबकि अलका अपने काम के सिलसिले में मुंबई में रहती हैं। इस अनोखे रिश्ते की शुरुआत एक पारिवारिक जुड़ाव से हुई थी। नीरज कपूर की आंटी और अलका याग्निक की मां बचपन में क्लासमेट हुआ करती थीं। इसी पारिवारिक कनेक्शन के चलते नीरज जब मुंबई आए, तो उनकी पहली मुलाकात अलका से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला बढ़ा और यह दोस्ती गहरी मोहब्बत में बदल गई। उस दौर में दोनों के बीच रात-रात भर फोन पर बातें हुआ करती थीं और जब घर पर फोन का भारी-भरकम बिल आया, तब जाकर अलका की मां को इस अफेयर की भनक लगी। अलका उस समय तक यह पूरी तरह तय कर चुकी थीं कि वह जीवनसाथी के रूप में सिर्फ नीरज को ही चुनेंगी। हालांकि, जब दोनों ने अपने परिवारों के सामने शादी की इच्छा जताई, तो अलका के माता-पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ खड़े हो गए। घरवालों के विरोध की सबसे बड़ी वजह दोनों के करियर और अलग-अलग शहर थे। नीरज शिलांग में पूरी तरह सेटल थे और अलका उस दौर में अपने सिंगिंग करियर के पीक पर थीं, जिसके कारण उनका मुंबई में रहना बेहद जरूरी था। माता-पिता का मानना था कि एक पार्टनर मुंबई में और दूसरा शिलांग में रहेगा, तो इतनी दूरी के बीच शादी का चलना नामुमकिन हो जाएगा। हालांकि, अलका और नीरज के दृढ़ निश्चय के आगे आखिरकार दोनों परिवारों को झुकना पड़ा और साल १९८९ में दोनों पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह के बंधन में बंध गए। शादी के शुरुआती दिनों में दोनों ने एक बीच का रास्ता निकाला था, जिसके तहत तय हुआ था कि अलका एक महीने के लिए शिलांग जाएंगी और नीरज अगले महीने मुंबई आएंगे। शादी के तुरंत बाद अलका याग्निक का करियर इतनी तेजी से चमका कि उनके लिए एक दिन के लिए भी मुंबई छोड़ना पूरी तरह नामुमकिन हो गया। साल १९९० में उनकी बेटी सायशा का जन्म हुआ और उसके ठीक बाद जनवरी १९९१ में उनका गाना ‘एक दो तीन’ ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। इस सफलता ने अलका को बॉलीवुड की सबसे व्यस्त गायिका बना दिया। अलका बताती हैं कि उनके पति अक्सर मजाक में उन्हें चिढ़ाते हैं कि वह अलका के करियर के लिए तो बहुत लकी साबित हुए, लेकिन अपने खुद के वैवाहिक जीवन के लिए अनलकी रहे। खुद अलका भी मानती हैं कि पूरी जिंदगी अलग-अलग शहरों में रहने की वजह से जब भी वे लंबे समय बाद मिलते हैं, तो एक-दूसरे के तौर-तरीकों को दोबारा समझने में दो-चार दिन का समय लग जाता है, लेकिन इस दूरी ने उनके रिश्ते के विश्वास को कभी कमजोर नहीं होने दिया।
परदे पर शराबी का अमर अभिनय करने वाले केष्टो मुखर्जी की अनसुनी दास्तान, मंदिर जाते वक्त सड़क हादसे में थम गई थीं सांसें

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के सुनहरे इतिहास में कई ऐसे कलाकारों ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है, जिनकी रील और रीयल लाइफ में जमीन-आसमान का अंतर था। एक ऐसे ही बेमिसाल अभिनेता थे केष्टो मुखर्जी, जिन्होंने परदे पर हमेशा एक पक्के शराबी का किरदार निभाकर दर्शकों को लोटपोट किया, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने कभी शराब को हाथ तक नहीं लगाया। अपनी खास कॉमिक टाइमिंग, अनूठी शारीरिक भाषा और लड़खड़ाती जुबान से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले केष्टो मुखर्जी ने अपने करियर में ९० से भी अधिक फिल्मों में काम किया, मगर उनका यह मुकाम कड़े संघर्षों और बेहद अजीबो-गरीब दौर से गुजरकर हासिल हुआ था। कोलकाता के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे केष्टो को बचपन से ही अभिनय का गहरा शौक था, जिसके चलते उन्होंने शुरुआती दिनों में नुक्कड़ नाटकों और रंगमंच का रुख किया था। कोलकाता के रंगमंच पर सक्रियता के दौरान मशहूर फिल्मकार ऋत्विक घटक की पारखी नजर उन पर पड़ी। घटक ने केष्टो की असाधारण प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें अपनी बांग्ला फिल्म ‘नागरिक’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका दे दी। किस्मत का खेल देखिए कि यह फिल्म साल १९५२ में बनकर पूरी हो चुकी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे सिनेमाघरों तक पहुंचने में पूरे २५ साल लग गए। जब यह फिल्म १९७७ में रिलीज हुई, तब तक ऋत्विक घटक इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे। अपने गुरु और मार्गदर्शक के निधन के गहरे सदमे के कारण केष्टो मुखर्जी ने इस फिल्म को अपने जीवन में कभी नहीं देखा। कोलकाता में कई बंगाली फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद केष्टो को भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे न तो उनके भीतर की अभिनय की भूख मिट रही थी और न ही परिवार का गुजारा हो पा रहा था। आर्थिक तंगहाली से जूझते हुए केष्टो मुखर्जी ने एक दिन आंखों में बड़े सपने लिए मायानगरी बॉम्बे का रुख किया। बॉम्बे आकर उन्होंने नए सिरे से काम की तलाश शुरू की और किसी तरह दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से संपर्क साधे रखा। ऋषिकेश मुखर्जी ने उनकी अभिनय क्षमता का सम्मान करते हुए अपनी फिल्म ‘मुसाफिर’ में उन्हें एक स्ट्रीट डांसर का बेहद छोटा सा रोल दिया। इस छोटे से ब्रेक के बाद भी बॉम्बे जैसे बड़े शहर में खुद को स्थापित करने के लिए उनका संघर्ष थमा नहीं था। इसी जद्दोजहद के बीच एक दिन वह महान फिल्मकार बिमल रॉय से मिलने उनकी फिल्म के सेट पर पहुंच गए। बिमल रॉय उस समय शूटिंग के बेहद व्यस्त शेड्यूल में व्यस्त थे, इसलिए केष्टो वहीं एक कोने में बैठकर घंटों तक उनके फ्री होने का इंतजार करने लगे। काफी देर बाद जब बिमल रॉय फुर्सत में आए और केष्टो उनके सामने पहुंचे, तो उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि फिलहाल उनके पास कोई काम नहीं है और वह बाद में आएं। इस साफ इनकार के बाद भी केष्टो वहां से हिले नहीं, जिससे चिढ़कर बिमल रॉय ने उनसे पूछ लिया कि क्या तुम भौंक सकते हो, क्योंकि उन्हें अपनी फिल्म के एक दृश्य के लिए कुत्ते की आवाज की जरूरत थी। आम तौर पर ऐसा तीखा सवाल सुनकर कोई भी स्वाभिमानी कलाकार वहां से चला जाता, लेकिन केष्टो ने धैर्य रखा और तुरंत पूरी शिद्दत के साथ सेट पर ही कुत्ते की आवाज निकालने लगे। उनकी इस अप्रत्याशित हरकत और अभिनय के प्रति गजब का समर्पण देखकर बिमल रॉय पूरी तरह हैरान रह गए और उन्होंने तुरंत केष्टो को अपनी फिल्म के लिए साइन कर लिया। इस ऐतिहासिक घटना के बाद केष्टो मुखर्जी की बॉलीवुड में राह आसान हो गई और उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह हिंदी सिनेमा के सबसे पसंदीदा और भरोसेमंद हास्य कलाकारों में शुमार हो गए, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। महज ५६ वर्ष की उम्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने उनके इस सुनहरे सफर पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। वह मुंबई के समीप स्थित एक प्रसिद्ध गणपति मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी कार को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान अगले ही दिन दिल का दौरा पड़ने के कारण इस महान कलाकार का असमय निधन हो गया।
इंदौर में दूषित पानी से हड़कंप: सीवरेज मिला पानी पीने से 10 लोग बीमार, निगम की जांच शुरू

इंदौर इंदौर शहर में एक बार फिर दूषित पेयजल की समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आए मामले के बाद अब वार्ड क्रमांक 16 के महावीर नगर में पीने के पानी में सीवरेज मिलने की शिकायत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दूषित पानी पीने से अब तक करीब 10 लोग बीमार पड़ चुके हैं। प्रभावित लोगों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और अन्य पेट संबंधी समस्याओं के लक्षण देखे जा रहे हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से उनके घरों में गंदा और बदबूदार पानी आ रहा था। उन्होंने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से भी की थी, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण स्थिति गंभीर हो गई। लोगों का आरोप है कि यदि नगर निगम नियमित रूप से जल स्रोतों और पाइपलाइन की निगरानी करता तो इतनी बड़ी समस्या पैदा नहीं होती। मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने रहवासियों से चर्चा कर स्थिति की जानकारी ली और पानी की सप्लाई व्यवस्था तथा बोरवेल की जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान यह आशंका जताई जा रही है कि इलाके के एकमात्र बोरवेल में सीवरेज का पानी मिल जाने से पूरा जल स्रोत दूषित हो गया, जिसके कारण गंदा पानी सीधे घरों तक पहुंचा। क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि पानी से तेज दुर्गंध आ रही थी और उसका रंग भी सामान्य नहीं था। कई परिवारों ने पानी का उपयोग बंद कर दिया, जबकि कुछ लोग अनजाने में उसी पानी का सेवन करते रहे, जिससे उनकी तबीयत बिगड़ गई। बीमार लोगों का स्थानीय स्तर पर उपचार कराया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी बढ़ा दी गई है। नगर निगम ने पानी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही दूषित पानी के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है और समस्या के स्थायी समाधान के लिए तकनीकी टीम को लगाया गया है। इस बीच नगर निगम के साथ-साथ एक एनजीओ की टीम भी मौके पर पहुंची है। टीम घर-घर जाकर जानकारी जुटा रही है कि कितने लोग बीमार हुए हैं और दूषित पानी का स्रोत कहां से आया। वहीं वार्ड की पार्षद सोनाली मुकेश धारकर भी मौके पर पहुंचीं और रहवासियों की समस्याएं सुनीं। जोनल अधिकारियों ने दावा किया है कि निगम की टीम लगातार काम कर रही है और जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम में जल स्रोतों के दूषित होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में नागरिकों को सावधानी बरतते हुए पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही पीना चाहिए। फिलहाल महावीर नगर के लोग सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
ट्रेड सीक्रेट मामले में टीसीएस की कानूनी लड़ाई लगभग समाप्त, सुप्रीम कोर्ट ने नहीं दी राहत; करोड़ों डॉलर की अतिरिक्त देनदारी बढ़ी

नई दिल्ली । भारत की अग्रणी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस को अमेरिका में लंबे समय से चल रहे ट्रेड सीक्रेट विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने निचली अदालतों द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा की मांग की थी। शीर्ष अदालत के इस निर्णय के बाद कंपनी के खिलाफ पूर्व में दिए गए हर्जाने के आदेश प्रभावी बने रहेंगे और टीसीएस को इस मामले में कुल लगभग 220 मिलियन डॉलर का वित्तीय प्रभाव झेलना पड़ेगा। कंपनी द्वारा नियामकीय सूचना में बताया गया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मामले की पुनर्समीक्षा करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही अपीलीय अदालत द्वारा पहले दिए गए फैसले को चुनौती देने की सभी प्रमुख कानूनी संभावनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं। इस घटनाक्रम को कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी और वित्तीय झटका माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला कई वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में चल रहा था। विवाद की जड़ वर्ष 2019 में दायर एक मुकदमे से जुड़ी है। आरोप लगाया गया था कि टीसीएस ने एक बीमा क्षेत्र से जुड़े बड़े प्रौद्योगिकी प्रोजेक्ट के दौरान प्रतिस्पर्धी कारोबारी जानकारी और गोपनीय व्यावसायिक प्रक्रियाओं का अनुचित लाभ उठाया। शिकायतकर्ताओं का दावा था कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नियुक्ति के बाद प्राप्त जानकारी का उपयोग प्रतिस्पर्धी तकनीकी प्लेटफॉर्म विकसित करने में किया गया, जिससे उनके व्यावसायिक हित प्रभावित हुए। मामले की सुनवाई के दौरान अमेरिकी अदालत में कई स्तरों पर बहस हुई। वर्ष 2023 में जूरी ने निष्कर्ष निकाला कि कंपनी द्वारा ट्रेड सीक्रेट्स के अनुचित उपयोग से संबंधित दावों में पर्याप्त आधार मौजूद है। इसके बाद जूरी ने 210 मिलियन डॉलर के भुगतान की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में संघीय न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया। संशोधित राशि में वास्तविक हर्जाना और दंडात्मक हर्जाना दोनों शामिल थे। इसके बाद कंपनी ने फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाया। अपीलीय अदालत ने भी निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा। टीसीएस ने अपने पक्ष में यह तर्क रखा था कि शिकायतकर्ता पक्ष वास्तविक वित्तीय नुकसान को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका है और दंडात्मक हर्जाने की राशि भी अत्यधिक है। इसके बावजूद अदालतों ने पूर्व निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका स्वीकार न किए जाने के बाद कंपनी को अब मामले से जुड़े वित्तीय प्रावधानों में वृद्धि करनी होगी। कंपनी पहले ही इस विवाद से संबंधित बड़ी राशि का प्रावधान अपने खातों में कर चुकी थी। अब अतिरिक्त देनदारियों, ब्याज और कानूनी व्ययों को शामिल करते हुए और राशि अलग रखी जाएगी। यह प्रभाव आगामी वित्तीय तिमाहियों के परिणामों में एक असाधारण खर्च के रूप में दिखाई देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला वैश्विक आईटी उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है। तकनीकी सेवाओं, डेटा प्रबंधन और बौद्धिक संपदा से जुड़े क्षेत्रों में कंपनियों के लिए ट्रेड सीक्रेट संरक्षण और अनुपालन मानकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को विभिन्न देशों के कानूनी ढांचे के अनुरूप अपनी प्रक्रियाओं को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है। हालांकि वित्तीय प्रभाव उल्लेखनीय है, फिर भी टीसीएस जैसी बड़ी वैश्विक कंपनी की समग्र कारोबारी क्षमता पर इसका दीर्घकालिक असर सीमित माना जा रहा है। इसके बावजूद यह मामला कॉरपोरेट गवर्नेंस, बौद्धिक संपदा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कारोबारी विवादों के संदर्भ में आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखा जाएगा।
Ashoknagar Congress Protest: पुतला जलने को लेकर कांग्रेस कारकर्ता और पुलिस के बिच छीना-झपटी, मीनाक्षी नटराजन मामले को लकेर हुआ प्रदर्शन

Ashoknagar Congress Protest: अशोकनगर। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन होने पर अशोकनगर में सोमवार को युवा कांग्रेस ने गांधी पार्क में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही नामांकन रद्द करने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताया। खांसी की सिरप की बिक्री पर सरकार की सख्ती, अब केवल लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से ही मिलेगी दवा पुलिस और कारकर्ता में हुई झड़प इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता गांधी पार्क पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार का पुतला जलाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने हस्तक्षेप कर पुतला छीन लिया। जैसे ही पुलिस पुतला छीना कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। देखते ही देखते ये छीना-झपटी में बदल गई, लेकिन पुलिस की सूझबूझ से मामला संभल लिया गया। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किया जाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। ट्विशा शर्मा केस में CBI ने बढ़ाई न्यायिक हिरासत की मांग, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अब भी इंतजार कार्यकर्ताओं की मांग निष्पक्ष जांच करे सरकार कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता होना बेहद जरुरी है, लेकिन इस मामले में की गई कार्रवाई पारदर्शी प्रतीत नहीं होती। उनका कहना है कि सरकार के इस फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गयी है। कांग्रेस ने ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की। पार्टी ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के कारणों की विस्तृत समीक्षा कराने, निर्वाचन आयोग और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।