लाल झंडे से दुनिया को क्या संदेश देना चाहता है ईरान? खामेनेई के अंतिम संस्कार में दिखे प्रतीक के पीछे छिपा धार्मिक और राजनीतिक महत्व

नई दिल्ली । ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से पहले उनके ताबूत पर रखा गया विशेष लाल झंडा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। तेहरान के ग्रैंड मोसाला में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान यह झंडा सबसे प्रमुख प्रतीकों में शामिल रहा। धार्मिक और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं, बल्कि शिया परंपरा, ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान राजनीतिक संदेश का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। खामेनेई के ताबूत पर रखा गया यह लाल झंडा उनके पैतृक शहर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह से जुड़ा हुआ माना जाता है। शिया परंपरा में इस प्रकार के लाल ध्वज का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, शहादत की स्मृति और न्याय की मांग के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी कारण अंतिम विदाई समारोह में इस झंडे की मौजूदगी ने व्यापक ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान इस प्रतीक के माध्यम से खामेनेई की मृत्यु को शिया इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक कर्बला की शहादत के संदर्भ में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहा है। सातवीं शताब्दी में कर्बला के युद्ध के दौरान पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत शिया समुदाय की आस्था का केंद्रीय आधार मानी जाती है। उनके बलिदान को अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, नैतिक साहस और सत्य के पक्ष में अडिग रहने का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। शिया धार्मिक परंपराओं में लाल झंडा अक्सर अधूरे न्याय, शहादत और प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है, जबकि काला झंडा शोक और मातम का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार स्थल पर लाल और काले दोनों रंगों के झंडे तथा बैनरों का व्यापक उपयोग किया गया। इन प्रतीकों के माध्यम से श्रद्धांजलि के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। तेहरान में आयोजित अंतिम दर्शन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे। परिसर को धार्मिक प्रतीकों, शोक संदेशों और खामेनेई के चित्रों से सजाया गया। पूरे आयोजन में शिया धार्मिक परंपराओं का विशेष रूप से पालन किया गया, जिससे समारोह को धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्वरूप मिला। जानकारों का मानना है कि अंतिम संस्कार कार्यक्रम केवल एक औपचारिक विदाई नहीं, बल्कि शिया समुदाय के बीच वैचारिक एकजुटता और ऐतिहासिक विरासत को भी रेखांकित करने का प्रयास है। इसी क्रम में अंतिम यात्रा और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों को व्यापक स्वरूप दिया गया है, ताकि शिया समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके। खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम कई दिनों तक चलने वाले हैं। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जाएगा। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। माना जा रहा है कि यह पूरा आयोजन केवल एक राष्ट्रीय शोक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिया धार्मिक पहचान, ऐतिहासिक स्मृति और ईरान की वैचारिक निरंतरता को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने का भी महत्वपूर्ण अवसर है।
स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार

नई दिल्ली । देशभर में स्पीड पोस्ट और निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से गांजा सप्लाई करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 21 राज्यों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था और ऑनलाइन ऑर्डर मिलने के बाद पार्सल के माध्यम से ग्राहकों के घरों तक मादक पदार्थ पहुंचाए जाते थे। मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े कई अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार और सुनियोजित तस्करी तंत्र के संचालन के संकेत मिले हैं। पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब डाक के माध्यम से भेजे जा रहे एक संदिग्ध पार्सल की जांच की गई। इसके बाद दूसरे पार्सलों की पड़ताल शुरू हुई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे पैकेटों के जरिए गांजे की आपूर्ति कर रहा था। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया तो सामने आया कि पार्सलों में मादक पदार्थों को सामान्य घरेलू सामान या दवाइयों के रूप में दर्शाकर भेजा जाता था, ताकि किसी को संदेह न हो। प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहकों के ऑर्डर पूरा करता था। रोजाना कई स्पीड पोस्ट और कूरियर पार्सलों के जरिए 50 से 250 ग्राम तक गांजा विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था। प्रत्येक पार्सल की कीमत उसकी मात्रा के अनुसार तय होती थी और पूरे कारोबार से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होने का अनुमान है। मासिक और वार्षिक स्तर पर यह अवैध कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका था। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करता था। ऑर्डर प्राप्त होने के बाद डिजिटल भुगतान के जरिए रकम ली जाती थी और फिर पैकेज तैयार कर अलग-अलग स्थानों पर भेज दिए जाते थे। नेटवर्क में शामिल प्रत्येक सदस्य की अलग जिम्मेदारी तय थी। कोई पैकेजिंग करता था, कोई पार्सल बुक कराता था, जबकि अन्य सदस्य मादक पदार्थों की खरीद, भंडारण और वितरण का काम संभालते थे। इससे पूरे नेटवर्क का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार गिरोह अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कोड वर्ड का भी इस्तेमाल करता था। मादक पदार्थ की मात्रा और गुणवत्ता बताने के लिए सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाता था, जिससे बातचीत के दौरान संदेह की संभावना कम रहे। अवैध कमाई को छिपाने के लिए विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई आईडी का उपयोग किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि अवैध आय का एक हिस्सा सोने, महंगी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो स्थानीय खरीदारों को भी गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं और इसके माध्यम से लंबे समय से मादक पदार्थों की आपूर्ति की जा रही थी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड तथा पार्सल बुकिंग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच जारी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक तस्करी गिरोह तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे व्यापक अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। ऐसे में वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से संगठित ड्रग्स तस्करी के ऐसे तरीकों पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी और भविष्य में इस तरह के नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।
चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी गठबंधन से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा चुनावी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। अब इस पत्र को सार्वजनिक किए जाने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। संयुक्त पत्र में विपक्षी दलों ने दावा किया है कि देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अनिवार्य हैं तथा इस व्यवस्था की रक्षा करना न्यायपालिका का महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व है। विपक्ष का कहना है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तब न्यायपालिका से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान की भावना के अनुरूप आवश्यक हस्तक्षेप करे। पत्र में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान आयोग का रवैया कई अवसरों पर पक्षपातपूर्ण प्रतीत हुआ है। विपक्ष का यह भी कहना है कि आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघनों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं होने के कारण चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है। विपक्षी दलों ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्र अपेक्षित स्तर पर प्रभावी दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बना रहना आवश्यक है और यदि किसी संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं तो उसका समाधान संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विपक्ष न्यायपालिका की भूमिका और स्वतंत्रता का सम्मान करता है तथा उसका उद्देश्य किसी संस्था की गरिमा पर प्रश्न उठाना नहीं है। इसके विपरीत, विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब विभिन्न स्तरों पर मतभेद या विवाद उत्पन्न होते हैं, तब न्यायपालिका अंतिम संवैधानिक मंच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी आधार पर मुख्य न्यायाधीश से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है। विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार यदि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर संदेह बढ़ता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद चुनावी सुधार, निर्वाचन आयोग की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाएगी। फिलहाल विपक्ष का यह संयुक्त पत्र देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जारी बहस का एक अहम राजनीतिक दस्तावेज बनकर सामने आया है।
आईआईएम इंदौर IPM में शहर के 6 छात्रों का चयन, आरव माले ने हासिल की देशभर में दूसरी रैंक

इंदौर । भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) इंदौर के प्रतिष्ठित इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (IPM) की अंतिम चयन सूची में इंदौर के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। देशभर के करीब 28 हजार अभ्यर्थियों के बीच हुई कड़ी प्रतिस्पर्धा में शहर के छह छात्रों ने अंतिम चयन सूची में जगह बनाई। इनमें आरव माले ने ऑल इंडिया रैंक-2 हासिल कर न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन किया है। आईपीमैट देश की सबसे कठिन मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। इस वर्ष करीब 28 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें से लगभग 830 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चुना गया और अंततः केवल 150 विद्यार्थियों का चयन हुआ। चयनित छात्रों में इंदौर के आरव माले के अलावा अथर्व हार्डिया (एआईआर-8), अकमल बंगलोवाला (एआईआर-33), देवांश अग्रवाल (एआईआर-42), दिव्य लुणावत (एआईआर-51) सहित कुल छह छात्रों ने सफलता हासिल की। ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त करने वाले आरव माले ने अपनी सफलता का श्रेय समयबद्ध तैयारी और लगातार अभ्यास को दिया। उन्होंने 11वीं कक्षा से ही आईपीमैट की तैयारी शुरू कर दी थी। बोर्ड परीक्षाओं के बाद उन्होंने रोजाना कई घंटे पढ़ाई की और 40 से अधिक मॉक टेस्ट देकर अपनी रणनीति को मजबूत बनाया। इंटरव्यू में बिजनेस स्टडीज और गणित से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। यही निरंतर अभ्यास उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना। अथर्व हार्डिया ने भी बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी साथ-साथ की। उनका कहना है कि नियमित अभ्यास और मॉक इंटरव्यू ने आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अकमल बंगलोवाला पिछले दो वर्षों से आईपीमैट की तैयारी कर रहे थे। उनका लक्ष्य भविष्य में अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करना है। देवांश अग्रवाल ने बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने के साथ कई मॉक टेस्ट दिए और अब वे वित्तीय परामर्श के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। दिव्य लुणावत ने भी लगातार दो वर्षों तक योजनाबद्ध तैयारी की। पढ़ाई के साथ उन्होंने समसामयिक घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया और नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़कर सामान्य ज्ञान मजबूत किया। इंटरव्यू में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े सवालों का उन्होंने प्रभावी ढंग से जवाब दिया। आईपीमैट विशेषज्ञ अजय बंसल और मन गोयल का कहना है कि अब इस परीक्षा में केवल कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्र ही नहीं, बल्कि साइंस और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। आईआईएम से सीधे पांच वर्षीय मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश का अवसर युवाओं को आकर्षित कर रहा है। उनका मानना है कि जो छात्र 11वीं कक्षा से ही व्यवस्थित तैयारी शुरू करते हैं, नियमित मॉक टेस्ट देते हैं और इंटरव्यू की तैयारी पर बराबर ध्यान देते हैं, उनके चयन की संभावना काफी अधिक रहती है। इंदौर के इन विद्यार्थियों की सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है। इन छात्रों की उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।
Narmada Parikrama Path: नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाने की तैयारी तेज, सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश

Narmada Parikrama Path:भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में ‘नर्मदा समग्र’ की समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिक्रमा मार्ग से अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा से जुड़े विकास कार्यों और संरक्षण योजनाओं की समीक्षा अब हर महीने की जाएगी, ताकि सभी परियोजनाओं पर तेजी से काम हो सके। युवाओं को जोड़ने पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि नदियों का संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक भागीदारी से ही संभव है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेशभर में विशेष रूप से युवाओं को नदी संरक्षण अभियान से जोड़ा जाए। इसके साथ ही नर्मदा जयंती पर प्रदेशभर में व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने और मां नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक एवं पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने इन स्थानों पर दीनदयाल रसोई शुरू करने की बात भी कही। महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर बनेगा ‘नर्मदा कोष पोर्टल’ बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा घाटों की स्वच्छता और संरक्षण के लिए ‘नर्मदा कोष पोर्टल’ बनाया जाएगा। इसके अलावा मां नर्मदा के जल को निर्मल और अविरल बनाए रखने के उद्देश्य से ‘नमन मिशन’ तैयार किया गया है। यह मिशन नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए काम करेगा और इसके लिए वर्ष 2026-27 का रोडमैप भी तैयार किया जा चुका है। अमरकंटक में बनेगा जैव विविधता प्रबंधन संस्थान मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान स्थापित किया जाएगा। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है। वहीं, वन विभाग घाटी क्षेत्र में करीब 415 हेक्टेयर भूमि पर 2.70 लाख पौधे लगाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण को और मजबूती मिल सके। ग्रेनाइट खदान बनी काल 40 फीट ऊंचाई से गिरी चट्टान ट्रैक्टर के हुए टुकड़े मध्य प्रदेश के 5 मजदूरों सहित 7 की मौत 21 नगरों में बनेंगे 35 एसटीपी बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि नर्मदा तट के 21 नगरों में 35 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) दिसंबर 2027 तक तैयार हो जाएंगे। इससे नदी में प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, धार्मिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण ओंकारेश्वर के समग्र विकास के लिए स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (SADA) गठित करने की तैयारी भी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश देते हुए कहा कि मां नर्मदा की स्वच्छता, संरक्षण और घाटी क्षेत्र के विकास को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
बारिश ने खोली विकास कार्यों की पोल, इंदौर में जलभराव से जनजीवन बेहाल; 4 दिन भारी बारिश का अलर्ट

इंदौर । इंदौर में मानसून ने जुलाई की शुरुआत से ही जोरदार दस्तक दी है। पिछले दो दिनों में शहर में करीब पांच इंच बारिश दर्ज की गई है, जिससे कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। बुधवार को करीब ढाई इंच बारिश के बाद गुरुवार रात फिर तेज बारिश हुई और शुक्रवार सुबह तक शहर के अधिकांश हिस्सों में पानी भरा रहा। लगातार हो रही बारिश के बीच अधूरे सड़क और ड्रेनेज निर्माण कार्यों ने लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जिससे प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। बारिश के बाद एमबी रोड, रिंग रोड, नेहरू नगर, अटल द्वार, निपानिया, स्टार चौराहा और द्वारकापुरी समेत कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया। कई स्थानों पर ड्रेनेज लाइन, स्टॉर्म वॉटर लाइन और पेयजल पाइपलाइन बिछाने के लिए की गई खुदाई के बाद सड़कें समय पर दुरुस्त नहीं की गईं। कहीं केवल मिट्टी और गिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया, जो बारिश में दलदल में बदल गई। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सत्यसांई चौराहे के पास तेज बारिश के दौरान एक बड़ा पेड़ का हिस्सा सड़क पर गिर गया। हालांकि इस हादसे में एक व्यक्ति बाल-बाल बच गया। वहीं कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालक गड्ढों और फिसलन के कारण गिरकर घायल हो गए। बारिश के पानी में गड्ढे दिखाई नहीं देने से दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। एमआर-11 मार्ग पर निर्माण कार्य के चलते बनाए गए डायवर्शन मार्ग भी बारिश में खतरनाक साबित हो रहे हैं। देवास नाका और निपानिया चौराहे के आसपास खुदाई के बाद सड़क की ठीक से मरम्मत नहीं होने के कारण जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। मानसरोवर क्षेत्र में हाल ही में बनी सड़क पहली ही बारिश में उखड़ने लगी है, जबकि महालक्ष्मी नगर से निपानिया तक की सीमेंटेड सड़क भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सड़क किनारे पक्के फुटपाथ नहीं होने से पूरा इलाका कीचड़ और दलदल में बदल गया है। हाल ही में बनाई गई स्टॉर्म वॉटर लाइन भी बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। स्टार चौराहे पर घंटों तक पानी जमा रहा। वहीं जंजीरवाला चौराहे और रॉयल पार्क क्षेत्र में अधूरे निर्माण कार्यों के कारण हर बारिश में जलभराव की समस्या सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम नागरिक भुगत रहे हैं। मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत रेडिसन चौराहे से रोबोट चौराहे तक चल रहे निर्माण कार्य ने भी ट्रैफिक और सड़क व्यवस्था को प्रभावित किया है। मुख्य सड़क संकरी होने और सर्विस रोड की खराब स्थिति के कारण बारिश के दौरान आवागमन और मुश्किल हो गया है। वहीं द्वारकापुरी क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। कई परिवारों ने घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए मुख्य दरवाजों के सामने सीमेंट की छोटी दीवारें तक बना ली हैं। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर शहर की अधूरी परियोजनाओं और कमजोर आधारभूत ढांचे की पोल खोल दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी सोनम रघुवंशी की जमानत, कहा- रिहा न हुई होती तो बेल पर रोक लगा देते

इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी जमानत पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि कोर्ट ने साफ कहा कि हाईकोर्ट द्वारा जमानत देने के आधार पर उसे गंभीर आपत्ति है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि यदि सोनम जेल से रिहा नहीं हुई होती तो उसकी जमानत पर रोक लगाने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती। साथ ही मेघालय सरकार की उस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया गया जिसमें हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती दी गई है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई की। मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह सुनियोजित हत्या का मामला है। उनके अनुसार सोनम ने अपने चार साथियों के साथ मिलकर पति राजा रघुवंशी की हत्या की और शव को गहरी खाई में फेंक दिया। घटना के बाद वह फरार हो गई थी और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार की गई। सुनवाई के दौरान सरकार ने हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी संबंधी दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) की जगह गलती से धारा 403(1) दर्ज हो गई थी। यह केवल टाइपिंग की त्रुटि थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसी तकनीकी आधार को जमानत का कारण मान लिया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय सभी आधार बताए गए थे और मजिस्ट्रेट के रिकॉर्ड में भी इसका उल्लेख है। पहले भी सोनम की जमानत याचिका मेरिट के आधार पर खारिज हो चुकी थी, इसलिए केवल लिपिकीय गलती के आधार पर राहत देना उचित नहीं था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब गिरफ्तारी के आधार पहले ही बताए जा चुके थे और शुरुआती जमानत याचिकाओं में इस मुद्दे का जिक्र नहीं किया गया था तो बाद में केवल गलत धारा लिखे जाने को आधार बनाकर जमानत कैसे मिल गई। सोनम की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि गिरफ्तारी के कारण उसे बताए ही नहीं गए थे, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि यदि ऐसा था तो यह आपत्ति पहले क्यों नहीं उठाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश पर उसे कुछ आपत्तियां हैं, लेकिन चूंकि सोनम पहले ही रिहा हो चुकी है इसलिए इस स्तर पर उसकी जमानत पर रोक नहीं लगाई जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कानून के अनुसार आगे कोई कार्रवाई आवश्यक हो तो राज्य सरकार ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। यह मामला मई 2025 में सामने आया था। इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए, जहां 23 मई को दोनों लापता हो गए। 3 जून को राजा का शव एक गहरी खाई से बरामद हुआ। जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ और पुलिस ने कई आरोपियों के साथ सोनम रघुवंशी को भी मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जमानत पर बाहर है, जबकि मामले की सुनवाई जारी है।
5 जुलाई से बदलेगी मंगल की चाल, ज्योतिषीय गणना के अनुसार इन चार राशियों पर मंडराएगा आर्थिक और मानसिक संकट, रहें बेहद सतर्क

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि और नक्षत्र परिवर्तन को मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली माना गया है। इसी कड़ी में शौर्य, साहस, पराक्रम और शारीरिक शक्ति के कारक माने जाने वाले उग्र ग्रह मंगल का एक बड़ा नक्षत्र गोचर होने जा रहा है। आगामी 5 जुलाई 2026, रविवार की आधी रात 12 बजकर 01 मिनट पर मंगल ग्रह रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और वे 24 जुलाई 2026 तक इसी स्थिति में गतिमान रहेंगे। यद्यपि मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन कई राशियों के लिए शुभ और प्रगतिशील परिणाम लेकर आएगा, परंतु ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार चार ऐसी विशेष राशियां भी हैं जिनके जातकों के लिए यह गोचर अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और कष्टदायी साबित हो सकता है। इस अवधि में प्रभावित जातकों को विशेष रूप से बड़े फैसले लेने से बचने, अनियंत्रित क्रोध पर काबू रखने और आर्थिक मामलों में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इस खगोलीय गोचर से प्रभावित होने वाली पहली मुख्य राशि वृष है। वृष राशि के जातकों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन जीवन में कई तरह की विपरीत परिस्थितियां और चुनौतियां उत्पन्न कर सकता है। इस दौरान इन्हें अपने आर्थिक मामलों में विशेष रूप से सतर्कता बनाए रखनी होगी। खर्चों की अधिकता के कारण संचित धन पानी की तरह बह सकता है, जिससे बजटीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इसके अतिरिक्त, कार्यस्थल या ऑफिस में सहकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत करते समय अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार के विवाद से दूर रहकर धैर्यपूर्वक समस्याओं का समाधान खोजना ही इस समय हितकर रहेगा। द्वितीय प्रभावित राशि तुला है, जिसके जातकों के लिए मंगल का रोहिणी नक्षत्र में जाना प्रतिकूल समय की शुरुआत का संकेत है। इस अवधि में जातक अपनी ऊर्जा, कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में एक अप्रत्याशित कमी महसूस कर सकते हैं। इसके साथ ही, स्वभाव में अकारण ही आक्रामकता और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दौरान किसी भी तरह का महत्वपूर्ण अथवा रणनीतिक निर्णय जल्दबाजी में लेने से भारी नुकसान हो सकता है। पारिवारिक जीवन में मधुरता बनाए रखने के लिए अपने रिश्तों में अहंकार या ‘इगो’ को बिल्कुल भी आड़े न आने दें और अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह सजग रहें। इस सूची में तीसरी प्रभावित राशि मकर है, जिसके जातकों के लिए मंगल का यह नक्षत्र गोचर बड़ी आर्थिक क्षति का मुख्य कारक बन सकता है। मकर राशि वाले लोगों को इस समय सीमा के भीतर किसी भी तरह के नए निवेश या बड़े वित्तीय लेन-देन से पूरी तरह दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अनापेक्षित और अनावश्यक खर्चों में भारी वृद्धि होने के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र या व्यापार में किसी भी बाहरी व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा करने से बचें, अन्यथा विश्वासघात या बड़ा धोखा मिलने की पूरी संभावना है। इस कठिन दौर में मानसिक तनाव को स्वयं पर हावी न होने दें और अपनी सोच को सकारात्मक बनाए रखें। चौथी और अंतिम प्रभावित राशि मीन है, जिसके जातकों के लिए मंगल का यह गोचर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिकूल और कठिन परिस्थितियां उत्पन्न करने वाला साबित होगा। इस अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के जोखिम भरे कार्यों, सट्टेबाजी या लॉटरी जैसे निवेशों से पूरी तरह दूर रहना ही समझदारी होगी। पारिवारिक संबंधों में वैचारिक मतभेद के कारण तनाव और कड़वाहट बढ़ने के प्रबल संकेत हैं। यह संपूर्ण समय मीन राशि के जातकों के लिए अत्यंत धैर्य, संयम और विवेक से काम लेने का है। लापरवाही बरतने पर गंभीर धन हानि और मान-प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचने की आशंका व्यक्त की गई है।
महिला के पैर पकड़कर बचाई जान इंदौर में जर्जर मकान खाली कराने निगम अधिकारी का मानवीय चेहरा फिर चला बुलडोजर

इंदौर । लगातार हो रही बारिश के बीच इंदौर नगर निगम की एक कार्रवाई ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर के परदेशीपुरा क्षेत्र में एक जर्जर मकान को गिराने पहुंची निगम की टीम को परिवार के विरोध का सामना करना पड़ा लेकिन कार्रवाई के दौरान जो दृश्य सामने आया उसने हर किसी को भावुक कर दिया। परिवार को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए नगर निगम के रिमूवल प्रभारी ने एक महिला के पैर पकड़ लिए और हाथ जोड़कर मकान खाली करने की अपील की। आखिरकार समझाइश सफल रही और परिवार के बाहर आने के बाद जर्जर मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। नगर निगम की टीम वर्मा नर्सिंग होम के पास स्थित रतिराम खटके के पुराने और जर्जर मकान को हटाने पहुंची थी। अधिकारियों के अनुसार इस भवन को वर्ष 2021 से कई बार नोटिस जारी किए जा चुके थे। हाल ही में हुए निरीक्षण में भवन की नींव कमजोर और पूरी संरचना अत्यंत खतरनाक पाई गई थी। लगातार बारिश के कारण मकान कभी भी गिर सकता था जिससे बड़ा हादसा होने की आशंका थी। कार्रवाई के दौरान मकान में रहने वाली महिला ने घर खाली करने से इनकार करते हुए अपने घरेलू सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। उसने कहा कि सामान रखने की व्यवस्था होने के बाद ही वह मकान खाली करेगी। इसके बाद रिमूवल प्रभारी बबलू कल्याणे स्वयं मकान के अंदर गए और पूरा सामान देखा। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि उनका सामान पास की सुरक्षित जगह पर रखवा दिया जाएगा और किसी भी वस्तु को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। काफी देर तक समझाने के बावजूद जब महिला तैयार नहीं हुई तो स्थिति भावुक हो गई। परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अधिकारी बबलू कल्याणे ने महिला के पैर पकड़ लिए और आग्रह किया कि वह अपनी और अपने परिवार की जान बचाने के लिए मकान खाली कर दे। अधिकारी का यह मानवीय व्यवहार देखकर वहां मौजूद लोग भी भावुक हो गए। अंततः महिला और उसके परिवार ने अधिकारियों की बात मान ली और सुरक्षित बाहर आ गए। परिवार के बाहर निकलने के बाद पुलिस की मौजूदगी में नगर निगम ने करीब दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में बने जर्जर मकान को बुलडोजर की मदद से गिरा दिया। इस भवन में अलग अलग परिवार रह रहे थे जिन्हें पहले ही सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी प्रकार की सख्ती दिखाने के लिए नहीं बल्कि संभावित जनहानि को रोकने के उद्देश्य से की गई। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि बारिश के मौसम में शहर के सभी चिन्हित जर्जर भवनों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। जिन भवनों से लोगों की जान को खतरा है उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है और किसी भी संभावित हादसे से पहले ऐसे भवनों को हटाना जरूरी है। इंदौर की यह घटना केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि संवेदनशीलता और मानवीय जिम्मेदारी का उदाहरण भी बन गई है। एक अधिकारी ने नियमों के साथ इंसानियत को भी प्राथमिकता दी और समय रहते एक संभावित बड़े हादसे को टालने में अहम भूमिका निभाई।
ब्रिटिश महिला के दिमाग में मिले 38 परजीवी सिस्ट; 19 साल पुराने भारत दौरे पर मढ़ा आरोप, तो सोशल मीडिया पर भड़के भारतीय यूजर्स

नई दिल्ली । पश्चिमी मीडिया में हाल ही में सुर्खियां बटोरने वाली एक खबर को लेकर भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स और इंटरनेट जगत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। दरअसल, एक 42 वर्षीय ब्रिटिश महिला लोरी डेनमैन के मस्तिष्क में 38 परजीवी सिस्ट पाए गए हैं। महिला और कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों का दावा है कि साल 2007 में अपनी दो महीने की भारत यात्रा के दौरान वे सूअर के फीताकृमि से होने वाले एक दुर्लभ संक्रमण ‘न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस’ का शिकार हुई थीं। इस दावे के सामने आते ही भारतीय नेटिजन्स ने इसे पूरी तरह से एक ‘भारत विरोधी एजेंडा’ और देश की वैश्विक छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास करार दिया है। भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स इस बात को लेकर बेहद हैरान और क्रोधित हैं कि करीब 19 वर्ष पहले की गई एक संक्षिप्त यात्रा को बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक और प्रयोगशाला साक्ष्यों के इस तरह वैश्विक मंचों पर उछाला जा रहा है। इंटरनेट पर लोगों का आरोप है कि विदेशी मीडिया संस्थान अक्सर भारत को एक अस्वच्छ और असुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में चित्रित करने की फिराक में रहते हैं। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि इतने लंबे अंतराल के बाद अचानक इस मामले को तूल देकर वैश्विक पर्यटकों के मन में भारत के प्रति भय पैदा करने का एक प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है, जो पूरी तरह से तर्कहीन है। इस गंभीर विवाद के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखे तंज और मीम्स की भी बाढ़ आ गई है। भारतीय यूजर्स ब्रिटिश महिला के इस दावे के वैज्ञानिक तर्क पर सवाल उठाते हुए ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का उदाहरण दे रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि महारानी एलिजाबेथ भी वर्ष 1997 में भारत दौरे पर आई थीं और उनका निधन वर्ष 2022 में हुआ, तो क्या अब उनके निधन का उत्तरदायित्व भी उनके दशकों पुराने भारत दौरे पर मढ़ दिया जाएगा। यूजर्स का कहना है कि 2007 से लेकर अब तक के लंबे समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने, खाने-पीने और यात्रा करने के बाद किसी भी बीमारी के लिए केवल भारत को दोष देना पूरी तरह से हास्यास्पद और बेतुका है। चिकित्सीय इतिहास के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत से लौटने के चार वर्ष बाद यानी 2011 में लोरी डेनमैन को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं का अहसास हुआ। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान उनके शरीर से एक मीटर लंबा टेपवर्म प्राप्त हुआ, जिसके बाद कराए गए एमआरआई स्कैन में उनके मस्तिष्क के भीतर 38 परजीवी सिस्ट होने की पुष्टि हुई। ‘न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस’ नामक यह दुर्लभ बीमारी सूअर के फीताकृमि ‘टीनिया सोलियम’ के कारण होती है, जो मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करती है और दुनिया भर में मिर्गी के दौरों का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। इस संक्रमण के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए महिला को अब जीवन भर चिकित्सीय दवाओं पर निर्भर रहना पड़ेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षा मानकों के अनुसार, यह संक्रमण केवल दूषित या अधपके सूअर का मांस खाने से ही नहीं, बल्कि दूषित पानी और संक्रमित व्यक्ति द्वारा बिना स्वच्छता के छुए गए कच्चे फलों तथा सब्जियों के सेवन से भी इंसानी शरीर में प्रवेश कर सकता है। पेट में जाने के बाद ये सूक्ष्म अंडे लार्वा का रूप ले लेते हैं और रक्त प्रवाह के माध्यम से मस्तिष्क की मांसपेशियों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि, ब्रिटेन के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ब्रिटेन में सख्त खाद्य सुरक्षा कानूनों के कारण इसके मामले अत्यंत दुर्लभ हैं और भारत में इसके मरीजों की संख्या अधिक है, इसलिए मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री को आधार बनाकर ही इस तरह की चिकित्सकीय संभावना व्यक्त की गई है, क्योंकि यह परजीवी बिना कोई लक्षण दिखाए वर्षों तक मस्तिष्क में निष्क्रिय पड़ा रह सकता है।