HIGHLIGHTS:
- 18 साल बाद पटवारी भर्ती घोटाले में FIR
- 6 लोगों पर फर्जी सर्टिफिकेट का आरोप
- रायपुर यूनिवर्सिटी के PGDCA सर्टिफिकेट संदिग्ध
- कोर्ट के आदेश पर हुई जांच
- धोखाधड़ी का मामला दर्ज, जांच जारी
Bhind Patwari Recruitment Scam: मध्यप्रदेश। भिंड में पटवारी भर्ती परीक्षा से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें 18 साल बाद छह लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर हुई लंबी जांच के बाद की गई। देहात थाना पुलिस ने मामले में आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
दस्तावेजों में गड़बड़ी से बढ़ा शक
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2008 की पटवारी भर्ती परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों से कंप्यूटर संबंधी प्रमाण पत्र मांगे गए थे। जहां भिंड जिले के छह अभ्यर्थियों पंकज यादव, रंजीत तोमर, वंदना सोनी, पूनम मिश्रा, अशोक कुमार और अरुण मांझी द्वारा जमा किए गए दस्तावेज़ों में गड़बड़ी पाई गई। जिसके बाद कलेक्ट्रेट स्तर पर इनके शुरुआती दस्तावेज निरस्त कर दिए गए थे।
रायपुर यूनिवर्सिटी के सर्टिफिकेट पर सवाल
इसके बाद आरोपियों ने छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित एक यूनिवर्सिटी से PGDCA सर्टिफिकेट प्रस्तुत किए, जिन्हें वर्ष 2005 का बताया गया। जांच में सामने आया कि ये अभ्यर्थी कभी उस यूनिवर्सिटी में नियमित पढ़ाई करने नहीं गए। इससे सर्टिफिकेट की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
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जालसाजी की पुष्टि, जांच जारी
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि सर्टिफिकेट जालसाजी के तहत तैयार कराए गए थे। पुलिस का कहना है कि अगर पहले से PGDCA प्रमाण पत्र मौजूद थे, तो उन्हें शुरुआती दस्तावेजों में क्यों नहीं दिया गया। सीएसपी निरंजन राजपूत के अनुसार, छह लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच में कुछ अन्य नाम भी सामने आ रहे हैं जिसकी जांच फ़िलहाल जारी है।