EPFO Balance: सिर्फ ‘Hello’ भेजकर मिलेगा PF बैलेंस, WhatsApp पर आएगी नई सुविधा

नई दिल्ली। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) जल्द ही अपने सदस्यों के लिए एक नई डिजिटल सुविधा शुरू करने जा रहा है, जिसके जरिए सिर्फ एक “Hello” मैसेज भेजकर PF बैलेंस, क्लेम स्टेटस और पिछले ट्रांजैक्शन की जानकारी WhatsApp पर मिल सकेगी। WhatsApp से आसान होगी PF की जानकारीनई सुविधा शुरू होने के बाद यूजर्स को किसी वेबसाइट या लॉगिन पोर्टल पर जाने की जरूरत नहीं होगी। बस EPFO के रजिस्टर्ड WhatsApp नंबर पर “Hello” भेजते ही सिस्टम ऑटोमैटिक तरीके से जानकारी उपलब्ध करा देगा। इस सेवा में यूजर अपने PF बैलेंस के साथ-साथ पिछले 5 ट्रांजैक्शन और क्लेम की स्थिति भी आसानी से देख सकेंगे। कैसे काम करेगी यह सुविधा?यह सिस्टम यूजर के UAN (Universal Account Number) से लिंक मोबाइल नंबर को वेरिफाई करेगा। जैसे ही मैसेज कन्फर्म होता है, एक चैटबॉट मेनू ओपन हो जाएगा, जहां से यूजर अपनी जरूरत की जानकारी चुन सकेंगे। पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसमें मल्टी-लैंग्वेज सपोर्ट भी दिया जाएगा, जिससे लोग अपनी स्थानीय भाषा में भी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। AI चैटबॉट से होगा सिस्टम ऑटोमैटिकरिपोर्ट्स के अनुसार, इस नई WhatsApp सर्विस के पीछे एक AI चैटबॉट काम करेगा, जो रीयल-टाइम में EPFO डेटाबेस से डेटा लेकर तुरंत यूजर को जानकारी देगा। इससे PF से जुड़ी सेवाएं ज्यादा तेज और आसान हो जाएंगी।
WhatsApp Broadcast: कैसे बनाएं ब्रॉडकास्ट लिस्ट और क्या है मंथली लिमिट, जानें पूरा तरीका

नई दिल्ली। WhatsApp आज के समय में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है और इसमें कई ऐसे फीचर्स मौजूद हैं जो यूजर्स के काम को आसान बनाते हैं। इन्हीं में से एक खास फीचर है ब्रॉडकास्ट लिस्ट, जिसकी मदद से आप एक साथ कई लोगों को मैसेज भेज सकते हैं, बिना हर बार अलग-अलग कॉन्टैक्ट सेलेक्ट किए। ब्रॉडकास्ट लिस्ट फीचर ग्रुप और चैनल से काफी अलग होता है क्योंकि इसमें भेजे गए मैसेज हर व्यक्ति को व्यक्तिगत (इंडिविजुअल) चैट की तरह दिखाई देते हैं। अगर कोई व्यक्ति जवाब देता है तो वह भी सिर्फ आपको ही दिखता है, बाकी लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिलती। यह फीचर खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो एक साथ कई लोगों को अपडेट या जानकारी भेजना चाहते हैं। ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाने के लिए सबसे पहले WhatsApp खोलना होता है और प्रोफाइल आइकन या सेटिंग्स में जाना होता है। यहां “Broadcast Messages” या “New Broadcast” का विकल्प मिलता है। इस पर क्लिक करके आप अपनी नई लिस्ट बना सकते हैं। एक ब्रॉडकास्ट लिस्ट में अधिकतम 256 कॉन्टैक्ट जोड़े जा सकते हैं। हालांकि ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन लोगों को आप इस लिस्ट में जोड़ते हैं, उनका नंबर आपके फोन में सेव होना चाहिए और आपका नंबर भी उनके कॉन्टैक्ट में सेव होना जरूरी है, तभी आपका मैसेज उन्हें पहुंचेगा। इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि आप एक से ज्यादा ब्रॉडकास्ट लिस्ट बना सकते हैं, जिससे अलग-अलग लोगों के ग्रुप को अलग-अलग मैसेज भेजना आसान हो जाता है। लेकिन WhatsApp ने इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ सीमाएं भी तय की हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूजर महीने में सीमित संख्या में ही ब्रॉडकास्ट मैसेज भेज सकते हैं और जैसे ही लिमिट के करीब पहुंचते हैं, WhatsApp की तरफ से नोटिफिकेशन भी भेज दिया जाता है। हालांकि यह लिमिट सभी यूजर्स के लिए एक जैसी नहीं है और इसे धीरे-धीरे अलग-अलग देशों में रोलआउट किया जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि एक यूजर महीने में लगभग 250 ब्रॉडकास्ट मैसेज भेज सकता है, लेकिन WhatsApp की आधिकारिक गाइडलाइंस के अनुसार यह फीचर फिलहाल पूरी तरह हर जगह एक्टिव नहीं है। WhatsApp Business यूजर्स के लिए इस फीचर में थोड़े अलग नियम हैं, जहां 256 कॉन्टैक्ट तक ब्रॉडकास्ट लिस्ट बनाई जा सकती है और API के जरिए बड़े स्तर पर मैसेजिंग की सुविधा भी मिलती है। इसमें यूजर्स को अलग-अलग प्लान के हिसाब से 24 घंटे में अनलिमिटेड मैसेज भेजने का विकल्प भी मिलता है। कुल मिलाकर, WhatsApp ब्रॉडकास्ट फीचर उन लोगों के लिए काफी उपयोगी है जो बिना ग्रुप बनाए एक साथ कई लोगों तक जानकारी पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन इसकी लिमिट और नियमों का ध्यान रखना जरूरी है ताकि किसी भी तरह की समस्या से बचा जा सके।
Motorola Razr Fold की सेल शुरू: 8.1-इंच डिस्प्ले, Snapdragon 8 Gen 5 और प्रीमियम फीचर्स के साथ फोल्डेबल फोन लॉन्च

नई दिल्ली। Motorola Razr Fold की बिक्री 20 मई से शुरू हो गई है। यह कंपनी का नया बुक-स्टाइल फोल्डेबल स्मार्टफोन है, जिसे पहले MWC 2026 में पेश किया गया था और अब यह मार्केट में उपलब्ध है। दमदार डिस्प्ले और डिजाइनइस फोल्डेबल फोन में 8.1-इंच की बड़ी इनर स्क्रीन और 6.6-इंच का कवर डिस्प्ले दिया गया है। दोनों ही स्क्रीन हाई ब्राइटनेस और स्मूद रिफ्रेश रेट के साथ आती हैं, जिससे फोल्डेबल एक्सपीरियंस और बेहतर हो जाता है। परफॉर्मेंस और हार्डवेयरMotorola Razr Fold में फ्लैगशिप Snapdragon 8 Gen 5 प्रोसेसर दिया गया है, साथ ही इसमें 16GB तक RAM का सपोर्ट मिलता है। कंपनी ने इसमें लंबे समय तक सॉफ्टवेयर अपडेट (7 साल तक) देने का भी दावा किया है। कैमरा और बैटरीफोन में 50MP के ट्रिपल कैमरा सेटअप के साथ प्रीमियम फोटोग्राफी अनुभव मिलता है। इसके अलावा इसमें 6000mAh की बड़ी बैटरी और 80W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट दिया गया है, जो इसे फोल्डेबल कैटेगरी में और भी खास बनाता है। कीमत और ऑफर्सइस फोन की शुरुआती कीमत ₹1,49,999 रखी गई है, जबकि टॉप वेरिएंट ₹1,59,999 तक जाता है। लॉन्च ऑफर में ₹10,000 का फ्लैट डिस्काउंट और ₹10,000 का एक्सचेंज बोनस भी दिया जा रहा है, जिससे प्रभावी कीमत और कम हो जाती है।
Meta Layoffs: वर्क फ्रॉम होम के बाद अचानक छंटनी, 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी गई; AI बना बड़ा कारण

नई दिल्ली। Meta Platforms में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी ने करीब 8 हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें सबसे पहले कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम (WFH) का निर्देश दिया गया और उसके बाद अचानक ईमेल के जरिए छंटनी की जानकारी दी गई। कहा जा रहा है कि यह कार्रवाई मेटा के बड़े “वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग” प्लान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य कंपनी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित छोटे और अधिक प्रभावी ढांचे में बदलना है। पहले WFH, फिर तड़के सुबह ईमेल से नौकरी खत्मरिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने कई देशों के कर्मचारियों को अचानक घर से काम करने का निर्देश दिया। इसके बाद अलग-अलग टाइम जोन में तड़के सुबह ईमेल भेजकर छंटनी की जानकारी दी गई। शुरुआती ईमेल सिंगापुर में लगभग सुबह 4 बजे भेजे जाने की बात सामने आई है। AI बना छंटनी का सबसे बड़ा कारणमेटा अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है और AI-आधारित टीमों पर भारी निवेश कर रही है। कंपनी का फोकस अब छोटी लेकिन हाई-परफॉर्मिंग टीमों पर है। इसी कारण हजारों कर्मचारियों की भूमिका बदली जा रही है और कई पद खत्म किए जा रहे हैं। कंपनी के अनुसार, हजारों कर्मचारियों को नई AI टीमों में शिफ्ट किया जाएगा, जबकि कई खाली पदों को स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। कंपनी के अंदर बढ़ा तनाव और असंतोषछंटनी की खबरें पहले ही लीक होने के कारण कर्मचारियों के बीच डर और अस्थिरता का माहौल बना हुआ था। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि कुछ कर्मचारियों ने ऑफिस से जरूरी चीजें तक घर ले जाना शुरू कर दिया था। इसके अलावा, कंपनी की कथित निगरानी नीतियों को लेकर भी विवाद सामने आए, जिससे कर्मचारियों में असंतोष और बढ़ गया। पूरी टेक इंडस्ट्री में छंटनी का दौरयह सिर्फ मेटा की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में बड़े बदलाव का हिस्सा है। हाल के महीनों में कई बड़ी कंपनियां भी बड़े पैमाने पर छंटनी कर चुकी हैं, क्योंकि AI और ऑटोमेशन तेजी से पारंपरिक नौकरियों की जगह ले रहे हैं। एक्सपर्ट्स की रायविशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ अस्थायी मंदी नहीं, बल्कि टेक इंडस्ट्री में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव है। भविष्य में वही लोग सुरक्षित रहेंगे जो AI सिस्टम को इस्तेमाल करने के साथ-साथ उसे डिजाइन और मैनेज करना जानते हैं।
सावधान: क्या आपके पास भी आया ‘Microsoft Recovery Code’ वाला मेल? एक क्लिक में हैक हो सकता है अकाउंट

नई दिल्ली। इन दिनों इंटरनेट पर एक नया साइबर स्कैम तेजी से फैल रहा है। “Microsoft Recovery Code” नाम से आने वाले ईमेल लोगों के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। फेसबुक, रेडिट और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स ने ऐसे संदिग्ध मेल के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि आपके माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट के लिए “Single Use Recovery Code” तैयार है। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह कोई सामान्य मेल नहीं, बल्कि एक खतरनाक फिशिंग स्कैम है। इसका मकसद यूजर्स को डराकर उनके ईमेल अकाउंट, पासवर्ड और निजी जानकारी तक पहुंच बनाना है। माइक्रोसॉफ्ट अकाउंट नहीं है, फिर भी खतरा क्यों?कई लोग सोचते हैं कि जब वे Gmail या किसी दूसरे ईमेल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं, तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं। लेकिन असली खतरा यहीं छिपा है। दरअसल, दुनिया की हजारों कंपनियां और बिजनेस अपने ऑफिस ईमेल के लिए Microsoft Outlook और माइक्रोसॉफ्ट सर्वर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भले ही आपका ईमेल एड्रेस कंपनी के नाम पर हो, लेकिन बैकएंड माइक्रोसॉफ्ट का हो सकता है। यानी आप भी साइबर ठगों के निशाने पर हो सकते हैं। कैसे काम करता है यह स्कैम?साइबर अपराधी फर्जी रिकवरी कोड वाले ईमेल भेजते हैं। इनमें ऐसे लिंक या अटैचमेंट होते हैं, जिन पर क्लिक करते ही यूजर नकली लॉगिन पेज पर पहुंच जाता है। यहां पासवर्ड डालते ही सारी जानकारी सीधे हैकर्स तक पहुंच जाती है। कई मामलों में ये लिंक डिवाइस में मैलवेयर भी इंस्टॉल कर सकते हैं, जिससे बैंकिंग डिटेल्स, निजी डेटा और ऑफिस की संवेदनशील जानकारी तक चोरी हो सकती है। अगर ऐसा मेल आए तो क्या करें?मेल का जवाब बिल्कुल न दें। किसी भी लिंक या अटैचमेंट पर क्लिक न करें। मेल को तुरंत डिलीट कर दें। अगर गलती से लिंक खुल गया है, तो तुरंत पासवर्ड बदलें। अपने अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) ऑन रखें। केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से ही लॉगिन करें। असली रिकवरी कोड कैसे मिलता है?साइबर विशेषज्ञों के अनुसार माइक्रोसॉफ्ट या कोई भी बड़ी कंपनी बिना रिक्वेस्ट के अचानक रिकवरी कोड नहीं भेजती। असली रिकवरी कोड तभी जनरेट होता है जब यूजर खुद अकाउंट सेटिंग्स में जाकर रिक्वेस्ट करता है या ऑथेंटिकेटर ऐप के जरिए प्रक्रिया पूरी करता है। इसलिए अगली बार अगर आपके इनबॉक्स में “Microsoft Recovery Code” जैसा कोई संदिग्ध मेल आए, तो घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें। आपकी एक छोटी सी गलती साइबर ठगों को आपके पूरे डिजिटल अकाउंट तक पहुंच दे सकती है।
कम खर्च में मनाली का सफर: स्मार्ट प्लानिंग से 7–10 हजार में बना सकते हैं परफेक्ट हिल स्टेशन ट्रिप

नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश का खूबसूरत हिल स्टेशन मनाली देश-विदेश के ट्रैवलर्स के बीच हमेशा से लोकप्रिय रहा है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, बहती ब्यास नदी और शांत वातावरण इसे परफेक्ट हिल स्टेशन बनाते हैं। हालांकि, कई लोग मानते हैं कि मनाली घूमना महंगा होगा, लेकिन सही योजना और स्मार्ट बुकिंग से कम बजट में भी इस ट्रिप को यादगार बनाया जा सकता है। कम खर्च में यात्रा करने के लिए सबसे पहले ट्रैवल टाइम का सही चयन करना जरूरी है। ऑफ सीजन यानी जुलाई से सितंबर या जनवरी के बाद का समय बजट ट्रैवल के लिए बेहतरीन माना जाता है। इस समय होटल, बस और अन्य सेवाएं अपेक्षाकृत सस्ती होती हैं। यात्रा की शुरुआत स्मार्ट तरीके से की जाए तो खर्च और भी कम किया जा सकता है। अपने शहर से पहले दिल्ली या चंडीगढ़ तक ट्रेन से पहुंचना सबसे किफायती विकल्प है। यहां से मनाली के लिए सरकारी HRTC और प्राइवेट बसें आसानी से उपलब्ध हैं, जिनका किराया 500 से 1200 रुपये के बीच होता है। आरामदायक यात्रा के लिए Volvo बस का विकल्प भी है, हालांकि वह थोड़ा महंगा पड़ सकता है। रहने के लिए मनाली में बजट होटल और होमस्टे की कोई कमी नहीं है। खासकर Old Manali और आसपास के क्षेत्रों में 500 से 1200 रुपये प्रति रात में अच्छे कमरे मिल जाते हैं। ग्रुप ट्रिप करने पर रूम शेयरिंग से खर्च और भी कम किया जा सकता है। खानपान के लिए लोकल ढाबे और छोटे कैफे बहुत अच्छे विकल्प हैं, जहां 80 से 150 रुपये में भरपेट भोजन मिल जाता है। लोकल खाने का अनुभव न केवल बजट में मदद करता है बल्कि ट्रिप को और भी यादगार बनाता है। मनाली में घूमने के लिए कई फ्री या कम खर्च वाले विकल्प हैं। Mall Road, Hadimba Temple, Vashisht Village और नदी किनारे घूमना बजट ट्रैवलर्स के लिए परफेक्ट है। एडवेंचर स्पॉट्स जैसे Solang Valley और Rohtang Pass जाने के लिए कैब या परमिट लेना पड़ सकता है, लेकिन ग्रुप में खर्च साझा करके इसे भी कम किया जा सकता है। सही योजना और स्मार्ट बुकिंग के साथ 3–4 दिन की मनाली यात्रा 6000 से 12000 रुपये में पूरी की जा सकती है। इसमें ट्रैवल, होटल, खाना और लोकल घूमने की सभी सुविधाएं शामिल हैं। थोड़ी समझदारी और योजना के साथ कम बजट में भी मनाली ट्रिप यादगार और शानदार बनाई जा सकती है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम खर्च में पहाड़ों की खूबसूरती और बर्फीली वादियों का आनंद लेना चाहते हैं।
बुजुर्ग की जेब काटते हुए धराया आरोपी, अस्पताल में मचा हंगामा

भागलपुर । भागलपुर के मायागंज अस्पताल में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक्स-रे विभाग के पास एक युवक को जेबकतरी करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। यह घटना अस्पताल परिसर में उस समय हुई जब कजरैली रजया निवासी नकुल दास अपनी जांच के लिए लाइन में खड़े थे। वे एक्स-रे कराने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे कि तभी भीड़ में खड़े एक युवक ने उनके जेब से पैसे निकालने की कोशिश शुरू कर दी। जैसे ही नकुल दास को अपनी जेब में हलचल महसूस हुई, उन्हें तुरंत शक हुआ। उन्होंने बिना देर किए युवक का हाथ पकड़ लिया और जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। उनकी आवाज सुनते ही आसपास मौजूद मरीज, परिजन और अन्य लोग मौके पर पहुंच गए। कुछ ही पलों में वहां भीड़ जमा हो गई और लोगों ने आरोपी युवक को घेर लिया। गुस्साई भीड़ ने आरोपी को पकड़कर उसकी जमकर पिटाई कर दी। अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई लोगों ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी उठाए कि आखिर इतने बड़े अस्पताल में जेबकतरे कैसे आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। सूचना मिलने पर अस्पताल के सुरक्षा कर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और किसी तरह आरोपी को भीड़ से छुड़ाया। इसके बाद उसे मायागंज अस्पताल स्थित पुलिस कैंप में ले जाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बरारी थाना पुलिस को भी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को अपने साथ थाने ले गई। पुलिस के अनुसार पकड़े गए युवक ने अपना नाम मोहम्मद पप्पू बताया है और वह सकूरा क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल रहा है या नहीं। उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा रही है। घटना के बाद अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में दहशत और नाराजगी दोनों देखी गई। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होनी चाहिए ताकि मरीजों और उनके साथ आए परिजनों को इस तरह की घटनाओं का सामना न करना पड़े। पीड़ित नकुल दास ने बताया कि वह इलाज के लिए आए थे और लाइन में खड़े थे, तभी एक व्यक्ति ने उनकी जेब में हाथ डालने की कोशिश की। उन्होंने तुरंत उसे पकड़ लिया, जिससे बड़ा नुकसान होने से बच गया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है। इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर सतर्कता की जरूरत को उजागर कर दिया है।
एडमिशन विवाद: परिजनों का आरोप- अमीर बच्चों को ही मिल रहा दाखिला

भागलपुर । भागलपुर के इंटर स्तरीय पंचानन झा उच्च विद्यालय बैजानी में नामांकन प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस बार कई छात्रों का एडमिशन नहीं होने से अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने स्कूल परिसर में पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। अभिभावकों का आरोप है कि पहले से पढ़ रहे बच्चों को भी इस बार नामांकन से वंचित कर दिया गया है, जिससे उनके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है। प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का नामांकन अचानक बदले गए नियमों के कारण अटक गया है। कई बार स्कूल आने-जाने के बावजूद उन्हें पहले आश्वासन दिया गया था कि एडमिशन होगा, लेकिन बाद में नियमों का हवाला देकर प्रवेश रोक दिया गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि अब स्कूल प्रशासन केवल मेरिट और नए चयन मानकों के आधार पर एडमिशन दे रहा है, जिससे कई योग्य छात्र बाहर हो गए हैं। अभिभावक सुनीता देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके बच्चों की पढ़ाई यहीं से शुरू हुई थी, लेकिन अब उन्हें दूर-दराज के स्कूलों में भेजने की मजबूरी बन रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अच्छे स्कूलों में सिर्फ विशेष वर्ग या आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के बच्चों को ही पढ़ने का अधिकार है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि दूर स्कूल जाने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्कूल अब मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, इसलिए नामांकन प्रक्रिया में सख्त नियम लागू किए गए हैं। प्रिंसिपल मनीष कुमार सिंह ने बताया कि कक्षा 9 में कुल 180 सीटें निर्धारित हैं और सीमित सीटों के कारण सभी छात्रों को प्रवेश देना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में NMMS परीक्षा पास करने वाले छात्रों को प्राथमिकता देने का प्रावधान था, लेकिन बाद में नई SOP के तहत मेरिट और परीक्षा परिणाम के आधार पर ही प्रवेश प्रक्रिया तय की गई। इसके तहत दो बार टेस्ट और मार्कशीट के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है। प्रशासन का कहना है कि इस बार प्राइवेट स्कूलों के छात्रों को भी सीमित रूप से ही शामिल किया गया है और नियमों के अनुसार ही एडमिशन दिया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन का यह भी कहना है कि संसाधनों की सीमा को देखते हुए अधिक छात्रों का नामांकन करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। स्थिति को देखते हुए स्कूल परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। अभिभावक लगातार सीट बढ़ाने और सभी योग्य छात्रों को प्रवेश देने की मांग कर रहे हैं, जबकि स्कूल प्रशासन नियमों का हवाला देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है। अब इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है।
अभिनेता आर. माधवन ने वेलनेस ब्रांड की मनमानी पर जताई नाराजगी, कहा- 'कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी'

नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता आर. माधवन इस समय एक वेलनेस ब्रांड के खिलाफ अपनी नाराजगी को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेता ने सोशल मीडिया पर खुलकर उस कंपनी की आलोचना की, जिसने कथित तौर पर उनके इंटरव्यू की क्लिप का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए किया। माधवन का कहना है कि ब्रांड ने बिना उनकी अनुमति और जानकारी के वीडियो का हिस्सा लिया, जिससे ऐसा लग सकता है कि वह प्रोडक्ट का समर्थन कर रहे हैं। अभिनेता ने इसे गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। बुधवार को माधवन ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर उस ब्रांड की वीडियो पोस्ट का स्क्रीनशॉट साझा किया। वीडियो में उनके इंटरव्यू का हिस्सा ऐसा दिखाया गया था कि आम लोग समझ सकते थे कि माधवन स्वयं उस प्रोडक्ट की तारीफ कर रहे हैं। अभिनेता ने इसे गलत ठहराया और कहा कि इस तरह के कदम जनता का भरोसा तोड़ते हैं। उन्होंने कहा, “इस वीडियो को इस तरह बनाया गया जैसे मैं खुद प्रोडक्ट का प्रचार कर रहा हूं। इसमें मेरी किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई। यह शर्मनाक है और लोगों को सही और गलत में फर्क समझने में मुश्किल होती है।” माधवन ने पोस्ट में लंबा कैप्शन लिखते हुए कहा कि यह बेहद दुखद और शर्म की बात है कि कुछ कंपनियां सोचती हैं कि किसी कलाकार के इंटरव्यू या वीडियो को बिना अनुमति प्रचार सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कानूनी नोटिस भी भेज दिया गया है। अभिनेता ने लोगों को सलाह दी कि वे ऐसे पेशेवर और कंपनियों से सतर्क रहें। आर. माधवन के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में कई लोग सामने आए। लोग उनकी नाराजगी और चेतावनी को सही मानते हुए ब्रांड की मनमानी पर सवाल उठा रहे हैं। मामला न केवल मीडिया में बल्कि जनता के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है, और विशेषज्ञ इस तरह की मनमानी को कलाकारों और आम जनता दोनों के लिए गंभीर चेतावनी मान रहे हैं। इस घटना से यह साफ हो गया है कि बिना अनुमति किसी की व्यक्तिगत या पेशेवर सामग्री का इस्तेमाल करना गंभीर अनुचित है, और कलाकार इस तरह की हरकतों के खिलाफ सख्त कदम उठा सकते हैं। माधवन ने न केवल कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है बल्कि लोगों को जागरूक करने की भी कोशिश की है, जिससे भविष्य में इस तरह की मनमानी पर रोक लगे।
तेलंगाना ने केंद्र से मांगी 5,000 करोड़ की विशेष वित्तीय सहायता, यंग इंडिया स्कूल परियोजना के लिए दी मांग

नई दिल्ली। तेलंगाना सरकार ने केंद्र से विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि राज्य में पूंजीगत निवेश और विकास परियोजनाओं को गति दी जा सके। उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से नई दिल्ली में मुलाकात की और राज्य की आर्थिक, शैक्षणिक और मानव संसाधन विकास संबंधी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में वित्तीय सहायता की आवश्यकता, विशेष रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में किए जा रहे बड़े निवेशों की व्याख्या की गई। उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री को बताया कि तेलंगाना में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश, विशेषकर यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल्स (वाईआईआईआरएस) परियोजना, राज्य की सामाजिक और शैक्षणिक संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। इस परियोजना का कुल बजट 30,000 करोड़ रुपए है और यह लाखों बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण संबंधी सुविधाएं सुनिश्चित करेगी। उन्होंने आर्थिक मामलों के विभाग से इस परियोजना को एफआरबीएम सीमा से छूट देने की अपील भी की, ताकि दीर्घकालिक मानव पूंजी निवेश पर वित्तीय प्रतिबंध न आए। विक्रमार्क ने कहा कि इस पहल से राज्य के वंचित और पिछड़े वर्गों के बच्चों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, जो उन्हें सशक्त बनाएगा और राज्य की जनसांख्यिकीय क्षमता को मजबूत करेगा। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन सौंपकर एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता और इसके महत्व को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि तेलंगाना की आबादी में पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोग बहुसंख्यक हैं, और उनके सशक्तिकरण के लिए यह योजना निर्णायक साबित होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई इस बैठक में राज्य के कृषि और मानव संसाधन विकास से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कृषि मंत्री तुम्माला नागेश्वर राव और अन्य प्रतिनिधियों ने राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और शिक्षा से जुड़े बड़े निवेशों के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्तीय जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत छूट की मांग की। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त वित्तीय सहायता के बिना राज्य की दीर्घकालिक विकास योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं और मानव पूंजी में निवेश की गति धीमी पड़ सकती है। पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की बैठक में मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने यंग इंडिया प्रोजेक्ट के लिए विशेष वित्तीय सहायता और एफआरबीएम छूट की मांग की थी, और अब इस मांग को दोबारा केंद्र के समक्ष रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस योजना के कार्यान्वयन से तेलंगाना के पिछड़े और वंचित वर्गों को शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास के क्षेत्र में स्थायी लाभ मिलेगा। इसके साथ ही राज्य की आर्थिक क्षमता बढ़ेगी और दीर्घकालिक मानव संसाधन विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा। इस बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री को यह स्पष्ट किया गया कि तेलंगाना की अधिकांश आबादी सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से आती है। इस आंकड़े के अनुसार, राज्य की आबादी का 56.33 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग, 17.43 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 10.45 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से संबंधित है। इस सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार ने एसएएससीआई योजना के तहत अतिरिक्त 5,000 करोड़ रुपए की मांग की है, ताकि शैक्षणिक और सामाजिक सुधारों को समय पर लागू किया जा सके और राज्य में समग्र विकास को बढ़ावा दिया जा सके।